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बीसीसीआई बनाम लोढ़ा समिति: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू किए जाने के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. पिछले साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को नए सिरे से खड़ा करने के लिए जस्टिस आरएम लोढा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था.

बीसीसीआई ने लोढ़ा समिति की कई सिफारिशों पर अपनी आपत्ति जताई है. अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशें पूरी तरह लागू होंगी या बीसीसीआई को इससे छूट दी जाएगी.

समिति के अनुसार बीसीसीआई के पदाधिकारियों की उम्र 70 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा पदाधिकारी, मंत्री या सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए. इस सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजनेताओं पर कोई पाबंदी नहीं है, बस मंत्री नहीं होना चाहिए.

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि बीसीसीआई का परफॉरमेंस ऑडिट होना चाहिए. यह जवाबदेही होनी चाहिए कि पैसा कहां जा रहा है और कहां खर्च हो रहा है.

लोढ़ा समिति ने चार जनवरी, 2016 को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी. समिति ने अपनी रिपोर्ट में मंत्रियों और सरकारी अफसरों को बीसीसीआई से बाहर रखने का सुझाव दिया.

इसके अलावा समिति ने सिफारिश की थी कि एक राज्य को एक ही वोट का अधिकार हो. महाराष्ट्र जैसे राज्य जहां तीन रणजी टीमें हैं. वहां एक ही वोट का हक होगा, जो बीसीसीआई तय करेगा. वैसे ही गुजरात की भी तीन टीमें हैं.

समिति की रिपोर्ट में बीसीसीआई के प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन का सुझाव भी दिया गया है और सीईओ के पद का प्रस्ताव रखा है जो नौ सदस्यीय शीर्ष परिषद के प्रति जवाबदेह रहेगा. समिति ने कहा कि अंदरूनी टकरावों से निपटने के लिए बोर्ड का लोकपाल भी होना चाहिए.

बोर्ड ने पिछले साल नवंबर में एपी शाह की नियुक्ति करके यह सुझाव पहले ही मान लिया है. इस साल अप्रैल महीने में कोर्ट के दबाव के बाद राहुल जौहरी को बीसीसीआई का सीईओ नियुक्त किया गया था.

First published: 30 June 2016, 4:48 IST
 
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