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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब, 'कोहिनूर हीरे' पर दावा नहीं करना चाहिए

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 April 2016, 16:35 IST

कोहिनूर हीरे को भारत वापस लाने की मांग पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. केंद्र सरकार का कहना है कि कोहिनूर हीरे पर भारत को दावा नहीं करना चाहिए.

अदालत में सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि ना तो इसे ब्रिटेन ने चुराया है और ना ही जबरदस्ती ले जाया गया. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस विषय पर संस्कृति मंत्रालय की भी यही राय है.

रंजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि 1849 सिख युद्ध के दौरान हर्जाने के तौर पर महाराजा दिलीप सिंह ने कोहिनूर हीरा अंग्रेजों को भेंट किया था.

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अगर अब भारत सरकार उस पर दावा करती है या उसकी वापसी का प्रयास करती है तो भारतीय संग्रहालय में रखी दूसरे देशों की चीजों पर भी वो देश दावा कर सकते हैं.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत ने तो कभी भी किसी दूसरे देश को उपनिवेश नहीं बनाया और ना ही दूसरे की चीज़ें अपने यहां छीन कर रखीं.

केंद्र को छह हफ्ते की मोहलत


सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हम इस मामले में विदेश मंत्रालय के जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को छह हफ्ते का वक्त दिया है.

कोर्ट ने 9 अप्रैल को केंद्र से कोहिनूर को वापस लाने पर अपना रुख साफ करने को कहा था. चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्‍या इस बात पर सहमति है कि इस केस को यहीं खारिज किया जाए.

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इस मामले में ऑल इंडिया ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस फ्रंट ने याचिका दायर कर रखी है. इससे पहले ब्रिटिश सरकार ने 2013 में भारत को कोहिनूर हीरा वापस देने की मांग को खारिज कर दिया था.

ऐसा माना जाता है कि 1850 में डलहौजी के मार्कीज ने कोहिनूर हीरा क्‍वीन विक्‍टोरिया को उपहार में देने के लिए पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह को मजबूर किया था.

वर्तमान समय में कोहिनूर हीरे की कीमत 200 मिलियन डॉलर होने की संभावना जताई जा रही है.

First published: 18 April 2016, 16:35 IST
 
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