Home » इंडिया » Sibal says- till CJI Deepak Mishra does not retire, I will not go to court
 

सिब्बल बोले- जब तक CJI दीपक मिश्रा रिटायर नहीं होते उनकी अदालत में नहीं जाऊंगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 April 2018, 11:45 IST

वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का कहना है कि वह भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा की अदालत में नहीं जायेंगे. सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अदालत में कई महत्वपूर्ण मामलों में वकील के तौर पर हैं. रविवार को एक इंटरव्यू में सिब्बल ने कहा "मैं कल से मुख्य न्यायाधीश की अदालत में नहीं दिखाई दूंगा ... जब तक वह सेवानिवृत्त न हो जाए''.

सिब्बल ने स्पष्ट किया कि "यदि सीजेआई तब तक जारी रहता है जब तक कि वह सेवानिवृत्त न हो जाए. सिब्बल ने कहा कि वह पेशेगत मानकों को बनाए रखने में विश्वास करते हैं. 

जब सिब्बल ने यह पूछा गया कि उनके सहयोगी और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कुछ अन्य पार्टी नेताओं ने राज्यसभा अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू को दिए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किया है, तो इसके जवाब में सिब्बल ने कहा, "हमने तो चिदंबरम से हस्ताक्षर करने को नहीं कहा, क्योंकि उनके कुछ मामले लंबित हैं और मैं उनका वकील हूँ. ये उनके लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि अब मैं चीफ़ जस्टिस की कोर्ट में नहीं जा रहा हूँ."

चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ मुकदमे के अलावा सिब्बल सीजेआई की अदालत में जिन अन्य मामलों में बहस कर रहे हैं उनमे अयोध्या मामला और जय शाह द्वारा समाचार पोर्टल wire.in के खिलाफ मानहानि का मामला शामिल है.

सिब्बल का यह भी कहना है कि महाभियोग इ प्रस्ताव पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से हस्ताक्षर न करने का फैसला इसलिए किया गया क्योंकि वह पूर्व पीएम हैं और हम उन्हें विवाद में नहीं घसीटना चाहते हैं.

ये भी पढ़ें : CJI के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज, उपराष्ट्रपति ने संविधान विशेषज्ञों से सलाह के बाद लिया फैसला

हालांकि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्षी पार्टियों द्वारा लाए जा रहे महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.उपराष्ट्रपति ने संविधान विशेषज्ञों से विचार विमर्श के बाद कांग्रेस समेत सात विपक्षी दलों के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. 

इससे पहले सभापति वेंकैया नायडू ने महाभियोग नोटिस पर बातचीत की प्रक्रिया शुरू की थी. इस पर रविवार को उन्होंने अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल सहित संविधानविदों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया था. नायडू ने याचिका को स्वीकारने अथवा ठुकराने को लेकर संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, पूर्व विधि सचिव पी.के. मल्होत्रा सहित अन्य विशेषज्ञों से कानूनी राय ली था. 

First published: 23 April 2018, 11:37 IST
 
अगली कहानी