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शिवसेना: चाय से ज्यादा केतली गरम...मन की बात!

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 June 2016, 12:07 IST
(पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम के दौरान काला धन वापस लाने की कोशिशों पर राय जाहिर की थी. शिवसेना ने एक बार फिर पीएम मोदी पर निशाना साधा है.

महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शि‍वसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में काले धन को लेकर केंद्र सरकार पर वार किया. शि‍वसेना ने प्रधानमंत्री से उनके चुनावी वादे को लेकर सवाल किया है कि आखि‍र सरकार ने दो साल के कार्यकाल में कितने देशवासियों के बैंक खातों में 15 लाख रुपये जमा करवाए हैं?

कितने खातों में 15 लाख जमा?

संपादकीय में पार्टी ने लिखा है, "राष्ट्र निर्माण के कार्य के लिए चुनाव से पहले कालेधन की वापसी की महत्वपूर्ण घोषणा का क्या हुआ? दो साल में आखिर कितने देशवासियों के बैंक खाते में 15 लाख रुपए जमा हुए?"

प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम पर तंज कसते हुए शिवसेना ने लेख का शीर्षक 'चाय से ज्यादा केतली गरम... मन की बात!' दिया है.

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शिवसेना ने कालेधन के मुद्दे पर लिखा, "देश बदल रहा है, लेकिन हमें मुफ्त चाय नहीं चाहिए? चुनाव से पहले जो वचन दिया था उसके अनुसार हमारे बैंक खाते में 15 लाख रुपये कब जमा करते हो, यह बताओ?

ऐसा कोई सिरफिरा चाय की चुस्की मारते हुए पूछे तो क्या किया जाए? उसे मारें, जलाएं या पकड़ें, ऐसा सवाल कुछ लोगों के मन में उठ सकता है."

'अभी नहीं बदलेगा देश'

सामना में ऐसा सवाल पूछने वालों के लिए जवाब का जिक्र भी है. लेख में लिखा गया है, "बाबा रे, प्रधानमंत्री मोदी 50 साल की गंदगी साफ कर रहे हैं. उनके हाथ में छड़ी जरूर है, लेकिन वह जादू की छड़ी नहीं है.

इसलिए सिर्फ दो साल में सब कुछ बदल जाएगा, ऐसी उम्मीद मत पालो. प्रधानमंत्री को कुछ समय दो."

संपादकीय में शि‍वसेना ने लिखा, "काला धन उद्योगपति, फिल्म वाले और आतंकवादी संगठनों के साथ राजनीति में भी अधिक खनकता है और वहीं पर बूच मारने की अधि‍क जरूरत है.

'घर से निकालें काला धन'

काला धन ढूंढ़ने के लिए स्विट्जरलैंड या मॉरिशस जाने की जरूरत नहीं. काला धन हमारे घर में है, उसे खोदकर निकालें, तो भी मोदी का मिशन सफल हो जाएगा."

लेख में आगे लिखा गया है कि पीएम मोदी के 'मन की बात' कड़क चाय की तरह है, लेकिन मुंबई में काले धन पर लोग 'मन की बात' सुनें, इसलिए कई स्थानों पर मुफ्त में 'चाय-पानी' की व्यवस्था की गई.

संपादकीय में काला धन वापस लाने की पीएम मोदी की कोशिशों पर तंज कसते हुए लिखा गया है, "अगर कोई सिरफिरा सत्य बोलता है इसलिए उसे मारें, जलाएं यह बोलना हमारी संस्कृति में फिट नहीं बैठता.

शिवसेना ने आगे लिखा है, "हम यह विनम्रता से कह रहे हैं! चाय की तुलना में केतली गरम... इसे ही कहते हैं!'"

First published: 28 June 2016, 12:07 IST
 
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