Home » इंडिया » SC Verdict on Section 377: homosexuality is not a Crime, Two adult can make Physical relation privately
 

Section 377: सिर्फ यौन संबध बनाने की मिली आजादी, शादी करने का अधिकार अभी कोसों दूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 September 2018, 13:15 IST

धारा 377 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए समलैंगिगता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया. लेकिन समलैंगिक जोड़ों के शादी करने के अधिकार पर अभी भी जंग बाकी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि समलैंगिगता अब अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा. हर व्यक्ति को जीने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में समलैंगिगता को अपराध बताने वाली धारा 377 को निरस्त कर दिया गया है.

काफी लम्बे समय से चल रही इस बहस में आखिरकार LGBT समुदाय को जीत हासिल हुई है. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि इस लोकतांत्रिक देश में सबको जीने का अधिकार है. उन्होंने साथ ही में ये भी नसीहत दी कि लोगों को अब नजरिया बदलने के साथ सोच को बदलने की जरुरत है. इसी के साथ CJI दीपक मिश्रा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसके व्यक्तित्व के आधारभूत गुणों से अलग नहीं किया जा सकता.

Section 377 पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब समलैंगिकता अपराध नहीं

इसे देखते हुए पांच जजों की संविधान पीठ ने चार महत्वपूर्ण विषयों पर सुनवाई शुरू की, जिनमें समलैंगिकों के बीच शारीरिक संबंधों का मुद्दा भी था. इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के साथ न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा शामिल थे.

क्या समलैंगिक जोड़े को शादी करने का मिलेगा अधिकार?

सुप्रीम कोर्ट ने अभी केवल धारा 377 को समाप्त किया है. अर्थात अब कोई दो वयस्क अपनी मर्जी से एकांत में शारीरिक संबंध बना सकते हैं. लेकिन ये जोड़े शादी करने के लिए कानूनी रूप से मान्य होंगे या नहीं इसके लिए अभी सुप्रीम कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया है.

जानें क्या है धारा 377, क्यों छिड़ी है इस पर बहस?

 

दरअसल सरकार की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में अपील की गयी थी कि अभी सिर्फ धारा 377 पर सुनवाई की जाए. इससे जुड़े अन्य पहलुओं को अभी इस सुनवाई में शामिल न किया जाए. लेकिन इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब उम्मीद है कि LGBT समुदाय समलैंगिक जोड़ों की शादी के मुद्दे को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है.

 

क्या है धारा 377
इस धारा के तहत दो पुरुषों या महिलाओं के बीच सहमति से भी शारीरिक संबंध हैं तो वो इस कानून के दायरे मे आएगा. सेक्शन 377 के तहत अगर कोई स्‍त्री-पुरुष आपसी सहमति से भी अप्राकृतिक यौन संबंध बनाते हैं तो इस धारा के तहत 10 साल की सजा एवं जुर्माने का प्रावधान है.

 

First published: 6 September 2018, 13:15 IST
 
अगली कहानी