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पश्चिम बंगालः 40 बीमारू पीएसयू होंगे बंद

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 16 October 2016, 4:27 IST
(सजाद मलिर/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • बंगाल सरकार ने उन सभी बीमारू पीएसयू को बंद करने का फ़ैसा लिया है जिन्हें फिर से खड़ा नहीं किया जा सकता. ऐसे बीमारू पीएसयू की संख्या 40 बताई गई है. 

पश्चिम बंगाल की सरकार तीन पीएसयू पहले ही बंद कर चुकी थी. अब ऐसी 40 पीएसयू की दोबारा पहचान की गई है जिन्हें खड़ा नहीं किया जा सकता. साथ ही, सरकार ने वेस्ट दीनाजपुर स्पिनिंग मिल, शिल्पब्रत प्रेस और वेस्ट बंगाल टी डवलपमेंट कार्पोरेशन समेत 16 पीएसयू के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) योजना भी शुरू करने का फैसला किया है. तीन बंद होनी वाली पीएसयू में हरे स्ट्रीट, कोलकाता के नियो पाइप्स एण्ड ट्यूब्स, बेलूर, हावड़ा की नेशनल आयरन एण्ड स्टील कम्पनी और उल्टाडांगा, कोलकाता की लिली प्रोडक्ट्स शामिल हैं. 

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इन बीमार पीएसयू बंद करने के बाद उनकी जमीन सरकारी भूमि बैंक में शामिल कर ली जाएगी. इन कर्मचारियों को वीआरएस देने के लिए राज्य सरकार एशियाई विकास बैंक (एडीबी) में 350 करोड़ रूपए के लोन के लिए आवेदन कर चुकी है. अन्य कर्मचारियों को मुनाफ़े में चल रहे तंतुजा जैसे राज्य उपक्रमों में ले लिया जाएगा. 

बंद दुकानें

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 16 पीएसयू के करीब 16 हजार कर्मचारियों को राज्य सरकार के स्वामित्व वाले अन्य पीएसयू में नौकरी दे दी जाएगी और बाकी करीब 45 हजार कर्मचारियों को वीआरएस योजना में शामिल किया जाएगा. एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बीमारू पीएसयू को बंद करने का फैसला, कुछ महीने पहले राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया था.  यह फैसला इस आधार पर लिया गया है कि घाटे में चल रही कंपनियों के कर्मचारियों के वेतन पर राज्य सरकार हर साल करीब 500 करोड़ रुपए खर्च कर रही है.

बंद करने की सिफ़ारिश हुई थी

सूत्रों के अनुसार नियो पाइप्स एण्ड ट्यूब्स, नेशनल आयरन एण्ड स्टील कम्पनी और लिली प्रोडक्टस् में कुल मिलाकर 375 से ज्यादा कर्मचारी हैं और उनके वेतन पर हर साल करीब 200 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं. साल 2013 में सार्वजनिक उपक्रम विभाग ने राज्य मंत्रिमंडल को एक रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि राज्य के ऐसे बीमारू पीएसयू को बंद करने की जरूरत है जिन्हें वापस शुरू कर सकने की कोई गुंजाइश नहीं है. मगर ममता बनर्जी ने मंत्रियों व अधिकारियों को इन्हें वापस शुरू कर सकने के रास्ते तलाश करने के निर्देश दिए थे.

हालांकि जब मालुम हुआ कि इन बीमार पीएसयू को दोबारा ज़िंदा कर सकने की सम्भावना बहुत ही कम है, तब 2016 में राज्य सरकार ने इन सभी को बंद करने का फैसला किया. 

मंत्रालय से लोन की स्वीकृति का इंतजार

अधिकारियों का कहना है कि वे वीआरएस के लिए एडीबी से लोन लेने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग से स्वीकृति मिलने का इंतजार कर रहे हैं. सरकार ने लोन लेने के लिए एशियाई विकास बैंक को इसलिए चुना क्योंकि यह कम ब्याज पर 15-20 साल से ज्यादा लंबी अवधि के लिए लोन देता है. 

साल 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने राज्य सरकार के ऐसे ही बीमारू पीएसयू के कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने के लिए ब्रिटेन के अंतर्राष्ट्रीय विकास विभाग ( डीएफआईडी) से 150 करोड़ का कर्ज़ लिया था. डीएफआईडी की ही 200 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता से वर्ष 2006 से 2008 के बीच 34 पीएसयू को फिर से खड़ा किया गया था.

विपक्ष का रवैया

भाजपा नेताओं ने इस पहल का स्वागत किया और कहा है कि इन कर्मचारियों को सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य उपक्रमों में काम मिलना चाहिए. वहीं कांग्रेस व माकपा दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि इस मामले में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. देखते हैं सभी कर्मचारियों को उनका हक मिलता है या नहीं?

First published: 16 October 2016, 4:27 IST
 
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