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वर्चुअल सेमिनार में संविधान में न्यायपालिका की भूमिका पर हुई चर्चा, पूर्व CJI सहित कई दिग्गज रहे मौजूद

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 November 2020, 9:17 IST

भारत में 26 नवंबर को हर साल संविधान दिवस (Constitution Day) के रूप में मनाया जाता है. हर साल इस दिवस के मौके पर संवैधानिक मूल्यों पर शैक्षणिक संस्थानों में खूब चर्चा की जाती है. 26 नवंबर 1949 को भारत द्वारा संविधान को अपनाने के रूप में याद किया जाता है. इस साल भी कई कॉलेज/ यूनिवर्सिटी ऐसे समारोह आयोजित कर रहे हैं, जिनमें संवैधानिक मूल्यों पर चर्चाएं आयोजित की जाती हैं.

इसी कड़ी में ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय की लॉ-फैकल्टी (विधि संकाय) ने 21 नवंबर को एक वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया. सेमिनार में 'संविधानिक मूल्यों को बनाए रखने में न्यायपालिका की भूमिका' (Role of judiciary in upholding constitutionalism) पर कई दिग्गजों में अपनी राय रखी.


इस सेमिनार में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा सहित शारदा विश्विद्यालय के कुलाधिपति पी.के गुप्ता व पूर्व कानून सचिव, भारत सरकार, पी.के मल्होत्रा मौजूद थे.  वर्चुअल सेमिनार में बोलते हुए पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा जी ने कहा ''न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता अंततः न्याय प्रशासन करने के तरीके पर निर्भर करती है, न्यायपालिका अपने निर्णयों के माध्यम से सामाजिक न्याय को बढ़ावा निरंतर देती है व न्यायालय सदैव अपनी भूमिका पूर्ण निष्ठा से निभाता रहेगा.''

संगोष्ठी में मौजूद न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने कहा "हमारे लोकतंत्र का आधार कानून का शासन है और इसका मतलब है कि हमारे पास एक स्वतंत्र न्याय तंत्र है, जो निर्णय दे रहा है, जो की राजनीतिक वेग से विचलित नहीं होता व अडिग रहता हैं''.

भारत में संविधान दिवस 26 नवम्बर को मनाया जाता है क्योंकि भारत गणराज्य का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ था. संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष के रूप में 26 नवम्बर 2015 से संविधान दिवस मनाया गया. संविधान सभा ने भारत के संविधान को 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में 26 नवम्बर 1949 को पूरा कर राष्ट्र को समर्पित किया. गणतंत्र भारत में 26 जनवरी 1950 से संविधान अमल में लाया गया.

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First published: 21 November 2020, 22:02 IST
 
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