Home » इंडिया » sex workers kids told in court, we don't want to live our moters
 

जब सेक्स वर्कर्स की बेटियों ने कहा, नहीं रहना हमें मां के साथ

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 April 2017, 15:08 IST
Redlight area

आंध्र प्रदेश की कुछ सेक्स वर्कर्स की नाबालिग बच्चियों ने कोर्ट के सामने अपनी मां के पास वापस जाने से इनकार कर दिया है. बताया जा रहा है कि इन बच्चियों ने हाईकोर्ट के समक्ष उक्त तर्क रखते हुए कहा कि वे वर्तमान में दिल्ली स्थित गैर सरकारी संगठन में खुश हैं.

बच्चियों के इस बयान को सुनकर कोर्ट ने एनजीओ के कामकाज की काफी सराहना भी की. कोर्ट के सामने यह मामला तब सामने आया, जब जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस दीपा शर्मा की खंडपीठ बच्चियों की मां द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की.

मामले में याची ने आरोप लगाया कि एनजीओ ने उनकी बच्चियों को बंधक बना रखा है और कोर्ट एनजीओ को आदेश दे कि वो उनकी बच्चियों को वापस उन्हें सौंप दें. उसके बाद खंडपीठ के सामने पेश हुई बच्चियों ने कहा वे संगठन के पास खुश है और अपनी मां के पास वापस नहीं जाना चाहती हैं.

कोर्ट के पूछने पर बच्चियों ने कहा कि वे एनजीओ में ही रहना चाहती हैं और जहां उन्हें बेहतर शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण खाना और अच्छी देखभाल हो रही है. अदालत ने इस मामले की सुनवाई 9 नवंबर को तय की है.

दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता राहुल मेहरा ने अदालत को बताया कि शुरू में बच्चियों को उनकी मां से मिलने की इजाजत दी गई थी, लेकिन बच्चियों ने वापस जाने से मना कर दिया.

इसके बाद यह याचिका दायर की गई है. उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों व मानव तस्करी से मुक्त करवाएं गए बच्चों को एनजीओ की देखरेख में रखा गया है और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) समय-समय पर वहां का निरीक्षण करती है.

First published: 27 April 2017, 15:08 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी