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सुप्रीम कोर्ट: अब सरकारी विज्ञापनों में छपेंगी सीएम, और राज्यपालों की तस्वीरें

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 March 2016, 14:04 IST

सुप्रीम कोर्ट ने आज सरकारी विज्ञापनों में सिर्फ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के फोटोग्राफ के प्रयोग के पूर्ववर्ती फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर अपना फैसला सुनाया है. 

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस प्रफुल्ल चंद पंत की पीठ ने कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, असम और ओडिशा के राज्य सरकारों की पुनर्विचार याचिकाएं स्वीकार करते हुए अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए, यह आदेश दिया कि सरकारी विज्ञापनों में राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों एवं कैबिनेट मंत्रियों की फोटो का प्रयोग भी हो सकता है. 

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पूर्व दिये फैसले में सरकारी विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के अलावा किसी भी अन्य तस्वीर के प्रकाशन पर रोक लगा दिया था. 

सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ फिर सरकार की ओर से दलील देते हुए अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि कि अगर प्रधानमंत्री की फोटो विज्ञापनों में हो सकती है तो मुख्यमंत्रियों और बाकी मंत्रियो की क्यों नहीं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जनता को पांच साल एक ही चेहरा देखने को मिलेगा, जो प्रधानमंत्री का होगा. यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है. दूसरे चेहरे को भी दिखाना लोकतंत्र का हिस्सा है.

रोहतगी ने अपनी दलील में कहा कि हर मंत्री अपने अपने विभाग में कार्य करता है, फिर वह सरकारी विज्ञापनों में अपने काम के बारे में जनता को क्यों नहीं बताएं.

इससे पहले रोहतगी ने कहा था कि विज्ञापनों का खर्चा सरकारी बजट से किया जाता है. ऐसे में यह विधायिका के काम है. इसमें सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए. यह संविधान के नियमों के खिलाफ है.

First published: 18 March 2016, 14:04 IST
 
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