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समान नागरिक संहिता पर शिवसेना मोदी सरकार के साथ

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 July 2016, 10:20 IST
(फाइल फोटो)

समान नागरिक संहिता पर हाल ही में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने लॉ कमीशन को खत लिखकर रिपोर्ट मांगी है. इस मुद्दे पर सरकार को शिवसेना का साथ मिला है. 

लंबे अरसे से शिवसेना और बीजेपी के बीच सहयोगी होने के बावजूद संबंधों में खटास का दौर चल रहा है. बीजेपी और सरकार की आलोचना करने वाले एनडीए के सहयोगी दल शिवसेना ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अपना मजबूत समर्थन दिया है.

पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखे संपादकीय में इस मुद्दे पर शिवसेना ने मोदी सरकार से कहा है कि विरोधियों की परवाह किए बिना इस कानून को लागू करने की फाइल आगे बढ़ाएं. 

'विरोधियों की परवाह न करें'

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय के जरिए साफ संदेश दिया है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सरकार को आगे बढ़ना चाहिए. इस राष्ट्रीय महत्व के काम को सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए. 

पढ़ें: समान नागरिक संहिता पर कानून मंत्रालय ने लॉ कमीशन को लिखा खत

सामना में 'समान नागरिक कानून बनेगा क्या' शीर्षक से लिखे संपादकीय में कहा गया है कि आज मोदी सरकार के पास संपूर्ण बहुमत है. इस बहुमत का सम्मान हो इतनी ही हमारी उम्मीद होगी, तो किसी के पेट में दर्द नहीं होना चाहिए. 

'एक देश एक कानून बड़ी जरूरत'

साथ ही संपादकीय में लिखा गया है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) लागू होने के बाद देश में मजहब पर हो रही राजनीति पर ताला लग जाएगा.

शिवसेना ने हिंदू और मुस्लिम समाज के बारे में जिक्र करते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड को वक्त की बहुत बड़ी जरूरत बताया है. संपादकीय में लिखा गया है कि बीजेपी के लिए यह सबसे अहम सिद्धांतों में एक है.

साथ ही शिवसेना ने कहा कि उसका साफ मानना है कि कानून बनना चाहिए. एक ही देश के नागरिकों पर अलग-अलग कानून लागू नहीं होना चाहिए.

पढ़ें: क्या 2017 चुनावों के मद्देनजर समान नागरिक संहिता भाजपा का एक और जुमला है?

कानून मंत्रालय ने हाल ही में लॉ कमीशन (विधि आयोग) को खत लिखकर पूछा है कि समान नागरिक संहिता को अमल में कैसे लाया जा सकता है? किसी भी सरकार ने 68 साल में पहली बार यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर लॉ कमीशन से रिपोर्ट मांगी है.

First published: 4 July 2016, 10:20 IST
 
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