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जानिए पहाड़ों की रानी शिमला पर क्यों मंडराया भीषण जलसंकट

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 June 2018, 17:14 IST

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा डिफॉल्टर होटलों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए शिमला नगर निगम की खिंचाई करने के एक दिन बाद शुक्रवार को पहाड़ी शहर में 40 होटल की जल आपूर्ति डिस्कनेक्ट कर गई है. इन होटलों पर आरोप है कि इन्होंने अपने पानी के बकाये का भुगतान नहीं किया लेकिन शिमला भारी जल संकट के बावजूद पानी का इस्तेमाल करना जारी रखा.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों, मंत्रियों, नौकरशाहों और विधायकों सहित वीआईपी को जल आपूर्ति के संबंध में कोई अन्य सुविधा नहीं दी जाएगी. एएनआई से बात करते हुए शिमला के डिप्टी कमिश्नर अमित कश्यप ने कहा, "हमें पानी के अवैध कनेक्शन के संबंध में कुछ शिकायतें मिलीं थी और वह सही पायी गई थी.जिसके बाद इन्हे बंद कर दिया गया और संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है.' 

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने शहर के जल संकट में हस्तक्षेप करने का भी फैसला किया था. अदालत ने निर्माण गतिविधियों को रोक दिया और पानी को बचाने के लिए कुछ क्षेत्रों में कार धोने पर भी प्रतिबंध लगा दिया क्योंकि फेसबुक के जरिये लगातार यह सन्देश दिए जा रहे थे कि पानी के संकट के कारण पर्यटक यहां से दूर रहे.

शिमला की आबादी लगभग 2.2 लाख है, लेकिन गर्मियों के दौरान यहां प्रतिदिन 15,000-20,000 पर्यटक एते हैं. जबकि सप्ताह के अंत में यह 25,000 से 30,000 तक बढ़ जाती है. इसलिए इस मौसम के दौरान पानी की आवश्यकता 4.50 करोड़ लीटर प्रति दिन (एमएलडी) तक बढ़ जाती है.

इस खबर के बाद शिमला में पर्यटन उद्योग पर बड़ा आर पड़ा है क्योंकि पर्यटक पहाड़ी स्टेशन पर अपनी यात्रा रद्द कर रहे हैं. स्थानीय निवासियों ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा व्यक्त किया है, कुछ लोगों द्वारा शिमला से दूर रहने के लिए भी कहा जा रहा था.

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First published: 1 June 2018, 17:09 IST
 
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