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'रामगोपाल को सपा से बाहर करो', शिवपाल के घर के बाहर नारेबाजी

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 September 2016, 10:22 IST
(फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी का पारिवारिक घमासान अपने चरम पर है. बृहस्पतिवार को कैबिनेट मंत्री और सपा प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद शिवपाल यादव ने लखनऊ में अपने समर्थकों को संबोधित किया. 

शिवपाल ने अपने आवास के बाहर समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "हम सभी लोग नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के साथ हैं. उनका संदेश हमारे लिए आदेश है."

समर्थकों से मुलाकात के बाद शिवपाल यादव ने सपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे यह सुनिश्चित करें कि समाजवादी पार्टी किसी भी हालत में कमजोर न होने पाए. 

शिवपाल यादव ने कहा, "हमें पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करना होगा. मैं आप सभी लोगों से अपील करता हूं कि समाजवादी पार्टी के दफ्तर पर पहुंचें, जहां नेताजी पहुंच रहे हैं."

'रामगोपाल को बाहर करो' के नारे

शिवपाल ने बृहस्पतिवार को प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री पद से इस्तीफा देते हुए यादव परिवार में दरार और चौड़ी होने के संकेत दिए थे. हालांकि अभी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल का इस्तीफा मंजूर नहीं किया है.

इस बीच शिवपाल के समर्थकों ने लखनऊ में उनके आवास के बाहर सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव के खिलाफ नारेबाजी की. इस दौरान 'राम गोपाल को बाहर करो' के नारे भी लगाए गए.

कैसे बिगड़ी बात?

पार्टी अध्यक्ष और अखिलेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के साथ ही शिवपाल ने सरकारी गाड़ी भी छोड़ दी है. बताया जा रहा है कि वो अपना बंगला भी जल्द खाली कर सकते हैं. इस बीच बृहस्पतिवार को शिवपाल से तकरीबन 20 विधायकों ने मुलाकात की. 

सपा सूत्रों के मुताबिक शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह से कहा कि जिस तरह से उनसे मंत्रालय छीना गया है उससे उनका काफी अपमान हुआ है और उन्हें अखिलेश से बात करके इस फैसले को पलटवाना चाहिए.

शिवपाल यादव साथ ही मुलायम सिंह से आश्वासन चाहते थे कि उन्हें बतौर प्रदेश अध्यक्ष अपने हिसाब से काम करने की छूट हो और अखिलेश यादव टिकट बंटवारे के अलावा बाकी कामकाज में दखल न दें.

सूत्रों के मुताबिक मुलायम से बातचीत में अखिलेश ने भी साफ शब्दों में कह दिया था कि वह अपना फैसला किसी भी हालत में बदलेंगे नहीं. मुलायम ने शिवपाल से महज इतना कहा कि वह मामले को ठीक कर देंगे और वे मंत्री तथा अध्यक्ष के तौर पर काम करते रहें.

सपा सुप्रीमो ने शिवपाल को अखिलेश से मिलने की सलाह दी. सूत्रों के मुताबिक यहां बात बनने के बजाय और बिगड़ गई. अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल से कहा कि वो अमर सिंह का साथ दे रहे हैं, जो हटाए गए मुख्य सचिव दीपक सिंघल के साथ मिलकर उनकी सरकार के खिलाफ साजिश कर रहे थे.

आरोपों पर शिवपाल यादव ने अखिलेश से कहा कि अगर उनके पास कोई ठोस सबूत है तो बताएं. शिवपाल यादव ने यह भी कहा कि कोई कुछ भी कहता हो, लेकिन फैसले मुख्यमंत्री को लेने होते हैं.

हालांकि इस दौरान शिवपाल ने अमर सिंह का बचाव किया. सूत्रों के मुताबिक शिवपाल ने अखिलेश से कहा कि अमर सिंह को पार्टी में लाकर सांसद किसी और ने नहीं, बल्कि खुद नेताजी ने बनाया है.

इस दौरान बात इतनी बिगड़ गई कि महज 20 मिनट की मुलाकात के बाद शिवपाल यादव बाहर आ गए और रात में ही अध्यक्ष के साथ ही मंत्री पद से इस्तीफा देने का एलान कर डाला.

शिवपाल यादव ने कौमी एकता दल के विलय को मंजूर कर दिया था यही चाचा-भतीजे के विवाद की पहली वजह बना.

खानदान में घमासान की शुरुआत

चाचा और भतीजे के बीच विवाद की शुरुआत जून महीने में हुई. 21 जून को लखनऊ में शिवपाल यादव की मौजूदगी में कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया, हालांकि सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्तार अंसारी की पार्टी सपा में नहीं शामिल होगी.

इसी के ठीक बाद सीएम अखिलेश यादव ने विलय के लिए मध्यस्थता निभाने वाले कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया. बलराम यादव को मुलायम सिंह का करीबी माना जाता है. कौमी एकता दल के विलय में सक्रिय भूमिका निभाने के चलते बलराम यादव पर कार्रवाई हुई.

इस मामले से शिवपाल और अखिलेश के बीच संबंधों में खटास पर मुहर लग गई. विलय का यह विवाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के पास पहुंचा. जिसके बाद बीच का रास्ता निकालते हुए बलराम यादव की दोबारा कैबिनेट में वापसी हुई, हालांकि कौमी एकता दल के विलय की संभावना खत्म हो गई.

अखिलेश यादव ने कहा था कि मुख्तार अंसारी को किसी सूरत में समाजवादी पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा. (फेसबुक)

दो मंत्रियों और मुख्य सचिव पर गाज

शिवपाल और अखिलेश का विवाद यहीं तक नहीं थमा. 12 सितंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अचानक दो कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया. इसमें से एक खनन मंत्री गायत्री प्रजापति थे, जबकि दूसरे पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह.

गायत्री प्रजापति को मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता है, जबकि राजकिशोर सिंह शिवपाल गुट के बताए जाते हैं. गायत्री प्रजापति अवैध खनन को लेकर कठघरे में हैं, वहीं राजकिशोर सिंह पर जमीन हड़पने से लेकर खनन में भ्रष्टाचार के आरोप हैं.

अभी यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि इसके ठीक अगले दिन सीएम अखिलेश ने शिवपाल के करीबी माने जाने वाले मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटा दिया. गैरतलब है कि महीने भर पहले जब शिवपाल यादव ने सरकार से इस्तीफे की धमकी दी थी, तब इसकी कुछ वजहों में एक वजह दीपक सिंघल भी थे.

जिस समय अखिलेश ने यह सारे फैसले किए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव लखनऊ में थे. दीपक सिंघल की नियुक्ति के पीछे अमर सिंह और शिवपाल यादव की लॉबिंग प्रमुख वजह बताई जा रही थी.

सूत्रों के मुताबिक दीपक सिंघल ने गायत्री प्रजापति को हटवाने में भूमिका निभाई. गायत्री प्रजापति ने सपा सुप्रीमो से जब यह बात कही तो उन्होंने दीपक सिंघल को हटाने को कहा. इसके बाद सिंघल भी हटा दिए गए.

सूत्रों के मुताबिक बाद में जब मुलायम ने गायत्री प्रजापति को बहाल करने को कहा, तो अखिलेश ने फैसला पलटने से इनकार कर दिया. सपा सूत्रों के मुताबिक अमर सिंह ने मुलायम को सलाह दी कि अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर वो संदेश दें कि अगर वो मनमर्जी कर सकते हैं तो बतौर सपा सुप्रीमो वे भी स्वतंत्र हैं.

मुलायम ने इसके बाद अखिलेश को हटाकर शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया, लेकिन यह दांव भी उल्टा पड़ गया. इसके ठीक बाद अखिलेश ने शिवपाल यादव से लोकनिर्माण, सिंचाई और राजस्व जैसे अहम विभाग छीन लिए.

दिल्ली में मुलायम से मुलाकात के बाद तो शिवपाल ने संकेत दिए कि सब कुछ ठीक है, लेकिन जब लखनऊ में अखिलेश से उनकी मुलाकात के बाद यह तय हो गया कि छीने गए विभाग उन्हें वापस नहीं मिलने वाले, तो शिवपाल ने बड़ा कदम उठाते हुए पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया.

बर्खास्त मंत्री राजकिशोर सिंह और गायत्री प्रजापति को शिवपाल और मुलायम का करीबी माना जाता है. (फाइल फोटो)
First published: 16 September 2016, 10:22 IST
 
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