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शोपियां फायरिंग केस: महबूबा सरकार का यू-टर्न, SC ने मेजर आदित्य के खिलाफ जांच पर लगाई रोक

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 March 2018, 15:19 IST

शोपियां फायरिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ जांच पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने 24 अप्रैल तक मेजर के खिलाफ जांच पर रोक लगाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य कुमार के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया. जम्मू कश्मीर सरकार ने अदालत में जांच की रिपोर्ट पेश की जिसमें उसने कहा है कि प्राथमिकी में मेजर आदित्य के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है.

इसके बाद न्यायालय ने जम्मू कश्मीर सरकार को शोपिया फाइरिंग मामले की अगली सुनवाई (24 अप्रैल) तक जांच से खुद को अलग रखने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट 24 अप्रैल को मामले की अंतिम सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस ने कहा कि ये मामला सेना के अधिकारी का है, किसी सामान्य अपराधी का नहीं. जम्मू कश्मीर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा - मेजर आदित्य का नाम FIR में बतौर आरोपी नाम नहीं है. सिर्फ ये लिखा गया है कि वो बटालियन को लीड कर कर रहे थे.

इससे पहले 12 फरवरी को भी सर्वोच्च न्यायालय ने मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को एक पिता और सेना की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. सेना पर एफआइआर के मामले में शीर्ष न्यायालय ने केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस भी जारी करते हुए दो दिन में जवाब देने को कहा था.

मेजर के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि एफआईआर से राज्य में अपनी सेवाएं दे रहे जवानों के मनोबल को धक्का लगेगा. उन्होंने कहा, “जिस तरह से, राज्य के राजनीतिक नेतृत्व और उच्च प्रशासन ने एफआईआर को चित्रित और पेश किया, वह अत्यधिक शत्रुतापूर्ण माहौल को दिखाता है.”

उन्होंने अपनी याचिका में कहा, “इस परिस्थिति में, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अंतर्गत, याचिकाकर्ता के पास अपने बेटे और खुद के मूलभूत अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत अदालत का रुख करने के अलावा और कोई उपाय नहीं बचा.”

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इससे पहले 12 फरवरी को भी सर्वोच्च न्यायालय ने मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को एक पिता और सेना की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. सेना पर एफआइआर के मामले में शीर्ष न्यायालय ने केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस भी जारी करते हुए दो दिन में जवाब देने को कहा था.

मेजर के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि एफआईआर से राज्य में अपनी सेवाएं दे रहे जवानों के मनोबल को धक्का लगेगा. उन्होंने कहा, “जिस तरह से, राज्य के राजनीतिक नेतृत्व और उच्च प्रशासन ने एफआईआर को चित्रित और पेश किया, वह अत्यधिक शत्रुतापूर्ण माहौल को दिखाता है.”

उन्होंने अपनी याचिका में कहा, “इस परिस्थिति में, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अंतर्गत, याचिकाकर्ता के पास अपने बेटे और खुद के मूलभूत अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत अदालत का रुख करने के अलावा और कोई उपाय नहीं बचा.”

क्‍या था पूरा मामला
जम्मू-कश्मीर के शोपियां में 27 जनवरी को पथराव कर रही भीड़ पर फायरिंग की घटना में दो नागरिक मारे गए थे और एक अन्य घायल हो गया था. घायल नागरिक की भी बाद में मौत हो गई थी.

सेना ने कहा था कि जवानों ने गांव में प्रशासनिक दस्ते पर हमले के बाद आत्मरक्षा में गाली चलाई थी. जिसके बाद जम्मू- कश्मीर पुलिस ने मेजर रैंक के अधिकारी आदित्य कुमार के खिलाफ सिविलियन की हत्या का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज की थी.

इस घटना के बाद मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हत्‍या की जांच के आदेश भी दिए थे. इससे पहले फरवरी में भी सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्‍य के खिलाफ जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी.

First published: 5 March 2018, 15:19 IST
 
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