Home » इंडिया » Siddaramaiah in a soup: controversy after doctor son's firm gets govt contract
 

सिद्धारमैया का संकट: बेटे को ठेका देकर फंसे !

रामकृष्ण उपध्या | Updated on: 15 April 2016, 22:27 IST
QUICK PILL
  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने बेटे की कंपनी को मिले सरकारी ठेके की वजह से विवादों के घेरे में हैं. यतींद्र सिद्धारमैया की मैट्रिक्स इमेजिंग सॉल्यूशंस को बेंगलुरू के सरकारी अस्पताल में जांच लैब बनाने का मिला ठेका फिलहाल विवादों में है.
  • विपक्षी दल इस पूरे मामले को लेकर सिद्धारमैया पर सवाल खड़े कर रहे हैं. उनकी मांग इस ठेके को रद्द करने की है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पहले से ही 52 लाख की घड़ी पहनने और भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली संस्था लोकायुक्त को कमजोर करने के कारण आलोचकों के निशाने पर रहे हैं. 

अब वह एक नई मुसीबत में घिरते दिख रहे हैं. मामला उनके बेटे से जुड़ा है जो चिकित्सक हैं. पैथोलॉजिस्ट यतींद्र सिद्धारमैया बेहद ही अंतर्मुखी स्वभाव के हैं और वह शायद ही कभी मीडिया में दिखाई देते हैं. वहीं उनके पिता सिद्धारमैया पिछले तीन दशक से राजनीति में हैं और पिछले तीन सालों से कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं. 

यतींद्र अपने आप को मीडिया से बेहद दूर रखते हैं. यही वजह है कि सार्वजनिक दायरे में उनके पिता के साथ उनकी एक भी तस्वीर मौजूद नहीं है. हालांकि इन सबके बावजूद वह विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं. नैतिकता और मुख्यमंत्री के आचरण को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं.

कैसे मिला कंपनी को ठेका

विपक्ष ने मैट्रिक्स इमेजिंग सॉल्यूशंस को लेकर सवाल उठाए हैं. यह एक निजी कंपनी है और यतींद्र इसके डायरेक्टर हैं. कंपनी को बेंगलुरू के सरकारी अस्पताल में जांच लैब बनाने का ठेका दिया गया है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने बेटे की कंपनी को मिले सरकारी ठेके की वजह से विवादों के घेरे में हैं

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के विशेष अधिकारी पी गिरीश के मुताबिक विक्टोरिया हॉस्पिटल कॉम्प्लेक्स में 2012 में सुपर स्पेश्यलिटी हॉस्पिटल बनाए जाने का ठेका मैट्रिक्स को मिला था. यह सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ.

गिरीश ने कहा कि सीमेंस, 'फिलिप्स, मेडल, क्लूमैक्स, एचएलएल और मैट्रिक्स सॉल्यूशंस ने इस कॉन्टै्रक्ट के लिए बोली लगाई थी लेकिन आखिरी चरण में दो ही कंपनियां पहुंची. इसके बाद सबसे कम बोली लगाकर मैट्रिक्स यह ठेका लेने में सफल रही. कंपनी ने अन्य सरकारी अस्पतालों के मुकाबले 20 फीसदी कम रकम पर बोली लगाई थी.'

गिरीश बताते हैं कि ठेका सीएम राजेश गौड़ा के नाम पर दिया गया जो कंपनी में पार्टनर हैं. उन्होंने कहा कि हमें वाकई में नहीं पता था कि सीएम के बेटे भी कंपनी में डायरेक्टर हैं.

पांच सालों का यह कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर में दिया गया. करीब 10 करोड़ रुपये का निवेश करने के बाद कंपनी इस महीने के आखिर में अपनी सेवाएं शुरू करने वाली थी कि यह विवाद सामने आ गया.

नैतिकता का मामला

मुख्यमंत्री के बेटे को सरकारी ठेका मिलने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. सवाल यह भी है कि क्या इस दौरान भ्रष्टाचार हुआ.

गृह मंत्रालय की तरफ से जारी दिशानिर्देशों की सूची में साफ कहा गया है, 'पदभार संभालने के बाद कोई भी मंत्री (मुख्यमंत्री भी शामिल) सरकार की तरफ से मिलने वाले ठेकों में अपने परिवार के सदस्यों को शामिल होनेे से रोकेगा.'

विपक्ष इसी की आड़ लेते हुए कॉन्ट्रैक्ट को रद्द किए जाने की मांग कर रहा है जबकि सिद्धारमैया के समर्थक उस फुटनोट का जिक्र कर रहे हैं जिसमें मंत्री के परिवार की तरफ से किए जाने वाले नियमों के उल्लंघन का जिक्र किया गया है.

फुटनोट के मुताबिक, 'मंत्री के परिवार (पत्नी या पति समेत) का मतलब उनके बच्चे और खून के रिश्ते वाले संबंधी होंगे. या फिर वह जो पूरी तरह से मंत्री पर निर्भर हैं.'

बचाव में सिद्धारमैया

सिद्धारमैया ने कहा कि कुछ दिनों पहले तक उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके बेटे की कंपनी को ठेका मिला है. उन्होंने कहा कि अगर मिला भी है तो यह नियमों के तहत हुआ है और इसमें कोई गलती नहीं है.

यतींद्र राव ने भी कहा कि उनकी तरफ से कोई गलती नहीं की गई है और ऐसे कई मामले आए हैं जब सुप्रीम कोर्ट ने भी जन प्रतिनिधियों के संबंधियों की ठेकों में भूमिको उचित ठहराया है. यतींद्र ने कहा कि अगर उनके पिता सलाह देते हैं तो वह कंपनी से अलग हो जाएंगे.

वैकल्पिक थ्योरी

कुछ लोगों का दावा है कि यह पूरा विवाद डॉक्टरों का खड़ा किया हुआ है जिनका संबंध कई जांच केंद्रों से है. वह इन सेंटर्स के साथ लंबे समय से काम करते रहे हैं और अब उनहें लगता है कि अगर हॉस्पिटल कैंपस में बड़ी कंपनी काम करने लगेगी तो उनका पूरा खेल खराब हो जाएगा.

सिद्धारमैया के हालांकि यह मामूली झटका ही होगा. सिद्धारमैया फिलहाल कर्नाटक हाई कोर्ट में लोकायुक्त की शक्तियों को कम किए जाने के बड़े मामले में उलझे हुए हैं.

First published: 15 April 2016, 22:27 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी