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इन पांच तरीकों से सिक्किम बना पूर्ण ऑर्गेनिक राज्य

श्रिया मोहन | Updated on: 19 January 2016, 23:43 IST
QUICK PILL
  • करीब 10 सालों की मेहनत के बाद सिक्किम ने अपनी 75,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को पूरी तरह से जैविक खेती वाले क्षेत्र में तब्दील कर दिया है. राज्य में 800,000 टन जैविक उत्पादों का उत्पादन हो रहा है जो देश के कुल जैविक उत्पादन का करीब 65 फीसदी है.
  • सिक्किम ने यह साबित कर दिया है कि जैविक खेती की राह पर चलते हुए भी उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकती है. आम तौर पर यह माना जाता है कि जैविक खेती में उत्पादन में गिरावट आती है.

पिछली शाम सिक्किम हर किसी की जुबां पर था. प्रधानमंत्री मोदी से लेकर राज्य के हर किसान खुश थे. सिक्किम अब आधिकारिक तौर पर भारत का पहला ऑर्गेनिक राज्य बन चुका है. मोदी ने अपने भाषण में कहा, 'सभी राज्यों को सिक्किम का अनुसरण करना चाहिए ताकि चुनिंदा इलाकों में जैविक खेती कराई जा सके और फिर बाजार में अधिक मूल्य के उत्पादों की आपूर्ति की जा सके.'

मोदी ने हाल ही में पेरिस जलवायु सम्मेलन में बोला था जहां पूरी दुनिया ने उनसे सहमति जताई थी. उन्होंने कहा, 'इसका मतलब जीवनशैली में बदलाव है और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाते हुए रहना है जिसे सिक्किम ने कर दिखाया है.'

सिक्किम को अपने 75,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को पूरी तरह से ऑर्गेनिक फॉमलैंड बनाने में 10 साल लग गए

राज्य अब 800,000 टन जैविक उत्पादों का उत्पादन कर रहा है जो भारत में उत्पादित होने वाले कुल जैव उत्पादों का करीब 65 फीसदी है. भारत में कुल 12.4 लाख टन जैविक उत्पादों का उत्पादन होता है. 

समग्र तरीके से देखा जाए तो सिक्किम ने यह साबित कर दिया है कि जैविक उत्पादन का रास्ता पकड़ते हुए भी उत्पादकता में कमी नहीं आ सकती. जैविक खेती के समर्थक सिक्किम को लेकर उत्साहित हैं और राज्य ने सही दिशा में आगे बढ़ने की पहल की है. अब सिक्किम मॉडल को पूरे देश में लागू किए जाने की बात हो रही है. कैच ने आपके सामने उन पांच तरीकों को रखा है जिसकी मदद से सिक्किम यह मुकाम हासिल करने में सफल रहा है.

नजरिये से मिली सफलता

इन सबकी शुरुआत एक मिशन से हुई. मुख्यमंत्री पवन चामिलंग ने बेहद साधारण तरीके से सोचा था. सिक्किम एक छोटा राज्य है और उसे एक ऐसा तरीका खोजना था जिसकी मदद से इकोलॉजी में छेड़छाढ़ किए बिना अपने को आत्मनिर्भर बनाया जा सके. ईको-टूरिज्म को बचाए रखते हुए आजीविका के अवसर बनाने थे. 2003 में उन्होंने राज्य के लिए जैविक कृषि का विकल्प चुना. 

केवल सिक्किम ही ऐसा राज्य था जहां जैविक खेती धनी किसानों का शगल नहीं था बल्कि यह सभी लोगों के लिए एक विकल्प था. सरकार लोगों को यह समझाने में सफल रही कि हमारी जमीन बेहद प्रदूषित हो चुकी है और आने वाली पीढ़ी के लिए हमारी कुछ जिम्मेदारी बनती है कि हम इसे रोके. 

केरल के एनजीओ थनल के संस्थापक और ग्रीन एक्टिविस्ट श्रीधर राधाकृष्णन ने कहा, 'शुरुआत से ही सही मंशा का प्रदर्शन जरूरी है. सिक्किम ने 2003 से यह शुरुआत की जब उसने जैविक नीति की घोषणा करते हुए राज्य को जैविक खेती की तरफ ले जाने की घोषणा की.' एनजीओ का मकसद इस मुहिम को दक्षिण के राज्यों तमिलनाडु और केरल में लागू करने की है.

जैविक खेती की मदद से उत्पादकता में 35 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है

सिक्किम की कहानी सफलता की कहानी है क्योंकि अभी भी यह आंदोलन थमा नहीं है. लोगों ने इस विचार को अपना लिया है और वह इसे सफल कहानी के तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं.

घर में बने जैव खाद की परंपरा को आगे बढ़ाना

लोगों को लगता है कि जैविक खेती बेकार का विचार है. सिक्किम की कहानी हमें यह बताती है कि यह एक सफल और बेहतर विचार है जो पर्यावरण के हितों के मुताबिक है. इसकी मदद से आप खेती और स्वॉयल इकोसिस्टम के बीच संतुलन बनाते हैं. 

वैश्विक तौर पर आंकड़ें बताते हैं कि जैविक खेती की मदद से उत्पादकता में 35 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है. एफएओ के 2007 के आंकड़ों से इसकी पुष्टि की जा सकती है.

इस हफ्ते की शुरुआत में मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने चिंतन भवन में टिकाऊ कृषि पर किसानों को संबोधित करते हुए जैविक बीज और खाद के बारे में सरकारी कोशिशों से उन्हें अवगत कराया जो लोगों के पांरपरिक ज्ञान से जुड़ा हुआ है.

उर्वरकों से दूरी और केमिकल इनपुट्स पर सब्सिडी का खात्मा

2010 में एक जबरदस्त और साहसिक फैसला लेते हुए सिक्किम ने चरणबद्ध तरीके से उर्वरकों और उस पर दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म करने का फैसला किया. राधाकृष्ण ने कहा, 'आप अगर उर्वरकों की  आसान उपलब्धता सुनिश्चित कर रहे हैं और लोगों से उम्मीद कर रहे हैं कि वह जैविक खेती का रास्ता अपनाएं तो यह नामुमकिन है. सिक्किम ने बेहतरीन काम किया जिससे लोगों की खेती की आदतों को बदलने में मदद मिली.'

16 सितंबर 2003 को सिक्किम स्टेट ऑर्गेनिक बोर्ड का गठन करते हुए चामलिंग ने 2004 में तत्काल प्रभाव से रासायनिक उर्वरकों की खरीद बंद कर दी. इसके साथ ही उन्होंने रासायनिक कीटनाशकों की खरीद पर किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को भी खत्म कर दिया.

भारत में अभी भी उन कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है जिसे 67 देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है

केरल ने भी इस रास्ते पर चलने का फैसला किया. केरल पहला राज्य था जिसने 2001 में एंडोसल्फान पर प्रतिबंध लगाया और इसके 10 साल बाद 14 अलग-अलग कीटनाशकों को प्रतिबंधित कर दिया.

श्रीधर बताते हैं, 'भारत में हम अभी भी उन कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे 67 देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है. केंद्र सरकार कीटनाशक कारोबारियों के दबाव की वजह से ऐसा कोई नीति नहीं ला पा रही है. राज्यों को इस मामले में पहल करते हुए सभी कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए जिससे हमारी धरती में जहर फैल रहा है.'

जैविक खेती के लिए किसानों को मिला प्रोत्साहन

सिक्किम सरकार ने किसानों को जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए फसल आधारित प्रोत्साहन देने की योजना बनाई. राधाकृष्ण ने कहा, 'सरकार ने करीबी से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को देखा. हर माहौल में प्रत्येक फसल के लिए किसानों को अलग-अलग समस्याओं का सामना करना पड़ा. ऐसे में जैविक खेती के लिए आगे बढ़ने का मतलब था कि किसानों की जरूरतों के मुताबिक नीतियों का निर्माण किया जाए.'

सिक्किम में बड़े पैमाने पर किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए शिविर लगाए गए जिसमें उन्हें खेती के तरीकों के साथ अपने उत्पादों की मार्केटिंग के बारे में बताया गया. राधाकृष्ण ने कहा, 'हरित क्रांति के दौरान एम एस स्वामीनाथन, सी सुब्रमण्यन और इंदिरा गांधी कृषि अधिकारियों के साथ किसानों तक उर्वरक पहुंचाती थीं और उन्हें निजी तौर पर इसके इस्तेमाल के बारे में बताया जाता था. तो फिर यह मानने का कोई कारण नहीं है कि हम जैविक खेती के मामले में ऐसा नहीं कर सकते.'

सौ फीसदी जैविक खेती को प्रोत्साहन

विशेषज्ञों के मुताबिक जैविक खेती को सस्ता करने का एक ही उपाय है कि इसमें सभी को शामिल कर लिया जाए. जैविक खेती के मामले में होता यह है कि खुदरा विक्रेता बड़ी संख्या में कई किसानों से छोटे-छोटे सौदे करता है. जैविक उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला छोटी और बिखड़ी हुइ है. इससे उत्पाद की लागत में बढ़ोती होती है. जब कोई राज्य 100 फीसदी जैविक हो जाएगा तो लागत में तेजी से गिरावट आएगी और फिर कीमत भी अपने आप कम हो जाएगी.

इसका एक और लाभ है. जब पूरे राज्य में जैविक खेती होगी तो जमीन की उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी. सिक्किम में हमने उत्पादकता में बढ़ोतरी देखी है.

सिक्किम जाहिर तौर पर अपनी खाद्य जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर नहीं है और उसे पड़ोसी राज्यों से सब्जियां मंगानी पड़ती है जो जैविक नहीं होती हैं. ऐसे में अगर सभी राज्य जैविक खेती का रुख करते हैं तो सभी के लिए जैविक उत्पादों की उपलब्धता में बढ़ोतरी होगी.

हालांकि भारत में साल दर साल सूखे की वजह से कृषि संकट गहरा रहा है. तो क्या ऐसे में जैविक खेती से किसानों को मदद मिलेगी?

राधाकृष्णन बताते हैं, 'आप देखिए सबसे ज्यादा आत्महत्या कहां हो रही है. उन सभी इलाकों में जहां खाद पर अत्यधिक निर्भरता है. रासायनिक उर्वरकों की खरीदारी के लिए किसानों को कर्ज लेना पड़ता है. इसके अलावा जमीन भी जहरीली हो रही है. ऐसे में यह साफ संकेत है कि हम उन स्वदेशी प्रजातियों की तरफ कदम बढ़ाए जिनमें सूखा और बाढ़ से निपटने की क्षमता है. हमें अपनी गलतियों को सुधारने की जरूरत है.'

First published: 19 January 2016, 23:43 IST
 
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