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कांग्रेस नेता एसएम कृष्णा हुए बगावती, "पार्टी को कार्यकर्ताओं की नहीं मैनेजर की जरूरत"

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 January 2017, 17:22 IST

कांग्रेसी नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा ने पार्टी के प्रति बगावती तेवर दिखाते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस को जनता का नेता नहीं बल्कि मैनेजर चाहिए, जो हालात पर काबू पा सके. कृष्णा ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का भी आरोप लगाया.

कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद एमएस कृष्णा ने कहा कि उन्हें बेहद दुख है कि पार्टी द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है. अपने इस्तीफे के बारे में उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र त्यागपत्र देने की वजह नहीं है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक पूर्व विदेश मंत्री कृष्णा ने कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपने इस्तीफे की जानकारी दी है. रविवार को बेंंगलुरु के सदाशिवनगर स्थित आवास पर संवाददाता सम्मेलन में कृष्णा ने पार्टी छोड़ने के फैसले की घोषणा की और कहा कि यह फैसला उन्होंने भारी मन से लिया है. 

शनिवार को कृष्णा के इस्तीफा देने के बाद से ही राज्य और राष्ट्रीय नेता उन्हें मनाने में जुटे थे लेकिन कृष्णा ने रविवार को कहा कि वे इस फैसले को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

कांग्रेस आलाकमान पर खुद को दरकिनार किए जाने का आरोप लगाते हुए 84 वर्षीय कृष्णा ने कहा कि पार्टी को आज जनाधार वाले नेताओं की नहीं, सिर्फ प्रबंधकों की जरूरत है जो स्थिति को संभाल सकें. 

कृष्णा ने कहा कि पीढ़ियां बदल जाती हैं लेकिन मूल्य नहीं बदलते. आज जो कांग्रेस की स्थिति है ऐसे में पार्टी का भविष्य उज्जवल नहीं है. कृष्णा ने पिछले चार साल से कांग्रेस में अपनी उपेक्षा पर क्षोभ जताते हुए कहा कि पार्टी ने जिस तरह मुझ जैसे कर्तव्यनिष्ठ और प्रतिबद्ध कार्यकर्ता को बढ़ती उम्र का हवाला देकर हाशिए पर धकेल दिया उससे मुझे काफी दु:ख हुआ.

उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगा कि पार्टी को अपने अस्तित्व का अहसास करना चाहिए और इसी कारण काफी विचार के बाद मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया. कृष्णा ने कहा कि उम्र सिर्फ एक मानसिक अवस्था है और परिस्थितियां क्या चाहती हैं इसका फैसला सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए.

कृष्णा ने कहा कि कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया है. कुछ लोग होते हैं जो युवावस्था में भी सक्रिय नहीं होते हैं. कृष्णा ने कहा कि उन्होंने 1962 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. वे किसी राजनीतिक बयार से प्रभावित होकर राजनीति में नहीं आए.

फाइल फोटोः हिलेरी क्लिंटन के साथ एसएम कृष्णा. (साभारः विकीमीडिया)

कांग्रेस में उस दौर से थे जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं. 46 साल कांग्रेस के साथ रहा लेकिन अब लगता है कि पार्टी को मेरी जरुरत नहीं है.

पार्टी में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं होने पर रोष जताते हुए कृष्णा ने कहा कि वर्ष 2012 में बिना किसी ठोस कारण के ही मुझे विदेश मंत्री पद से हटा दिया गया. पिछले चुनावों में मैंने दौरे किए तब किसी ने मेरी उम्र नहीं देखी. अचानक मेरी उम्र बाधा बन गई, मैं पार्टी के लिए बूढा हो गया और मुझे आराम की जरूरत पड़ गई.

सक्रिय राजनीति से संन्यास के बारे में पूछे जाने पर कृष्णा ने कहा कि रिटायरमेंट मेरे शब्दकोश में नहीं है. सक्रिय राजनीति से दूर नहीं होऊंगा लेकिन कांग्रेस छोड़ने के फैसले पर कायम हूं. आगे क्या करना है इसका फैसला समर्थकों के साथ चर्चा के बाद करूंगा. 

कृष्णा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की योजना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि ऐसा कुछ नहीं है. उन्हें अपनी विचारधारा पर विश्वास है और इस पर आंच आने के कारण ही कांग्रेस भी छोड़ने का फैसला किया.

First published: 29 January 2017, 17:22 IST
 
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