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'सिद्धार्थ का कार्यक्रम रद्द और शांतनु महाराज का प्रवचन': ऋचा सिंह

पाणिनि आनंद | Updated on: 25 January 2016, 16:39 IST

इलाहाबाद युनिवर्सिटी का छात्रसंघ इन दिनों दक्षिण और वाम धड़े के बीच रस्साकशी का एक नया केंद्र बनकर उभरा है. बीते दो-तीन महीनों के दौरान यहां छात्रसंघ की अध्यक्ष ऋचा सिंह और एबीवीपी के बीच कई बार हिंसक टकराव हो चुका है.

योगी आदित्यनाथ से लेकर वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन के कार्यक्रम स्थगित हो चुके हैं. इन तमाम मसलों पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष ऋचा सिंह से कैच संवाददाता पाणिनी आनंद की बातचीत:

आपने सिद्धार्थ वरदराजन को युनिवर्सिटी में आमंत्रित किया. एबीवीपी को क्या आपत्ति थी जो उनका कार्यक्रम रद्द करवा दिया गया?

देश भर में असहिष्णुता बढ़ गई है. ये लोग (एबीवीपी) अपनी धारा के अलावा और किसी को सुनना ही नहीं चाहते. मीडिया, बुद्धिजीवी, अकेडमिक कोई भी हो सबका मुंह ये अपनी गुंडागर्दी से बंद करने पर आमादा हैं. जो इनसे सहमत नहीं है वह देशद्रोही है.

इन लोगों ने सिद्धार्थ को नक्सली और देशद्रोही करार देकर कैंपस में विरोध प्रदर्शन किया और वीसी को कार्यक्रम रद्द करने के लिए मजबूर कर दिया. सिद्धार्थ को किसी लिहाज से देशद्रोही या नक्सली नहीं कहा जा सकता. लेकिन जब से केंद्र में इन लोगों की सरकार बनी है ये लोग सबको सर्टिफिकेट दे रहे हैं.

इससे पहले आपने नवंबर महीने में योगी आदित्यनाथ को अमंत्रित करने का विरोध किया था. वह क्या मामला था?

12 नवंबर को दीवाली के दिन मुझे छात्र यूनियन के जनरल सेक्रेटरी ने फोन किया कि वे लोग यूनियन का उद्घाटन योगी आदित्यनाथ से करवाना चाहते हैं. मैंने कहा, आज छुट्टी का दिन है, जब युनिवर्सिटी खुल जाएगी तब मिलकर इस पर फैसला कर लेंगे. मगर वो बोले की उन्होंने बीस नवंबर तारीख़ तय कर दी है उद्घाटन के लिए. अगले दिन छुट्टी का दिन था. फिर भी मैंने ऑफिस खोला और ऑफिस में बैठी. जनरल सेक्रेटरी दो-तीन लोगों के साथ आए.

उन्होंने मुझसे कहा कि उन लोगों ने बीस तारीख़ उद्धाटन के लिए तय कर दी है और योगी आदित्यनाथ आएंगेे. ये लोग प्रेजीडेंट का बायकॉट करके निर्णय ले रहे थे. दूसरा अगर उद्धाटन में अध्यक्ष शामिल नहीं होगा तो वह मान्य नहीं होगा. एबीवीपी वालों को इसकी भी परवाह नहीं थी.

एबीवीपी अपनी धारा के अलावा और किसी को सुनना ही नहीं चाहते. जो इनसे सहमत नहीं है वह देशद्रोही है

एक और दिक्कत मेहमान के चुनाव से थी. योगी आदित्यनाथ सांप्रदायिक, मुसलिम विरोधी व्यक्ति हैं. युनिवर्सिटी को ऐसे लोगों के साथ खड़ा होने से बचना चाहिए. छात्रसंघ में मेरे अलावा चार दूसरे सदस्य एबीवीपी से हैं.

उनको लगता है कि एक महिला से क्यों पूछना. मैंने कह दिया कि योगी आदित्यनाथ को तो मैं उद्घाटन के लिए बुलाने नहीं दूंगी. मेरा मानना है कि उनका शिक्षा में कोई योगदान भी नहीं है. उनके आने से कैंपस के अंदर माहौल खराब हो सकता था.

अपने योगी का विरोध किया, एबीवीपी के लोगों ने सिद्धार्थ का विरोध किया. तो आप खुद को पीड़ित कैसे कह सकती है?

दोनो चीजें एकदम अलग हैं. ये लोग मुझे बाइपास करके योगी आदित्यनाथ को छात्रसंघ के कार्यक्रम में बुलाना चाहते थे जो कि तकनीकी तौर पर गलत था. बिना छात्रसंघ अध्यक्ष की सहमति के वे नई यूनियन का उद्धाटन करना चाहते थे. इसलिए मैंने विरोध किया. सिद्धार्थ का मामला एकदम अलग है.

उन्हें एक सेमिनार को संबोधित करना था. उसके लिए सीनेट हॉल बुक था. एबीवीपी ने वीसी पर डबाव डाल कर सीनेट हॉल की बुंकिंग रद्द करवा दी. युनिवर्सिटी में इस तरह के वाद-संवाद के कार्यक्रम होते रहते हैं. विभिन्न विचारों पर बहस होती रहती है.

आपको क्या लगता है वीसी इस मामले में इतना असहाय क्यों हैं?

वीसी आरएल हंगलू एबीवीपी वालों के साथ मिले हुए हैं. व्यवस्थित तरीके से देश भर की केंद्रीय युनिवर्सिटीज़ में एबीवीपी को ताकतवर बनाने का काम चल रहा है. केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इनकी मनमानी चल रही है. हैदराबाद में रोहित वेमुला की मौत इसी का नतीजा है.

केंद्रीय विश्वविद्यालय सीधे एचआरडी मंत्रालय के अधीन आते हैं लिहाजा यहां के वीसी से केंद्र सरकार आसानी से अपनी बात मनवा लेती है. केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद स्थितियां इलाहाबाद में भी बदली हैं.

आपने सिद्धार्थ का कार्यक्रम स्टूडेंट यूनियन हॉल में क्यों नहीं करवाया?

19 जनवरी को वीसी ऑफिस ने मुझे बताया कि सिद्धार्थ का कार्यक्रम सीनेट हॉल में नहीं हो सकता. तब हमने इस पर फैसला किया था कि सिद्धार्थ का कार्यक्रम छात्रसंघ हॉल में करवा लें. लेकिन आधी रात को पुलिस ने मेरे हॉस्टल में आकर मुझे नोटिस दिया कि हम सिद्धार्थ का कार्यक्रम छात्रसंघ भवन में भी नहीं करवा सकते क्योंकि कैंपस में अराजकता पैदा होने का खतरा है. मजबूरन हमने कार्यक्रम रद्द कर दिया. वीसी और पुलिस प्रशासन यह सब एबीवीपी के दबाव में कर रहा था.

वो कैसे?

अगर कैंपस में किसी तरह की कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का अंदेशा था तो सिर्फ मेरे लिए ही था या सबके लिए था. बीस तारीख को हमने सिद्धार्थ का कार्यक्रम रद्द कर दिया. लेकिन एबीवीपी जिसके दबाव में प्रशासन यह सब कर रहा था, ने उसी दिन छात्रसंघ हॉल में शांतनु महाराज का प्रवचन आयोजित करवाया. मेरे लिए ही चीजें प्रतिबंधित है. ये लोग पूरी तरह से महिला विरोधी मानसिकता के लोग हैं. इन्हें यह बात पचती नहीं है कि उनकी अध्यक्ष एक महिला है.

महिला विरोधी क्यों हैं?

जब से मैं अध्यक्ष बनी हूं यो लेग किसी मीटिंग में हिस्सा लेने तक नहीं आते. योगी के मामले में भी इन्होंने खुद ही निर्णय लेने की कोशिश की. जब तनाव बढ़ गया तो वीसी ने हमारी मीटिंग बुलाई थी. मैं मीटिंग में पहुंची जहां यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन और बाकी पदाधिकारी मौजूद थे.

बात की शुरुआत एबीवीपी के महामंत्री ने यह कहकर की कि देखिए सर, हम तो योगी को बुलाएंगे, आप लोगों से बन पड़े तो रोक लीजिएगा. मैंने उनका विरोध किया तो वे सबकी मौजूदगी में मेरे साथ गाली-गलौज पर उतर आए.

richa singh

उन्होंने वीसी साहब को ये कहकर धमकाया कि अगर आप कार्यक्रम नहीं करवा सकते तो आप छुट्टी पर चले जाइये. फिर मुझे देखकर बोले कि मैं एक लड़की की सीमा से आगे बढ़ रही हूं औऱ मुझे वो किसी दिन शहर से बाहर फिंकवा देंगे.

ये सब वीसी की मौजूदगी में कहा गया?

बिल्कुल, सबकुछ वीसी, प्रॉक्टर और रजिस्ट्रार के सामने हुआ. सीसीटीवी कैमरे में ये सारी चीज़ें रिकॉर्ड हैं. मैंने कहा मैं जा रही हूं और केवल इतना बताकर जा रही हूं कि मेरी इस कार्यक्रम में सहमति नहीं है.

लेफ्ट के किन-किन धड़ों ने आपको समर्थन दिया?

मेरा योगी का विरोध देखते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सभी छात्र संगठन जैसे एनएसयूआई, समाजवादी छात्र सभा, आइसा, डीएसओ, एसएफआई आदि सभी मेरे पक्ष में आ गए. फिर मैंने छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्षों से भी बात की. उन्होंने भी माना कि योगी आदित्यनाथ को नहीं आना चाहिए और आपको भी बाइपास नहीं किया जाना चाहिए. शहर के प्रगतिशील लोगों ने भी खुलकर समर्थन दिया. जितना लेखक वर्ग था उसने भी हमारा समर्थन किया.

सिद्धार्थ वरदराजन को किसी लिहाज से देशद्रोही या नक्सली नहीं कहा जा सकता: ऋचा सिंह

वो लोग मुझे लगातार उकसाते रहे. मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं. सेक्शुअल रिमार्क, अभद्र टिप्पणी, सामने से आकर धक्का दे देना आदि. वो हर तरीके से मुझे हरेस करते हैं.

इसी तरह ये सारी चीजें चलती रहीं. 20 नवंबर योगी का कार्यक्रम तय था. 19 तारीख़ को इन लोगों ने स्टूडेंट यूनियन का इन्विटेशन कार्ड भाजपा के झंडे पर छपवाया. यूनिवर्सिटी की ओर से कोई ऑफिस ऑर्डर नहीं निकला. भाजपाई रंग से पूरे विश्वविद्यालय को रंग दिया गया. 19 तारीख़ को मुझे लगा कि वो आएंगे और हम रोक नहीं पा रहे हैं तब मैं शाम को साढ़े छह बजे यूनिवर्सिटी के मेन एंट्रेस गेट पर जाकर धरने पर बैठ गईं.

हम जैसे ही भूख हड़ताल पर बैठे. एबीवीपी और संघ के तमाम लोग आ गए. उन्होंने नारेबाजी के साथ भद्दे गीत गाना और फब्तियां कसना शुरू कर दिया. हम गांधी की प्रतिमा के साथ बैठे थे क्योंकि हमें अंदाजा था कि ये हमें प्रोवोक करेंगे. 11 बजे हमें जिला प्रशासन का आदेश मिला कि योगी जी के आने पर पाबंदी लगा दी गई है. साथ ही साथ यूनिवर्सिटी में किसी भी कार्यक्रम को बैन कर दिया गया है.

ये आदेश आपको कलेक्टर के दफ्तर से मिला?

हां, हमने यूनिवर्सिटी अधिकारियों से कहा, सर, आप हमें आश्वासन दीजिए कि इस आदेश को फॉलो करेंगे. वो इसको भी मानने के लिए तैयार नहीं थे. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इसे रोकेगा. हमने कहा कि वो तो रोकेंगे लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन क्या करेगा?

हमारे शक की वजह ये थी कि कार्यक्रम की तैयारियां जिला प्रशासन का आदेश के बावजूद बदस्तूर जारी थीं. इसी से हमें लगा कि युनिवर्सिटी की मंशा ठीक नहीं है.

रात के साढ़े बारह बज चुके थे. करीब बारह बजकर चालीस मिनट पर छात्रसंघ के महामंत्री और उपाध्यक्ष करीब 40 लड़कों के साथ कैंपस में आ घुसे. चार पांच बाउंसर्स भी उनके साथ थे. वो जयश्रीराम, भारत माता की जय के नारों के साथ हमें दो मिनट में कैंपस खाली करने के लिए कहने लगे. ये कहकर उन्होंने हड़ताल में मौजूद लड़के और लड़कियों पर बुरी तरह हमला कर दिया. छात्रसंघ के महामंत्री ने मुझपर सीधा हमला किया. मुझे इसमें चोट भी आई.

आपको लगता है कि अगर सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार नहीं होती, फर्ज़ कीजिए बीजेपी की सरकार होती तो क्या योगी आदित्यनाथ को रोका जा सकता था

ये तो बहुत व्यवहारिक सी बात है कि अगर बीजेपी की सरकार होती तो उन्हें कतई डिटेन नहीं किया जाता. बल्कि उनका कार्यक्रम और अच्छे तरीके से होता. लेकिन अगर इस बार उन्हें नहीं आने दिया गया, ये सिर्फ समाजवादी पार्टी की वजह से नहीं था. ये छात्रों की बहुत बड़ी शक्ति है. सबको मालूम था कि हालात बहुत बुरे हो जाएंगे.

एबीवीपी का तर्क है कि जब वामपंथी आ सकते हैं, कांग्रेसी आ सकते हैं, समाजवादी आ सकते हैं तो फिर दक्षिणपंथी क्यों नहीं आ सकते हैं?

इसमें दो चीज़ें हैं. पहली बात तो छात्र संघ के उद्घाटन को समझना बहुत ज़रूरी है. ये तमाम लोग क्या कभी छात्र संघ के उद्घाटन में आए हैं. छात्र संघ की ये परंपरा नहीं रही है कि इस तरह के लोग उद्घाटन में आएं. हमारी परंपरा यही रही है कि एमएचआरडी के मंत्री से कम स्तर के व्यक्ति ने कभी इसका उद्घाटन नहीं किया. दूसरी बात, छात्र संघ अध्यक्ष ये तय करेगा कि किसी विचारधारा का प्रभाव इसमें ना हो.

मान लीजिए विवादित बयानों के मशहूर ओवैसी का ही कार्यक्रम करवाना चाहे तब क्या आप विरोध करेंगी?

बिल्कुल, पुरजोर विरोध करेंगे. हमसे मुस्लिम बोर्डिंग के छात्रों ने यही कहा था. हमने छात्रों के बीच जाकर ये लाइन बार-बार बोली थी. हमने कुछ पोस्टर बनाए हैं कि आज योगी आदित्यनाथ, कल ओवैसी. विश्वविद्यालय में ये परंपरा चल पड़ेगी.

आपने कहा कि योगी प्रकरण के बाद कई ऐसी चीज़ें हो रही हैं जो चिंताजनक हैं. अब क्या माहौल है?

कैंपस किस बुरी तरह से बायस्ड माहौल में चल रहा है वो आपको बताऊं..बाकी चारों पदाधिकारियों को ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है. लेकिन मेरे खिलाफ डिसीप्लिनरी एक्शन लेने की तैयारी है.

मुझे पता चला है कि मुझे निष्कासित करने की तैयारी है. भाजपा, केंद्र और तमाम सांसदों का बहुत ज़्यादा दबाव है.

ये लड़ाई अब आदित्यनाथ बनाम ऋचा सिंह नहीं रह गई है. ये अब ऋचा बनाम केंद्र सरकार हो गई है. ऐसे में आपकी आगे की रणनीति क्या रहेगी?

मैंने प्रधानमंत्री जी को भी चिट्ठी लिखी है. मैंने उनसे पूछा है कि जिस तरह की छात्र राजनीति एबीवीपी कर रही है, क्या आप उसी को बढ़ावा देना चाहते हैं. इसी तरह की महिला सुरक्षा की बात कर आप 2014 में मैंडेट लेकर आए थे.

जिस संस्थान में आपको 128 साल में पहली छात्रसंघ अध्यक्ष बनने का मौका मिला. क्या आपको नहीं लगता कि वहां इस तरह की घटना शर्मनाक है

मैंने ये चुनाव पुरुष बनाम महिला के आधार पर नहीं लड़ा था. मैंने छात्रों के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में महिलाओं का वोट विजेता को डिसाइड करता है फिर भी एक महिला को अध्यक्ष बनने में 128 साल लग गए.

तो आप कह रही हैं ये महिला विरोधी मानसिकता है

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बिल्कुल, मैं चुनाव इस मुद्दे पर जीतकर नहीं आई, लेकिन बतौर महिला मुझे बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. अगर मैं महिला नहीं होती तो मेरे साथ छेड़खानी भी नहीं होती.

लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि मेरे संघर्ष के बाद जो दूसरी महिला अध्यक्ष आएगी वो मुझसे बेहतर हालात में काम कर पाएगी. मेरी मां कहती हैं क्या तुम यही करने के लिए छात्र राजनीति में गई थीं. लोग चार कदम आगे बढ़ते हैं. तुम पीछे जा रही हो.

First published: 25 January 2016, 16:39 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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