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अखिलेश समर्थकों पर शिवपाल की सामूहिक गाज, तीन एमएलसी और यूथ विंग के चारों अध्यक्ष निकाले गए

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:48 IST

समाजवादी परिवार में मचा घमासान एक बार फिर सतह पर आ गया है. सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थकों पर सामूहिक गाज गिराई है.

शिवपाल यादव ने सात अखिलेश समर्थकों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है. इनमें समाजवादी पार्टी की चारों यूथ विंग (युवा इकाई) के चीफ शामिल हैं.

कैच को शिवपाल यादव की ओर से जारी समाजवादी पार्टी का पत्र मिला है, जिसमें लिखा है, "निम्नलिखित पदाधिकारियों को माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करने, पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने एवं अनुशासनहीन आचरण के कारण समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है."

यूपी अध्यक्ष शिवपाल यादव का यह खत हम नीचे हूबहू प्रकाशित कर रहे हैं.

तीन एमएलसी भी पार्टी से बाहर

अखिलेश समर्थक जिन सपा नेताओं को पार्टी से निकाला गया है. उनके नाम हैं- सुनील सिंह यादव (सदस्य विधान परिषद), आनंद भदौरिया (सदस्य, विधान परिषद), संजय लाठर (सदस्य, विधान परिषद), मोहम्मद एबाद (प्रदेश अध्यक्ष, मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड), बृजेश यादव (प्रदेश अध्यक्ष, समाजवादी युवजन सभा), गौरव दुबे (राष्ट्रीय अध्यक्ष, मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड) और दिग्विजय सिंह देव (प्रदेश अध्यक्ष, समाजवादी छात्रसभा).  

इस तरह जिन अखिलेश समर्थकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है, उनमें सपा के तीन विधान परिषद सदस्य हैं. इसके अलावा समाजवादी पार्टी की युवा इकाई के चार अध्यक्ष भी शामिल हैं.

गौरतलब है कि शनिवार को अखिलेश यादव के समर्थन में सपा की यूथ विंग के नेताओं ने विक्रमादित्य मार्ग स्थित पार्टी मुख्यालय और मुलायम सिंह यादव के आवास पर भी नारेबाजी की थी. बाद में अखिलेश के समझाने पर समर्थक वहां से हटे थे. इस दौरान एकबारगी शिवपाल और अखिलेश के समर्थक आमने-सामने भी हो गए थे.

सुनील साजन और आनंद भदौरिया के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

क्यों हुई कार्रवाई?

प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी की तरफ से जो पत्र जारी किया है, उसमें सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के खिलाफ टिप्पणी और पार्टी विरोधी गतिविधियों के साथ अनुशासनहीनता को वजह बताया गया है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बताई जा रही है.

विधान परिषद सदस्य सुनील साजन और आनंद भदौरिया को नवंबर 2015 में पंचायत चुनाव के दौरान भी पार्टी से निकाल दिया गया था, उस वक्त भी उन पर पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगा था. हालांकि तब हुई कार्रवाई के बाद सीएम अखिलेश यादव ने सख्त रुख अपनाया था.

इन नेताओं की पार्टी में वापसी के लिए अखिलेश अड़ गए थे. यही नहीं नाराजगी इस कदर बढ़ गई थी कि अखिलेश यादव ने दिसंबर में हुए सैफई महोत्सव का भी बायकॉट कर दिया. जब सुनील साजन और आनंद भदौरिया की पार्टी में वापसी हुई, इसी के बाद ही अखिलेश ने सैफई महोत्सव में हिस्सा लिया था.

शनिवार को लखनऊ में मुलायम सिंह यादव के आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन में चारों युवा संगठनों के अध्यक्ष शामिल थे. बताया जा रहा है कि इस दौरान मुलायम के खिलाफ भी नारेबाजी की गई थी, जिस बारे में कैच ने अपनी पुरानी रिपोर्ट में जानकारी दी थी.

विरोध प्रदर्शन के बाद चारों युवा संगठनों के अध्यक्ष ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह से मुलाकात की थी. इसके बाद यूथ विंग के अध्यक्षों ने साफ कहा था कि वे शिवपाल यादव की अध्यक्षता में काम नहीं करेंगे. माना जा रहा है कि शिवपाल यादव की कार्रवाई इसी का नतीजा है. वहीं तीनों विधान परिषद सदस्य भी सीएम अखिलेश यादव के काफी करीबी हैं.

शनिवार को अखिलेश समर्थक यूथ विंग के नेताओं ने सपा सुप्रीमो के आवास पर प्रदर्शन किया था. (एएनआई)

रामगोपाल के भांजे को निकाला

इससे पहले शिवपाल यादव ने रविवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के भांजे अरविंद यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था.

सपा परिवार में चल रही कलह में मुलायम सिंह यादव के सीधे दखल के बाद ऐसा माना जा रहा था कि शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच चल रहा खुला युद्ध थम गया है, लेकिन शनिवार शाम अचानक पार्टी के दो पदाधिकारियों को निकाले जाने से यह तय हो गया कि यह लड़ाई किसी के भी रोकने से रुकने वाली नहीं है.

रविवार को अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने महासचिव राम गोपाल यादव को निशाने पर लेते हुए उनके भांजे और विधान परिषद सदस्य अरविंद प्रताप सिंह यादव और सैफई ब्लॉक के पूर्व प्रधान को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

पार्टी की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने मैनपुरी के विधान परिषद सदस्य अरविन्द प्रताप यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ असम्मानजनक टिप्पणियां करने, पार्टी विरोधी कार्यों में लिप्त रहने और अनुशासनहीनता दिखाने के लिए पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया गया है.

इटावा जिले के सैफई ब्लॉक के ग्राम नगला बिहारी के पूर्व ग्राम प्रधान अखिलेश कुमार यादव को पार्टी विरोधी कार्यों और अनुशासनहीन आचरण के चलते पार्टी से निकाला गया है.

राजेंद्र चौधरी और गोप पर भी गाज

बीते हफ्ते चले घमासान का असर सपा मुख्यालय और मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर अब भी दिख रहा है. एक तरफ जहां सपा प्रदेश अध्यक्ष ने सपा मुखिया के आवास, पार्टी मुख्यालय, 5 कालिदास मार्ग और अपने आवास पर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के वीडियो फुटेज मंगाए हैं, वहीं दूसरी तरफ बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री भी इन प्रदर्शनकारियों के फुटेज मंगाकर परीक्षण कराने जा रहे हैं.

सपा परिवार में चले इस घमासान में आजम खान, राजेन्द्र चौधरी, अरविंद सिंह गोप, नारद राय और पूर्व मंत्री अम्बिका चौधरी समेत कुछ मंत्री व पदाधिकारी खुलकर दिखाई दिए.

इस पारिवारिक लड़ाई में जिन दो मंत्रियों की सक्रियता ज्यादा दिखाई दी, उनमें प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी और महासचिव अरविन्द सिंह गोप को शिवपाल यादव ने शनिवार शाम को ही पार्टी के प्रमुख पदों से हटा दिया था.

राजेंद्र चौधरी को हटाकर उनकी जगह अंबिका चौधरी को पार्टी का नया प्रवक्ता बनाया गया है. इसके अलावा कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप की जगह पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश सिंह को पार्टी का नया महासचिव बनाया गया है.

इस बीच लखनऊ यूनिवर्सिटी के दस से ज्यादा छात्रों ने समाजवादी छात्रसभा और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. समाजवादी छात्रसभा के सचिव अनिल यादव ने बताया कि इस्तीफा देने वाले छात्र अखिलेश यादव के समर्थन में हैं, लेकिन छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष को बर्खास्त करने का वह विरोध करते हैं.

अनिल यादव ने कहा, "नेताजी मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव को इस बारे में सोचना चाहिए. बिना किसी वजह के छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव को बर्खास्त करना गलत है."

First published: 19 September 2016, 12:55 IST
 
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