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JNU प्रशासन ने उमर ख़ालिद की PhD थीसिस जमा करने से किया इनकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 July 2018, 12:01 IST

20 जुलाई को जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई की थी. दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने उमर और अन्य छात्रों के विषय में कहा था कि अदालत जब तक अन्य छात्रों की याचिका पर फैसला नहीं कर लेती, तब तक जेएनयू विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करेगा.

लेकिन अब उमर खालिद ने आरोप लगाया है कि जेएनयू प्रशासन ने उनका पीएचडी थीसिस जमा करने से इनकार कर दिया है. हालांकि जेएनयू प्रशासन ने कन्हैया कुमार की थीसिस जमा कर ली है. उमर खालिद ने बताया कि अदालत से राहत मिलने के बाद भी सोमवार की सुबह चीफ प्रॉक्टर कौशल कुमार ने उमर ख़ालिद, अस्वति और अनंत प्रकाश नारायण की पीएचडी थीसिस जमा करने से इनकार कर दिया.

बता दें कि 23 जुलाई को थीसिस जमा करने का अंतिम दिन था. इस पर उमर खालिद ने कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने थीसिस लेने से इनकार कर अदालत की अवमानना की है.

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गौरतलब है कि बीते 17 जुलाई को कन्हैया कुमार ने 9 फरवरी, 2016 को जेएनयू में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाने के मामले को लेकर 10 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाने के जेएनयू प्रशासन के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. जिस पर 20 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी छात्रों को राहत दी थी. 

इसमें 13 छात्रों के खिलाफ यूनिवर्सिटी की उच्चस्तरीय जांच समिति ने आदेश सुनाया था. इस आदेश में चार लोगों को सोमवार को पीएचडी थीसिस जमा करनी है. इनमें कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अफ्रीकन स्टडीज़ की अस्वति और लॉ और गवर्नेंस के अनंत प्रकाश नारायण शामिल हैं.

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हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रशासन के फैसलों को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया था. हालांकि अदालत ने उमर ख़ालिद की याचिका पर सुनवाई नहीं की थी, लेकिन अदालत ने जेएनयू प्रशासन को आदेश दिया था कि इस मामले में जब तक कोई आदेश न आए, तब तक छात्रों के ख़िलाफ़ कोई क़दम नहीं उठाया जाना चाहिए.

First published: 24 July 2018, 11:56 IST
 
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