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केरल के सबरीमाला मंदिर पर SC का ऐतिहासिक फैसला, हर उम्र की महिलाएं कर सकती हैं प्रवेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 September 2018, 11:10 IST

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आज केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लगी रोक को खत्म कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की बेंच ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया. 

गौरतलब है कि केरल के सबरीमाला मंदिर में 15 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश निषेध के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्‍यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले में आठ दिनों तक सुनवाई के बाद 1 अगस्‍त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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फैसला सुनाते समय चीफ जस्टिस ऑफ़ दीपक मिश्रा ने कहा कि पूजा करने का अंधकार सबको है और जेंडर के आधार पर इसमें को भेदभाव नहीं किया जा सकता. 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश रोकना संविधान के खिलाफ है.

फैसला सुनाते समय चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि महिलाएं किसी भी तरह से पुरषों से कमतर नहीं है. एक तरफ तो महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और दूसरी तरफ उन पर प्रतिबन्ध लगाए जाते हैं. भगवान के साथ सम्बन्ध को जैविक और शारीरिक कारणों से नहीं जोड़ा जा सकता

इस मामले में जस्टिस मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की पीठ ने कहा था कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से अलग रखना संवैधानिक दृष्टि से उचित नहीं है. और इसे लोकतंत्र के अंतर्गत समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया था.

इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन ने दयार की थी याचिका

मंदिर में महिलाओं के प्रवेश निषेध के खिलाफ इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और अन्य ने देश की सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की थी. IYLA ने याचिका में कहा कि यह प्रथा लैंगिक आधार पर भेदभाव करती है समानता के अधिकार के तहत इसे खत्म किया जाना चाहिए. एसोसिएशन ने कहा है कि मंदिर में प्रवेश के लिए 41 दिन से ब्रहचर्य की शर्त नहीं लगाई जा सकती है.

केरल सरकार ने बार बार बदला रुख

इस मामले में केरल की सरकार का स्टैंड साफ़ नहीं दिखा है. अब तक केरल सरकार इस मुद्दे पर चार बार अपना रुख बदल चुकी है. 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने कहा था कि वह महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के पक्ष में है. जबकि इसके पहले सरकार महिलाओं के प्रवेश निषेध का समर्थन कर रही थी. हालांकि इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से बार बार स्टैंड बदलने को लेकर सवाल भी किया था.

First published: 28 September 2018, 11:01 IST
 
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