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शहीद दिवस 2019: भगत सिंह को फांसी लगने के बाद महात्मा गांधी ने दी ये चेतावनी

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 March 2019, 11:11 IST

पूरे देश में आज शहीद दिवस (#ShaheedDiwas) मनाया जा रहा है. आज ही के दिन भगत सिंह (#BhagatSingh), सुखदेव और राजगुरू (#Rajguru) को फांसी दी गई थी. भगत सिंह ने देश के खातिर हंसते-हंसते फांसी को लगे लगा लिया था ताकि आगे चलकर भारत को आजादी मिले.

भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी मिलने के बाद महात्मा गांधी ने देशवासियों को चेतावनी देते हुए कहा था, "भगत सिंह और उनके साथियों के शहीद होने से लाखों लोग दुखी हैं. मैं उनकी लगन की भूरि-भूरी प्रशंसा करता हूं. मैं देश के नवयुवकों को इस बात की चेतावनी देता हूं कि वे उनके पथ का अवलंबन न करें. हमें भरसक उनके अभूतपूर्व त्याग, अदम्य उत्साह और विकट साहस का अनुकरण करना चाहिए, परंतु उन गुणों का उपयोग उनकी तरह न करना चाहिए. देश की स्वतंत्रता हिंसा और हत्या से प्राप्त न होगी’

इलाहाबाद से प्रकाशित 'भविष्य' अखबार में महात्मा गांधी का ये बयान 1931 में में छपा था. बता दें कि उस समय अंग्रेजों द्वारा फांसी की खबरों के प्रचार-प्रसार में रोक लगाती थी. सरकार ने भगत सिंह को फांसी देने की खबर को रोकने के लिए अखबारों की की हजारों प्रतियां को जब्त कर लिया था, लेकिन अलीगढ़ के श्याम बिहारी लाल ने "भविष्य" अखबार की ऐसी प्रतियों को अपने पास रखा, जिससे आगे चलकर देश को राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास को बयां करने का दस्तावेज मिले. बता दें कि श्याम बिहारी लाल गुप्तचर स्वतंत्रता सेनानी थे.

श्याम बिहारी के निधन के बाद 2005 में इनके बेटे निरंजन लाल ने इनके इन दस्तावेजों की हिफाजत की, जो आज तक सहेज कर रखा हुआ है. सन् 1931 के भविष्य अखबारों की सुर्खियों से पता चलता है कि अंग्रेज किस तरह से फांसी की खबरों को दबाना चाहती थी.

भगत सिंह का लोगों को लिखा आखिरी पत्र

भगत सिंह ने अपने अपने आखिरी पत्र में लिखा, "साथियों स्वाभाविक है जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए. मैं इसे छिपाना नहीं चाहता हूं, लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि कैंद होकर या पाबंद होकर न रहूं. मेरा नाम हिन्दुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है. क्रांतिकारी दलों के आदर्शों ने मुझे बहुत ऊंचा उठा दिया है, इतना ऊंचा कि जीवित रहने की स्थिति में मैं इससे ऊंचा नहीं हो सकता था. मेरे हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ने की सूरत में देश की माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह की उम्मीद करेंगी. इससे आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना नामुमकिन हो जाएगा. आजकल मुझे खुद पर बहुत गर्व है. अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतजार है. कामना है कि यह और नजदीक हो जाए."

भगत सिंह का पंजाब के गवर्नर को लिखा पत्र

‘अंत में हम केवल यह कहना चाहते हैं कि आपकी अदालत के फैसले के अनुसार, हम पर सम्राट के खिलाफ युद्ध करने का अभियोग लगाया गया है और इस प्रकार हम युद्ध के शाही कैदी हैं. अतएव हमें फांसी पर न लटका कर गोली से उड़ाया जाना चाहिए.

इसका निर्णय अब आपके ही ऊपर है कि जो कुछ अदालत ने निर्णय किया है उसके अनुसार आप कार्य करेंगे या नहीं. हमारी आपसे विनम्र प्रार्थना है और हमें पूर्ण आशा है कि आप कृपा कर फौजी महकमे को आज्ञा देकर हमारे प्राण दंड के लिए एक फौज या पल्टन के कुछ जवान बुलवा लेंगे’
- सरदार भगत सिंह, मार्च 1931, लाहौर सेंट्रल जेल

शहीद दिवस 2019: भगत सिंह ने फांसी के पहले लिखी थी अपने आखिरी खत मेें ये बातें, जानिए क्या थे वो शब्द

First published: 23 March 2019, 11:11 IST
 
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