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सुप्रीम कोर्ट: समलैंगिक तीसरे लिंग में नहीं, केवल ट्रांसजेंडर को दर्जा

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2016, 15:22 IST
(कैच)

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि सिर्फ ट्रांसजेंडर लोग ही तीसरे जेंडर की श्रेणी में हैं. इसके अलावा लेस्बियन, गे और बायसेक्सुअल लोग तीसरे लिंग की श्रेणी में नहीं आते हैं.

ट्रांसजेंडरों के लिए सकारात्मक पहल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडर को 'थर्ड जेंडर' के रूप में मान्यता दी थी.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दक्षिण भारत के कई राज्यों में 'ट्रांसजेंडर पॉलिसी' भी बनाई गई. सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में दिए अपने फैसले को साफ करते हुए टिप्पणी की, "केवल ट्रांस जेंडर तीसरे जेंडर में हैं. गे, लेस्बियन, बायसेक्सुअल तीसरे जेंडर में नहीं आते हैं."

दो साल पुराने फैसले की व्याख्या

मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ट्रांसजेंडर को ही तीसरे लिंग के रूप में पहचान दी गई है. दरअसल केंद्र सरकार ने कोर्ट के 2014 के फैसले में संशोधन की मांग की थी.

केंद्र ने अदालत से कहा, "उसे न्यायालय के फैसले को लागू करने में परेशानी हो रही है, क्योंकि आदेश के एक पैरा में लेस्बि‍यन, गे और बायसेक्सुअल को भी ट्रांसजेंडर के साथ तीसरे लिंग के दर्जे में रखा गया है."

केंद्र की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इसमें कोई उलझन की स्थि‍ति नहीं है. इसमें साफ-साफ लिखा है कि लेस्‍बि‍यन, गे और बायसेक्सुअल थर्ड जेंडर की श्रेणी में नहीं आते."

'ओबीसी श्रेणी में ट्रांसजेंडर'

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "सरकार को चाहिए कि वह फॉर्म में थर्ड जेंडर की कैटेगरी बनाए." यही नहीं, कोर्ट ने तीसरे लिंग को ओबीसी मानने और इस आधार पर शिक्षा और नौकरी में आरक्षण की भी बात कही.

सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2014 में एक अहम फैसला सुनाते हुए किन्नरों या ट्रांसजेंडर्स को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी थी. इससे पहले उन्हें मजबूरी में अपना जेंडर 'पुरुष' या 'महिला' बताना पड़ता था.

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही ट्रांसजेंडर्स को सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के रूप में पहचान करने के लिए कहा.

अप्रैल 2014 में ऐतिहासिक फैसला

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेते वक्त या नौकरी देते वक्त ट्रांसजेंडर्स की पहचान तीसरे लिंग के रूप में की जाए. किन्नरों या तीसरे लिंग की पहचान के लिए कोई कानून न होने की वजह से उनके साथ शिक्षा या जॉब के क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जा सकता."

इस फैसले के साथ देश में पहली बार तीसरे लिंग को औपचारिक रूप से पहचान मिली. इसके बाद कई प्रमाण पत्रों में पुल्लिंग, स्त्री लिंग के साथ ट्रांसजेंडर की तीसरी श्रेणी बनाई गई.

First published: 30 June 2016, 15:22 IST
 
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