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समलैंगिकता के मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई संवैधानिक पीठ

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 February 2016, 16:00 IST

समलैंगिकता को अपराध बताने वाली धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला पांच जजों की संविधान पीठ को भेज दिया है. यहां इस पर विस्तार से सुनवाई होगी.

मंगलवार को चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस अनिल आर दवे और जेएस खेहर की पीठ ने खुली अदालत में आठ क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई की.

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इससे पहले 11 दिसंबर, 2013 सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने अपने फैसले में अप्राकृतिक यौन अपराधों से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 की वैधता बरकरार रखी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने उस समय कहा था कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 को बदलने के लिए कोई संवैधानिक गुंजाइश नहीं है. धारा 377 के तहत दो व्यस्कों के बीच समलैंगिक रिश्ते को अपराध माना गया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद दायर रिव्यू पिटीशन को भी खारिज कर दिया था. हालांकि, अब समलैंगिक अधिकारों के लिए कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठन नाज फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई के लिए कोर्ट सहमत हो गया है.

First published: 2 February 2016, 16:00 IST
 
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