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कामत के इस्तीफे में कांग्रेस के लिए संदेश

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 6:44 IST
(मलिक/कैच न्यूज)

गुरुदास कामत ने एक बिंदु उठाया है लेकिन अपनी आवाज मुखर नहीं की. सोमवार को पूर्व कांग्रेसी नेता ने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है जो कांग्रेस पार्टी के लिए एक गंभीर संदेश है. पार्टी कार्यकर्ताओं को भेजे एसएमएस में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शीर्ष नेताओं के जवाब के इंतजार के बाद उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है.

कामत ने एक बयान में कहा, 'मैंने माननीय कांग्रेस अध्यक्ष से करीब 10 दिन पहले मुलाकात की और त्यागपत्र देने की इच्छा जताई. इसके बाद मैंने सोनियाजी और राहुलजी दोनों को पत्र भेजे कि मैं हटना चाहता हूं. चूंकि कोई जवाब नहीं आया. मैंने औपचारिक रूप से सूचित किया कि मैं राजनीति से संन्यास लेना चाहता हूं.' सादगी भरे अंदाज में उन्होंने कहा, 'मैं पार्टी नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं को शुभकामना देता हूं'

छत्तीसगढ़: 12 साल बाद कांग्रेस फिर उसी दोराहे पर, जोगी बनाएंगे अपनी पार्टी

कामत कभी खुलकर केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ नहीं बोले. यूपीए-2 के कार्यकाल में 2011 में कैबिनेट मंत्री नहीं बनाए जाने पर उन्होंने बिना कोई विरोध किए चुपचाप इस्तीफा दे दिया था.

पांच बार लोकसभा सदस्य रह चुके कामत की पहचान जमीनी नेता के तौर पर है

कांग्रेस द्वारा पिछली बार कामत की अनदेखी और इस बार में एक बड़ा अंतर है. अबकी बार पिछले 44 सालों से पार्टी से जुड़े कामत अलग हो गए हैं. पांच बार लोकसभा सदस्य रह चुके कामत की पहचान जमीनी नेता के तौर पर है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की शीर्ष नेता सोनिया गांधी के पास कामत जैसे बड़े कद वाले नेता की सुनवाई के लिए समय न होना, कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों की बेबसी को दर्शाता है.

कामत सिर्फ मुंबई कांग्रेस के नेता ही नहीं बल्कि कांग्रेस महासचिव भी थे. 2013 में कांग्रेस ने उन्हें महासचिव बनाते हुए गुजरात, राजस्थान, दादर और नगर हवेली, दमन और दीव का प्रभार सौंपा था. इसके अलावा कामत कांग्रेस की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था कांग्रेस कार्य समिति के भी सदस्य थे.

छत्तीसगढ़ से जोगी बाहर

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति में आमंत्रित सदस्य अजीत जोगी ने कुछ दिनों पहले कांग्रेस पार्टी से अलग होने की घोषणा की और नई पार्टी के गठन का एलान किया. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उस समय पार्टी से अलग हो रहे हैं जब पार्टी अपने इतिहास में सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. यह पता नहीं है कि सोनिया और राहुल इसे कैसे देख रहे हैं लेकिन ऐसे संकेत मिले हैं, दोनों नेता परेशान नहीं है.

एक थ्योरी यह सामने आ रही है कि चूंकि कांग्रेस पार्टी नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है तो कुछ नेताओं का जाना स्वाभाविक है. कामत और जोगी दोनों पुराने कांग्रेसी रहे हैं और सालों तक पार्टी की सेवा की है. नेताओं के पार्टी छोड़ने के अलावा कई राज्यों में कांग्रेस विधायक बागी रुख अपना रहे हैं.

बीजेपी की राह चली कांग्रेस

हाल में ही अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा में असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने बगावत का रास्ता अपनाया. और कांग्रेस नेतृत्व हर राज्य में असंतुष्टों में मनाने में असफल रही.

असम से उत्तराखंड तक एक ही कहानी

उत्तराखंड में बागियों के नेता विजय बहुगुणा ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दो सालों तक उन्हें मिलने का समय नहीं दिया. ऐसी ही कहानी असम मे कांग्रेस के पूर्व वफादार हेमंत बिस्व सर्मा की है.

कांग्रेस हाईकमान के लगातार अनदेखी के चलते अपनी खीझ मिटाने के लिए उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया. असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली है और इस जीत में सर्मा को एक महत्वपूर्ण फैक्टर माना जा रहा है.

सर्मा की कहानी कामत से ज्यादा अलग नहीं है. दोनों ने कहा है कि उन्हें कांग्रेस आलाकमान से कोई जवाब नहीं मिला. सर्वेसर्वा के तौर पर सोनिया और राहुल पार्टी के लिए जो भी कर रहे हों लेकिन उनकी रणनीति में निश्चित रूप से कुछ गलत है. अगर राहुल पार्टी प्रमुख बनते हैं और अपने वफादारों को निर्णायक पदों पर बैठाना चाहते हैं तो इसके लिए राज्य में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों को गिरने देने की क्या जरूरत है? क्यों ठोस जनाधार वाले और अनुभवी नेताओं को पार्टी छोड़ने की जरूरत पड़ रही है?

कांग्रेस को इन सवालों पर आत्मविश्लेषण की जरूरत है क्योंकि यह सिर्फ एक सवाल नहीं है. क्या कांग्रेस वास्तव में बीजेपी के 'कांग्रेस मुक्त भारत' के अभियान को रोकने में रुचि रखती है?

First published: 7 June 2016, 6:49 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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