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सर्वे: दिल्ली में पिछले साल 40% महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार हुईं

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

निर्भया कांड के तीन साल बीत जाने की बाद भी दिल्ली में लागू कड़े कानूनों के बावजूद यहां की महिलाएं शायद ही खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है. इंटरनेशनल क्रिमिनल जस्टिस रिव्यू के एक सर्वे के अनुसार पिछले साल दिल्ली की 40 फीसदी महिलाओं को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है.

सर्वे के अनुसार अधिकतर महिलाओं ने कहा है कि उन्हें सार्वजनिक स्थान जैसे बस और पार्कों में यौन शोषण का सामना करना पड़ा है. सर्वे के अनुसार ज्यादातर अपराध दिन के समय में हुए हैं.

दिल्ली में निर्भया मामले के बाद यौन उत्पीड़न के कानूनों में बदलाव किया गया था. अब महिलाओं का पीछा करना और घूरना भी अपराध की श्रेणी में आता है.

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दिल्ली में यह सर्वे 1400 महिलाओं और पुरुषों को मिलाकर किया गया है. सर्वे में शामिल 33 फीसदी महिलाओं नेे कहा कि उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर जाना छोड़ दिया है, और 17 फीसदी महिलाओं ने सार्वजनिक स्थलों पर उत्पीड़न के चलते अपनी नौकरी छोड़ दी.

सर्वे में हिस्सा लेने वाली 58 फीसदी महिलाओं ने कहा है कि उन्हें जीवन में कम से कम एक बार यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है.

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इस सर्वे को करने वाले अमेरिका के मिशिगन युनिवर्सिटी में क्रिमिनल जस्टिस के प्रोफेसर महेश नल्ला का कहना है कि निर्भया कानून के बावजूद महिलाएं अब तक डर रही हैं.

उन्होंने कहा कि भारत में सार्वजनिक स्थानों पर महिलाएं सुरक्षित नहीं है और यह मानवाधिकार का मसला है.

नल्ला ने कहा, 'महिलाओं की यौन उत्पीड़न की समस्या पूरी दुनिया में सामने आई है. भारत और दक्षिण एशिया जैसे उभरते लोकतांत्रिक देशों में यह समस्या ज्यादा सामने आ रही है कि क्योंकि कर्मचारियों में अब महिलाएं भी शामिल होने लगी हैं.'

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शोधकर्ताओं के अनुसार वास्तव में पारंपरिक रूप से भारत एक पितृसत्तात्मक समाज रहा है जहां कई लोगों को मानना है कि महिलाओं का स्थान घर के भीतर होना चाहिए.

इस सर्वे को करने वाले स्वीडन के स्टॉकटन युनिवर्सिटी के प्रोफेसर मनीष मदान के अनुसार दिल्ली के सार्वजनिक स्थलों और सार्वजनिक परिवहनों में इस तरह की घटनाओं का इतिहास रहा है और पुलिस इस तरह के मामलों में निष्क्रिय है.

First published: 29 March 2016, 5:12 IST
 
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