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Judgement Day: जस्टिस का जुर्म और जेल का सफ़र

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2017, 12:46 IST

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन को अदालत, न्यायिक प्रक्रिया और पूरी न्याय व्यवस्था की अवमानना का दोषी मानते हुए छह महीने की सज़ा सुनाई है. भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी वर्तमान जज को जेल जाने की सज़ा सुनाई गई है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में जस्टिस कर्णन के बयानों को मीडिया में प्रकाशित किए जाने पर भी रोक लगा दी है.

इस साल जनवरी में पीएम मोदी को जस्टिस कर्णन ने एक चिट्ठी लिखी थी. जिसके बाद ये विवाद शुरू हुआ. इस केस में अब तक के घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन पर एक नज़र:

23 जनवरी 2017 

जस्टिस सी एस कर्णन ने 23 जनवरी 2017 को पीएम मोदी को लिखे खत में सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए . कर्णन ने इस चिट्ठी में 20 जजों के नाम लिखते हुए उनके खिलाफ जांच की मांग की थी.

8 फरवरी 2017

पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को अवमानना नोटिस जारी करते हुए 13 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की बेंच के सामने पेश होने का आदेश दिया

31 मार्च 2017

सुप्रीम कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद जस्टिस कर्णन 31 मार्च को अदालत के सामने पेश हुए थे. देश की न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब हाईकोर्ट के किसी सिटिंग जज को अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने को कहा गया.

 

28 अप्रैल 2017

31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश होने के बाद 28 अप्रैल को कर्णन ने केस की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस जेएस खेहर समेत सात जजों की विदेश यात्रा पर बैन लगाने का आदेश जारी किया.

1 मई  2017

एक मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के दिमागी संतुलन की जांच कराने का आदेश दिया. कोर्ट ने डॉक्टरों के एक दल से पांच मई को जस्टिस कर्णन की मेडिकल जांच कराने का आदेश दिया, लेकिन कर्णन ने इससे मना कर दिया.

8 मई 2017

जस्टिस सी एस कर्णन ने 8 मई 2017 को भारत के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर समेत सुप्रीम कोर्ट के सात अन्य जजों को 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुना दी. कर्णन ने इन सभी जजों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 व संशोधित एक्ट 2015 के तहत दोषी पाए जाने का फैसला सुनाया.

9 मई 2017

सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की संविधान पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन को अवमानना का दोषी करार दिया. उन्हें कोर्ट ने 6 महीने क़ैद की सज़ा सुनाई है. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को जस्टिस कर्णन को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजने का आदेश भी दिया है.

First published: 9 May 2017, 12:46 IST
 
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