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शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती: बुद्ध ने ऐसा कुछ नहीं दिया है भारत को

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 15 December 2015, 8:43 IST
QUICK PILL
  • शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद स्वामी ने साईं के बाद फिर से विवादित बयान देते हुए भारत को बुद्ध की धरती की बजाय श्रीराम और श्रीकृष्ण का देश बताया.
  • मोदी ने ब्रिटेन यात्रा के दौरान भारत में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए भारत को बुद्ध की धरती बताया था.

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है. पहले साईं को खारिज करने के बाद अब उन्होंने गौतम बुद्ध पर निशाना साधा है. स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से भारत को बुद्ध की धरती बताए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बुद्ध ने भारत के लिए ऐसा कुछ नहीं किया है जिससे भारत बुद्ध की भूमि हो गई.

मोदी ने ब्रिटेन यात्रा के दौरान भारत में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए भारत को बुद्ध की धरती बताया था.

असहिष्णुता की बहस से घबराए मोदी

सरस्वती ने कहा कि मोदी भारत को राम और कृष्ण का देश क्यों नहीं कह सकते? मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री असहिष्णुता की बहस से घबरा गए हैं. इसलिए वह भारत को बुद्ध की धरती बना रहे हैं. सरस्वती ने कहा कि 'भारत श्रीराम और श्रीकृष्ण की भूमि' है और इसका प्रमाण वेद और शास्त्रों में मिलता है. उन्होंने कहा कि मेरा मकसद किसी को नीचा नहीं दिखाना है लेकिन जो सच है उसे आगे आना चाहिए. 

सरस्वती ने कहा कि भीमराव आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपना लिया. 

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शंकराचार्य ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण सनातनी हिंदू ही करेंगे. कोई पार्टी या नेता यहां मंदिर नहीं बनाएगा. इसलिए हम सनातन हिंदुओं के साथ मिलकर मंदिर का निर्माण करेंगे. उन्होंने कहा कि हम इस बात का विरोध करते हैं कोई एक ही पार्टी अयोध्या में मंदिर बनाए.

पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान

इससे पहले साईं को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा था कि वह (साईं) हिंदू धर्म का नहीं था. सरस्वती ने कहा था, 'साईं लोगों के मुंह में जबरन मांस ठूसता था.' उन्होंने कहा था कि साईं आम इंसान है जिसे लोग भगवान बना रहे हैं. ऐसे लोगों को हम भगवान नहीं मान सकते.

राम मंदिर की राह में साईं को चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा था कि लोग जगह-जगह साईं के मंदिर बनाने में जुटे हुए हैं. ऐसे चलता रहा तो हर जगह उसी के मंदिर होंगे. फिर हम राम मंदिर कैसे बनाएंगे. 

शंकराचार्य के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है. हालांकि बुद्ध पर दिए गए बयान से उनकी बेचैनी समझी जा सकती है. दरअसल संविधान निर्माता आंबेडकर ने हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था से तंग आकर अपने समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया था. उनके लिए बौद्ध धर्म जाति व्यवस्था से मुक्ति थी. बौद्ध धर्म हिंदू धर्म की कुरीतियों के खिलाफ धर्म बनकर सामने आया और इसने उन लोगों को अपने यहां शरण दी जो हिंदू होने के बावजूद हिंदू धर्म के दायरे से बाहर थे. सीधे शब्दों में कहा जाए तो हिंदुओं की एक बड़ी आबादी सिर्फ कहने भर को हिंदू थी.

बौद्ध धर्म हिंदू धर्म के लिए चुनौती और इसके भीतर जाति व्यवस्था के पीड़ितों के लिए आदर्श विकल्प बन कर सामने आया. शंकराचार्य की बात कितनी तार्किक है इसका अंदाजा नीचे दिए गए कुछ तथ्यों को देखकर लगाया जा सकता है.


  • हिंदू धर्म जहां जाति व्यवस्था की बुनियाद पर खड़ा है वहीं बौद्ध धर्म सभी व्यक्तिों को समान भाव से देखता है. बौद्ध धर्म के दरवाजे शुरुआत से लेकर आज तक सभी के लिए खुले हुए हैं जबकि आज भी हिंदू धर्म में कई जातियों और समुदायों का मंदिरों में घुसने तक की आजादी नहीं है. जातिगत व्यवस्था से ही तंग आकर लाखों लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया.
  • महिलाओं से भेदभाव नहीं होता. बौद्ध धर्म लिंग के आधार पर किसी तरह के भेदभाव को पूरी तरह से खारिज करता है.
  • बौद्ध धर्म कर्मकांडों का विरोध करता है. हिंदू धर्म में आज भी कर्मकांडों का बोलबाला है.
  • बौद्ध धर्म किसी भी तरह की जीव हिंसा का सर्वथा विरोध करता है. जबकि हिंदू धर्म में आज भी कहीं-कहीं देवी-देवताओं को खुश करने के लिए जानवरों की बलि देने की प्रथा है.

First published: 15 December 2015, 8:43 IST
 
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