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सबरीमाला मंदिर पर SC के फैसले के खिलाफ हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, महिलाओं की एंट्री का कर रहे विरोध

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 October 2018, 9:06 IST

सबरीमाला मंदिर में पिछले कई दशकों से चली आ रही महिला प्रवेश निषेध की परंपरा को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. सबरीमाला मंदिर में 10 साल से लेकर 50 साल तक की उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक थी. जिसके खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत ने 28 सितंबर को अपना फैसला सुनाया और हर उम्र की महिलाओं के लिए इस मंदिर के दरवाजे खुल गए.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हिंदू संगठन और सबरीमाला मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले संगठन ने मंगलवार को केरल के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया. इतना ही नहीं इस फैसले का विरोध करते हुए इसके खिलाफ सरकार से अध्यादेश लाइन की अपील की. इन संगठनों का कहना है कि संस्कृति और परंपरा को बचाने के लिए सरकार को आगे आकर अध्यादेश लाना चाहिए.

मंगलवार को केरल के कई शहरों में हिन्दू संगठन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सडकों पर उतर आए. ये विरोध प्रदर्शन त्रावणकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व कांग्रेस विधायक प्रयर गोपालाकृष्णन के नेतृत्व में किया गया. उन्होने इस प्रदर्शन को लेकर कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए वो इस फैसले का विरोध करते रहेंगे.

इस विरोध प्रदर्शन में सबरीमाला मंदिर तांत्रिक परिवार के सदस्य राहुल ईश्वर और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के रैलियां निकाली जिससे कि यातायात भी बाधित हुआ. गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर का प्रबंधन टीडीबी करता है.

 

कोच्चि में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से हल्की नोकझोंक तब हुई जब पुलिस ने उन्हें यातायात बाधित करने से रोकने का प्रयास किया. पंडालम में सबसे बड़ा प्रदर्शन देखा गया, जहां पूर्व पंडालम शाही परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में पुरुषों और महिलाओं के साथ भजन गाते हुए पंडालम के वेलिए कोयिकल मंदिर की तरफ गए.

इस महिला जज ने किया मंदिर में महिलाओं की नो-एंट्री का समर्थन, बोलीं नही हटना चाहिए बैन

5 जजों की बेंच में एक महिला जज थी एंट्री के खिलाफ

सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की एंट्री को रोकने को संविधान के खिलाफ बताते हुए नो एंट्री को 28 सितंबर को हटा दिया है. 5 जजों की बेंच ने 4-1 के अनुपात से महिलाओं के मंदिर में प्रवेश निषेध को गलत बताते हुए इस नो एंट्री को हटाया गया. 5 जजों की बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस आर नरीमन और जस्टिस इंदु मल्होत्रा थीं.

इस मामले में इंदु मल्होत्रा के अलावा बाकी सभी चारों जजों ने महिलाओं की एंट्री को हरी झंडी दिखा दी. लेकिन जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने इसका विरोध किया. महिलाओं की मंदिर में प्रवेश पर लगी रोक का समर्थन करते हुए जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा की धार्मिक मामलों से कोर्ट को दूर रहना चाहिए.

First published: 3 October 2018, 9:06 IST
 
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