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मायावती को बड़ा झटका, स्वामी प्रसाद मौर्य का बसपा से इस्तीफा

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 June 2016, 10:57 IST
(ट्विटर)

बहुजन समाज पार्टी को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका लगा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीएसपी से इस्तीफा दे दिया है. स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी सुप्रीमो और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का करीबी माना जाता है.

ऐसी चर्चा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अब भाजपा या समाजवादी पार्टी का रुख कर सकते हैं. मौर्य ने विधानसभा चुनाव के टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी की अध्यक्ष मायावती पर संगीन आरोप लगाए हैं.

पैसे लेकर टिकट बांटने का आरोप

स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी छोड़ने से पहले सीधे बीएसपी अध्यक्ष मायावती को कठघरे में खड़ा किया है. मौर्य ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पैसे लेकर टिकटों का बंटवारा किया है.

पार्टी छोड़ने के अपने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, "बहुजन समाज पार्टी में टिकट की नीलामी हो रही है." 

'दलित नहीं दौलत की बेटी'

मौर्य ने मायावती पर टिकटों की बोली लगाने का आरोप लगाते हुए पार्टी महासचिव पद से इस्तीफा दिया है. मौर्य ने कहा कि बीएसपी सुप्रीमो, कांशीराम और अंबेडकर से रास्ते भटक गई हैं.

मौर्य ने इस दौरान कहा, "मायावती दलित नहीं, दौलत की बेटी हैं. मायावती ने पिछले चुनाव से सबक नहीं लिया."

मंत्री बन सकते हैं मौर्य

इस बीच स्वामी प्रसाद मौर्य की बीएसपी से बगावत के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है. मंगलवार को कौमी एकता दल और सपा के विलय पर सियासी घमासान मचा हुआ है. सीएम अखिलेश यादव ने कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को विलय के कुछ ही घंटों बाद बर्खास्त कर दिया था.

सियासी हल्कों में ये खबरें भी हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. 27 जून को अखिलेश यादव मंत्रिमंडल का विस्तार होना है.

स्वामी प्रसाद मौर्य की गिनती उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के बड़े नेताओं में थी. वह अभी विधानसभा में नेता विपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.

कौन हैं स्वामी प्रसाद मौर्य?

पूर्वांचल से बीएसपी के बड़े चेहरे के तौर पर स्वामी प्रसाद मौर्य की पहचान थी. 2009 में पडरौना विधानसभा के लिए हुए एक उपचुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मौर्य को पार्टी का उम्मीदवार बनाने का फैसला किया.

उस चुनाव में मौर्य ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह की मां को हराकर सबको चौंका दिया था. इस जीत के साथ ही मौर्य ने 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के आरपीएन सिंह के हाथों मिली शिकस्त का बदला भी ले लिया था. 

2012 में 16वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में भी स्वामी प्रसाद मौर्य जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे. अभी वो पडरौना विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी के विधायक हैं.

मौर्य चार बार विधायक रहने के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. 13वीं और 14वीं विधानसभा में वह रायबरेली जिले की डलमऊ सीट से विधायक थे. ओबीसी समुदाय से आने वाले मौर्य 1997 में भी वह राज्य सरकार में मंत्री थे.

इसके अलावा 2002 से 2003 के दौरान मौर्य उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता सदन थे. प्रतापगढ़ जिले में पैदा हुए मौर्य ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई करते हुए एमए और एलएलबी की डिग्री हासिल की.

First published: 23 June 2016, 10:57 IST
 
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