Home » इंडिया » SC order today ensures that the ghosts of 2002 will continue to haunt Modi
 

गुजरात दंगों का भूत: हर चौथे महीने पर एसआईटी दाखिल करेगी जांच रिपोर्ट

आर. वेंकटरमन | Updated on: 15 April 2017, 8:14 IST

 

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में हुए गुजरात दंगों की फिर याद दिला दी है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि दंगों के कारणों की जांच और इसकी जवाबदेही तय करने के लिए गठित स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम को अब जांच की रिपोर्ट हर चौथे महीने देनी होगी. गौरतलब है कि दंगे के आरोपियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी है.


भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और संजय किशन कौल की पीठ ने एसआईटी के मौजूदा प्रमुख आरके राघवन को उनके अनुरोध पर इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है. राघवन को एसआईटी प्रमुख की जिम्मेदारी से मुक्त करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी अनुरोध किया था. एसआईटी के नए प्रमुख नियुक्त होने तक समिति के सदस्य एके मल्होत्रा इसके काम पर ‘नजर’ रखेंगे.

एसआईटी के पास 9 मामले


2002 में राज्य में कई मुस्लिम-विरोधी दंगे हुए थे जिनके आरोप नरेंद्र मोदी पर लगे थे. उसके बावजूद मोदी राज्य में तीन बार चुनाव जीते और बाद में 2014 में देश के प्रधानमंत्री भी बन गए. पर सर्वोच्च न्यायालय के आज के आदेश से यह होगा कि अब जांच की हर चौथे महीने रिपोर्ट आएगी. उनमें वे आरोपी भी शामिल हैं, जिन्हें निचली अदालत ने दोषी नहीं माना था.
एसआईटी के पास कुल 9 मामले हैं, जिनमें नरोदा गांव में हुआ नरसंहार कांड भी शामिल है. एसआईटी के मुताबिक 8 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और वे गुजरात हाई कोर्ट में अपील स्टेज पर हैं.


नरोदा गांव में हुए दंगों की जांच अब भी चल रही है क्योंकि सैकड़ों गवाहों से इस सिलसिले में पूछताछ और जिरह करना बाकी है. सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईटी के एक और सदस्य के वेंकटेशन को इसकी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है. लिहाज़ा, अब केवल मल्होत्रा इस काम को देखेंगे.


नरोदा कांड के मामले में शीर्ष कोर्ट ने सुनवाई की अवधि पहले ही बढ़ा दी थी, जबकि साल्वे के यह कहने पर कि 300 से ज्यादा गवाहों की जांच होनी है, सुनवाई पूरी करने की समय-सीमा 6 महीने रखी गई थी. इस दंगे में एक समुदाय के 11 लोग मारे गए थे. इस मामले में 82 से ज्यादा आरोपी हैं.


एक विशेष अदालत में गुलबर्ग सोसाइटी दंगे के 20 से ज्यादा आरोपियों को दोषी माना जा चुका है. इसमें एक समुदाय विशेष के 68 लोग मारे गए थे. उनमें एक कांग्रेस के सांसद एहसान जाफरी थे. अहमदाबाद की निचली अदालत में भी कुछ मामले लंबित पड़े हैं.


सर्वोच्च न्यायालय ने जांच के लिए एसआईटी गठित की थी और मुकदमों पर बराबर नजर रखे हुए हैं. मुकदमे गुजरात के विभिन्न हिस्सों में हुए दंगों से संबंधित हैं, जिनमें ओड, सरदारपुरा, नरोदा गांव, नरोदा पाटिया, माछीपीठ, तरसाली, पंडारवाडा, राघवपुरा आदि शामिल हैं. 2002 के गुजरात दंगों में विभिन्न समुदायों के 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे. दंगों के ये मामले रफा-दफा हो जाएंगे या इन पर कानूनी कार्यवाई होगी, यह तो समय बताएगा. पर आज की तारीख में सच यह है कि दंगों के जांच की हर चौथे महीने रिपोर्ट से सत्ता में बैठे लोग परेशान होते रहेंगे.

First published: 15 April 2017, 8:14 IST
 
अगली कहानी