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अरुणाचल के राज्यपाल को नोटिस देना 'गलत' था: सुप्रीम कोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 February 2016, 13:43 IST

अरूणाचल प्रदेश में चल रहे राजनैतिक संकट में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के राज्यपाल को नोटिस जारी करने के मामले में अपनी ‘गलती’ स्वीकार करते हुये राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा को जारी अपना नोटिस वापस ले लिया है. 

समाचार एजेंसी आईएएनएस के खबरों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता करने वाले जस्टिस जेएस खेहड़ ने न्यायिक कार्यवाही में राज्यपाल को ‘पूरी तरह से छूट’ प्राप्त होने संबंधी कोर्ट के पहले के फैसले और कानूनी स्थिति पर विचार के बाद सुनवाई करते हुए कहा कि 'यह (नोटिस जारी करना) हमारी गलती है.'

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अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मामले की सुनवाई शुरू होते ही कानूनी स्थिति का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के 2006 के दिये फैसले का हवाला देते हुए कहा, 'राज्यपालों को कानूनी कार्यवाही में शामिल होने के लिए नहीं कहा जा सकता है'.

संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपालों को पूरी तरह छूट प्राप्त होने के रोहतगी के दलील पर अपनी सहमती जताते हुए संविधान पीठ से कहा, 'हम प्रतिवादी संख्या दो (राज्यपाल) को जारी नोटिस वापस लेने को न्यायोचित और उचित मानते हैं.'

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अरुणाचल मामले की सुनवाई कर रहे इस संविधान पीठ में जस्टिस जे एस खेहड़ के अलावा जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस मदन बी लोकूर, जस्टिस पी सी घोष और जस्टिस एन वी रमण शामिल रहे.

पीठ ने इसके साथ ही स्पष्ट किया कि नोटिस वापस लेने का उसका आदेश अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को उसके समक्ष अपना पक्ष रखने तथा दायर करने से ‘मना नहीं’ करेगा. वो इस मामले में स्वतंत्र हैं.

First published: 2 February 2016, 13:43 IST
 
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