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साल 2016: भारतीय राजनेताओं के लिए सांता क्लॉज़ की सौगातें

दुर्गा एम सेनगुप्ता | Updated on: 25 December 2016, 7:48 IST

क्रिसमस आ चुका है. वो कहते हैं न कि यह मौसम खुश रहने, औरों को खुश करने का है. पर ऐसे वक्त में आई नोटबंदी ने तो दुश्वारियां बढ़ा कर हमारी खुशियां ही छीन ली हैं. हमारे मनों में कटुता और नफरत भर दी है.

आइए, थोड़ा इससे हटकर बात करें. विषय से हटने के लिए क्षमा. क्रिसमस का मौका है, तो थोड़ा सांता-बंता खेलें और अपने जाने-पहचाने नेताओं को अपनी तरफ से कुछ उपहार दें. अंतर केवल इतना है कि हम तोहफों की केवल घोषणा करेंगे, खूब जोर-शोर से, पर वास्तव में उन्हें देंगे कुछ नहीं. उन्होंने भी तो हमसे खुशी के खोखले वादे ही किए थे, दिया कुछ नहीं.

1. नरेंद्र मोदी

हम जनता के लोकप्रिय नेता से शुरुआत करते हैं. भारत के सबसे चर्चित नेता, हमारे प्रधानमंत्री. इन्हें एक शानदार कीमती आइना तो दिया ही जाना चाहिए. अपने महंगे चममक-दमक वाले सूट के कारण वे अखबारों में चर्चा में रहे और उनमें सेल्फी लेने का जुनून भी बना रहा. ऐसे में उनकी आत्ममुग्धता आइने से ज्यादा भला किससे तुष्ट हो सकता है? आप हमें राष्ट्रविरोधी कह लें, पर वक्त की बात है किसी ने अभी तक उन्हें आइना कभी दिखाया नहीं है.

2. अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए जाहिर है सबसे उपयोगी उपहार जीवन पर्यन्त कफ सिरप देना होगा. पर हम कुछ अलग करना पसंद करेंगे. तो गुमनाम सांता के तौर पर हम उन्हें तोहफे में रोहित शेट्टी की अगली फिल्म में रोल देना चाहते हैं. उसमें एक्शन होगा, ड्रामा होगा, इमोशन होगा इसके अलावा, वे बाद में उसकी एक लाइन में समीक्षा भी कर सकते हैं.

3. सुषमा स्वराज

विदेश मंत्री का अपना फैशन है, अपनी स्टाइल. उन्हें फैब इंडिया का और जैकेट दिलाने का तो कोई मतलब नहीं है. इसके लिए वो सोशल मीडिया की मदद से ले सकती हैं. उन्हें हम खुद को ही सौंप देते हैं. तो सुषमाजी, हम आपके सोशल मीडिया का अकाउंट संभाल सकते हैं और उन सभी अच्छी जगहों पर घूम सकते हैं, जहां आप काम के लिए जाती हैं. खुद को तोहफे में देने से बढ़िया भला और क्या हो सकता है? नेक काम के लिए है, जब तक कि इसका पैसा मिलता है.

4. ममता बनर्जी

बंगाल की मुख्यमंत्री और 'दीदी' का व्यक्तित्व जोशपूर्ण है, जो उनके पहने गए लिबास से कभी नहीं झलकता. हम नहीं चाहते कि उनके पुराने धवल वस्त्र उस माटी से खराब हों, जिसकी वे अक्सर बात करती हैं. साल भर का उजाला उन्हें सप्लाई कर दिया जाए, तो उनकी साडिय़ां सफेद झक रहेंगी और दीदी में तेजी बरकरार रहेगी. बस चार बूंद काफी हैं.

5.अरुण जेटली

वित्त मंत्री होने के नाते अरुण जेटली का नोटबंदी से गहरा नाता है. आने वाले केंद्रीय बजट पर पीएम के बदलते फैसले से लेकर सभी प्रश्नों का जवाब उन्हें ही देना है. जेटलीजी हमारे सभी प्रश्नों का जवाब देकर हमें राहत दे सकते हैं. उन्हें शायद किसी चीज की जरूरत है, तो वह है सच्चाई का सामना करने की. नोटबंदी के पक्ष में वे कोई और बयान दें, उससे पहले हम उन्हें शहर के सभी बैकों का खास दौरा ऑफर करना चाहेंगे.

6. शशिकला

हो सकता है शशिकला देश में पहले से दुर्जेय मंत्री नहीं हों, पर वे हैं. जयललिता के निधन के बाद लोगों की नजर शशिकला पर है और हो सकता है वे अन्नाद्रमुक की बागडोर हथिया लें. अम्मा में पारदर्शिता की कमी थी, लिहाजा हम शशिकला को सोशल मीडिया की सौगात देना चाहेंगे ताकि उनका सीधा साक्षात्कार जनता से होता रहे. और फिर, सारी मौज भाजपा ही क्यों करे?

7. अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री विचित्र टिप्पणियां करने में माहिर हैं. काले धन से लोकतंत्र में मदद मिलती है, उनकी यह टिप्पणी शायद नोटबंदी की सबसे हल्की आलोचना थी. नोटबंदी के खिलाफ शायद यही एक टिप्पणी है, जिसमें कोई दम नहीं है. यादव वंश के चश्मे-चिराग़ अखिलेश को तर्कसंगत सोच के प्रशिक्षण की जरूरत है. हम इस क्रिसमस पर उन्हें थोड़ा ट्यूशन देंगे. हमें विश्वास है, वे नई करेंसी में उसका भुगतान कर सकते हैं.

8. मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख की मुसलमान विरोधी, ईसाई विरोधी बातें इतनी आम है कि शायद उन्हें कुछ चाहिए, तो वह है भारतीय संविधान की प्रति. हम उन्हें संविधान की प्रति एक गुलदस्ते के साथ भेजेंगे, मुन्नाभाई अंदाज में 'गेट वैल सून' कार्ड के साथ.

9. स्मृति ईरानी

जब से स्मृति ईरानी ने मानव संसाधन विकास मंत्री का पद गंवाया है, वे सुर्खियों में नहीं हैं. सच कहूं तो हमें उनकी कमी खल रही है. इसलिए हम चाहते हैं कि इस क्रिसमस, उन्हें बालाजी टेलीफिल्म्स का ऑफर मिले. क्योंकि स्मृति भी कभी एक्ट्रेस थीं.

10. नजीब जंग

पूर्व उपराज्यपाल के अचानक इस्तीफा देने से सीएम और आम आदमी पार्टी के मजे हो गए हैं. अब जंग फ्री हैं, उनके पास वक्त ही वक्त है. ऐसे में उनके लिए अच्छा तोहफा किताब हो सकता है, क्योंकि उनका 'पहला प्यार' अकादमिक है. वो भी चेतन भगत की किताब, क्योंकि दिल्ली में ज्यादातर उन्हीं की किताबें पढ़ी जाती हैं. तो मि. जंग प्लीज़ इसका लुत्फ उठाएं.

First published: 25 December 2016, 7:48 IST
 
दुर्गा एम सेनगुप्ता @the_bongrel

Feminist and culturally displaced, Durga tries her best to live up to her overpowering name. She speaks four languages, by default, and has an unhealthy love for cheesy foods. Assistant Editor at Catch, Durga hopes to bring in a focus on gender politics and the role in plays in all our interactions.

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