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अब UGC, NEET, और CBSE परीक्षाओं में नहीं देना होगा आधार, जानें SC के फैसले के बाद कहां लगेगा आधार कार्ड

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 September 2018, 13:26 IST

आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने आज फैसला सुनाते हुए आधार कार्ड की संवैधानिक मान्यता को कुछ शर्तों के साथ बरकरार रखा है. इसी के साथ कोर्ट ने आज मोबाइल नंबर के साथ आधार को लिंक कराने के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि किसी भी मोबाइल नंबर के साथ आधार को लिंक कराने की कोई जरुरत नहीं है.

सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने आधार की वैधता को कुछ शर्तों के साथ मान्य रखा है. इतना ही नहीं UGC, NEET तथा CBSE परीक्षाओं के लिए भी आधार अनिवार्य नहीं होगा. वहीं स्कूलों में दाखिला लेते वक़्त भी आधार को दिखाना जरुरी नहीं है. इस मामले में फैसला सुनाते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा, ''जरुरी नहीं कि हर चीज उत्तम हो. उत्तम होने से अच्छा है यूनिक हो.'' आधार कार्ड की डुप्लीकेसी को लेकर कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड की डुप्लीकेसी संभव नहीं है. कोर्ट की बेंच ने कहा कि आधार कार्ड आज के समय में गरीबों की ताक़त का एक जरिया बन गया है.

 

इस मामले फैसले सुनाते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा, ''आधार नामांकन के लिए यूआईडीएआई द्वारा नागरिकों के न्यूनतम जनसांख्यिकीय और बॉयोमीट्रिक डेटा एकत्र किए जाते है. किसी व्यक्ति को दी गई आधार संख्या यौनिक है और किसी अन्य व्यक्ति के पास नहीं जा सकती है.'' फैसला पढ़ते हुए आगे जस्टिस सीकरी ने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि आम आदमी के निजी डाटा की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द 'डाटा प्रोटेक्शन कानून' लाए.

17 जनवरी को शुरू हुई इस मामले की सुनवाई कुल 38 दिनों तक चली थी. आधार की अनिवार्यता व्यक्ति की निजता का उल्लंघन करती है या नहीं इस मामले में 5 जजों की संवैधानिक पीठ फैसला सुनाएगी. आधार की अनिवार्यता और निजता के मौलिक अधिकार उल्लंघन मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अशोक भूषण के 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले की सुनवाई की.

First published: 26 September 2018, 13:26 IST
 
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