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जगन्नाथ मंदिर में SC ने दी थी गैर-हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति, शंकराचार्य ने खोला मोर्चा

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 July 2018, 15:00 IST

देश के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में गैर हिन्दुओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का असर धार्मिक कुनबों में दिखना शुरू हो गया है. जगन्नाथ मंदिर में गैर हिन्दुओं के प्रवेश निषेध को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के खिलाफ शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने मोर्चा खोल दिया है. शंकराचार्य के साथ ही गजपति राजा दिब्यसिंह देव (जिन्हें भगवान जगन्नाथ का पहला सेवक माना जाता है) ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का विरोध किया है. उन्होंने मंदिर में गैर हिन्दुओं के प्रवेश की अनुमति पर आपत्ति जताई है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को श्री जगन्नाथ मंदिर में गैर हिन्दुओं के प्रवेश निषेध पर निर्देश दिए थे. कोर्ट ने कहा था कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन वहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं को भगवान की पूजा अर्चना करने दें. शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती और गजपति राजा दिब्यसिंह देव ने श्री जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इसके संबंध में पेश किए गए एक प्रस्ताव पर अपना विरोध जाहिर किया है.

बता दें कि 12वीं सदी में बनें इस मंदिर में अब तक सिर्फ हिन्दुओं को ही प्रवेश की अनुमति थी. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने इस परंपरा में बदलाव के निर्देश दिया था. विश्व हिन्दू परिषद् भी इस फैसले से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है. विहिप ने इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराते हुए मामले में एक पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर करने की बात कही है. परिषद् का मानना है कि इस मुद्दे पर पुनः विचार किये जाने की आवश्यकता है.

इस मामले में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का कहना है कि ये सनातन धर्म की सदियों पुरानी परंपरा है, और इस परम्परा को तोड़ कर गैर हिन्दुओं को मंदिर में आने की अनुमति देना स्वीकार नहीं है. इसी क्रम में गजपति राजा दिब्यसिंह देव ने कहा है कि गैर हिन्दुओं को भगवान् के दर्शन मिल सकें इसीलिए रथयात्रा निकाली जाती है. उस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को मंदिर से बाहर इसलिए ही ले जाया जाता है ताकि अलग-अलग धर्मों के भक्तों उनका आशीर्वाद ले सकें. साथ ही उन्होंने कहा की रथ यात्रा समाप्त हो जाने के बाद मंदिर प्रबंध समिति से विचार विमर्श करके ही आगे कोई कदम उठाया जायेगा.

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क्या था कोर्ट का फैसला
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट गुरूवार ने जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन को निर्देश दिया था कि वह सभी हर धर्म-आस्था को मानने वाले को मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी जाये. . इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी साफ कहा था कि जो गैर-हिंदू मंदिर में दर्शन के लिए आएंगे उनके लिए अलग ड्रेस कोड होगा जिसका उन्हें पलायन करना होगा. और उसके साथ ही एक घोषणा पत्र भी देना होगा.

First published: 8 July 2018, 14:58 IST
 
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