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सबरीमाला में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाला SC का फैसला 'अंतिम शब्द' नहीं : CJI बोबडे

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 December 2019, 18:52 IST

अगले हफ्ते केरल की एक महिला की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सबरीमाला (Sabrimala) पर 2018 के फैसले में सभी उम्र की महिलाओं को धर्मस्थल में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी, जो अंतिम शब्द नहीं था. याचिकाकर्ता को कथित रूप से सबरीमाला मंदिर में जाने से रोका गया था. भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एससी पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह महिला श्रद्धालु बिंदू अम्मिनी की ओर से पेश हुई.

उन्होंने कहा कि 2018 के फैसले का उल्लंघन करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल पर हमला किया गया था. वकील जयसिंह ने कहा कि बिंदू अम्मिनी पर पुलिस आयुक्त कार्यालय के ठीक बाहर हमला किया गया था. जयसिंग ने कहा "पुलिस आयुक्त कार्यालय के ठीक बाहर कुछ रासायनिक पदार्थ से बिंदू पर हमला किया गया."


पीठ ने कहा "हम याचिका को अगले सप्ताह याचिका के साथ सूचीबद्ध करेंगे." अपनी याचिका में बिंदू ने कहा कि उसने 26 नवंबर को कार्यकर्ता तृप्ति देसाई और अन्य लोगों के साथ मंदिर का दौरा करने का फैसला किया था, लेकिन टैक्सी चालकों ने उन्हें लेने से इनकार कर दिया. इसके बाद वह पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने गई, लेकिन पुलिस आयुक्त, एर्नाकुलम जिला, केरल के कार्यालय के सामने उनपर हमला किया गया.

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First published: 5 December 2019, 18:46 IST
 
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