Home » इंडिया » SC verdict on sabarimala temple: Justice Indu Malhotra support the no entry of women in temple, says ban should not be removed
 

सबरीमाला मंदिर फैसला: इस महिला जज ने किया मंदिर में महिलाओं की नो-एंट्री का समर्थन, बोलीं नही हटना चाहिए बैन

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 September 2018, 12:58 IST

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की एंट्री को रोकने को संविधान के खिलाफ बताते हुए नो एंट्री को हटा दिया है. 5 जजों की बेंच ने 4-1 के अनुपात से महिलाओं के मंदिर में प्रवेश निषेध को गलत बताते हुए इस नो एंट्री को हटा दिया है. 5 जजों की बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस आर नरीमन और जस्टिस इंदु मल्होत्रा थीं.

इस मामले में इंदु मल्होत्रा के अलावा बाकी सभी चारों जजों ने महिलाओं की एंट्री को हरी झंडी दिखा दी. लेकिन जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने इसका विरोध किया. महिलाओं की मंदिर में प्रवेश पर लगी रोक का समर्थन करते हुए जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा की धार्मिक मामलों से कोर्ट को दूर रहना चाहिए.

वहीं 4-1 के अनुपात से इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने महिलाओं की एंट्री को मान्यता दे दी. फैसला सुनाते समय चीफ जस्टिस ऑफ़ दीपक मिश्रा ने कहा कि पूजा करने का अंधकार सबको है और जेंडर के आधार पर इसमें को भेदभाव नहीं किया जा सकता. 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश रोकना संविधान के खिलाफ है.

केरल के सबरीमाला मंदिर पर SC का ऐतिहासिक फैसला, हर उम्र की महिलाएं कर सकती हैं प्रवेश

फैसला सुनाते समय चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि महिलाएं किसी भी तरह से पुरषों से कमतर नहीं है. एक तरफ तो महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और दूसरी तरफ उन पर प्रतिबन्ध लगाए जाते हैं. भगवान के साथ सम्बन्ध को जैविक और शारीरिक कारणों से नहीं जोड़ा जा सकता है.

वहीं इस मामले में जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने महिलाओं के प्रवेश पर बैन को हटाने का विरोध किया. ये जज इंदु की तरफ से अप्रत्याशित राय थी. उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताएं भी बुनियादी अधिकारों का हिस्सा हैं. कोर्ट को किसी भी सूरत में धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं देना चाहिए. साथ ही उन्होएँ ये भी कहा है कि धार्मिक आस्थाओं को आर्टिकल 14 के आधार पर नहीं देखा जा सकता.

उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में कोर्ट को सेक्युलर भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने मंदिर के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि सबरीमाला श्राइन के पास आर्टिकल 25 के तहत अधिकार है, इसलिए कोर्ट को इन मामलों में दखल नहीं देने चाहिए.

First published: 28 September 2018, 12:58 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी