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सिंगूर फैसलाः बंगाल की ‘दीदी-गाथा’ पूर्ण हुई

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 3 September 2016, 7:32 IST

सुप्रीम कोर्ट द्वारा टाटा मोटर्स के सिंगूर में किए गए भूमि अधिग्रहण को रद्द किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को किसानों की ऐतिहासिक जीत बताया.

बनर्जी सिंगूर में टाटा मोटर्स के प्लांट के शुरू से ही खिलाफ थीं. उन्होंने वाम दलों को भी जबर्दस्ती जमीन हथियाने के लिए आड़े हाथों लिया.

ममता के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीपीआई-एम ने कहा, 'सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह किसानों की जमीन कैसे वापस करेगी?, विशेषकर, उपजाऊ भूमि जो अपना उपजाऊपन खो चुकी हैं.'

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने एक समिति बनाई है जिसमें टीएमसी के कुछ वरिष्ठ मंत्री, मुख्य सचिव और गृह सचिव शामिल हैं. यह समिति सिंगूर के 400 एकड़ जमीन के हकदार किसानों को मुआवजा देने की योजना बनाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मुआवजा 10 से 12 दिन के भीतर किसानों को मिल जाना चाहिए. गुरुवार को नाबन्ना में इस बारे में एक बैठक आयोजित की जाएगी कि मुआवजा चाहने या न चाहने वाले किसानों के बीच इसे कैसे बांटा जाय और अगर जमीन बंजर हो गई है तो उस स्थिति में क्या किया जाए?

ममता ने जो कहा

मेरा टाटा समूह से कोई द्वेष नहीं है, अगर ऐसा होता तो मैं उनके प्रोजेक्ट कभी नहीं लेती. पंचायतों में उनकी कई परियोजनाएं चल रही हैं. मैं एक बार फिर उनसे आग्रह करती हूं कि वे बिना जबरन जमीन हथियाए अपना व्यापार करें.

मेरी आंखों में जो आंसू छलके हैं, वे खुशी के हैं और अब मैं शांति से मर सकती हूं.

हर साल 14 अगस्त को सिंगूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और सिंगूर के किसानों की जीत की खुशी में एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. 2 सितम्बर को टीएमसी पूरे कोलकाता में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करेगी.

मैने किसानों के लंबे चले विरोध प्रदर्शनों में उनका साथ दिया. हम (टीएमसी) जबरन जमीन हथियाने के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और हमने 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून की खामियों को उजागर किया है.

-पूर्ववर्ती वाम मोर्चा की सरकार ने पश्चिम बंगाल आधारभूत विकास निगम के जरिये बल प्रयोग करते हुए भू अधिग्रहण किया. यह गलत था.’’

सिंगूर मसले से ही तृणमूल कांग्रेस को ‘‘मां माटी मानुष‘’ का नारा मिला था.

उन्होंने सुब्रतो मुखर्जी जो कि अब टीएमसी सरकार में मंत्री हैं, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कार्यकर्ता मेधा पाटकर, पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी और उन सभी किसानों को धन्यवाद दिया जिन्होंने सिंगूर आंदोलन के दौरान ममता बनर्जी की मदद की थी.

ममता ने बताया, ‘मैं जब इस्लामपुर (उत्तरी बंगाल) से लौट रही थी तो हुगली में दंकुनी के पास सीपीआई-एम कार्यकर्ताओं ने मुझ पर हमला किया. तभी से मैंने इस दिशा में कार्य करना शुरू किया और संकल्प लिया कि मैं अब जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं होने दूंगी.'

हमने पहले ही सिंगूरवासियों को 2 रूपए प्रति किलो चावल और 2,000 रुपए प्रति माह का मानदेय तय कर दिया है, जो अपनी जमीन वापस नहीं लेना चाहते. हमने रेलवे और किसान बाजार में भी लोगों को अनुबंध आधारित रोजगार दिया है.

सीपीआई-एम नेता कांता मिश्रा का जवाब

हम सिंगूर के फैसले के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते लेकिन हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं.

‘‘दो न्यायाधीशों के बीच दो मुद्दों पर असहमति थी. न्यायाधीश गौड़ा का कहना था कि भूमि जन उपयोग के लिए सीधे टाटा मोटर्स ने नहीं अधिगृहीत की थी.’ दूसरी ओर न्यायाधीश मिश्रा ने कहा ‘सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि के अधिग्रहण में कोई अनियमितता नहीं पाई गई, क्योंकि इससे पश्चिम बंगाल में हजारों लोगों को रोजगार मिला.’

विधानसभा में सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास अधिनियम 2011 पेश किए जाने के बाद हमने राज्य सरकार से पहले ही मांग की है कि वह जमीन वापस चाहने या ना चाहने वालों को मुआवजा दे.

‘जब ममता ने जबरन भूमि अधिगृहीत नहीं की तो वे इसे उन किसानों को जबरन वापस भी नहीं दे सकती जो बंजर जमीन लेना नहीं चाहते. राज्य सरकार को इस बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.'

अन्य उद्धरण

महादेब सरकार नाम के एक किसान जो अपनी जमीन नहीं छोड़ना चाहते ने कहा, ‘हम इस न्याय से खुश हैं. यह केवल हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सहयोग से ही संभव हो पाया है.’

जमीन देने के इच्छुक एक किसान बिनय दास ने कहा, ‘मैं पहले ही अपनी जमीन दे चुका हूं और मुझे नहीं पता कि मुझे कितना मुआवजा मिलेगा?’ देखते हैं क्या होगा लेकिन मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हूं.’

सामाजिक कार्यकर्ता और सिंगूर में आंदोलन करने वाली पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति की संयोजक अनुराधा तलवार ने कहा, ‘मैं इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करती हूं, लेकिन क्या ममता वाकई इस बारे में चिंतित हैं कि उद्योगों को बंगाल की ओर पुनः कैसे आकर्षित किया जाए?, वे गरीबों के लिए किस प्रकार रोजगार का सृजन करेंगी? विकास के पूरे मुददे पर आत्म निरीक्षण की जरूरत है.’

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर जो कि सिंगूर आंदोलन में शामिल थीं ने भी अदालत के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि वाम दलों पर सदा के लिए लगे दाग ने उनकी लोकप्रियता घटा दी.

आंदोलन से ही जुड़े टीएमसी के मंत्रियों रबीन्द्र नाथ भट्टाचार्य और बेचरम मन्ना दोनों ने कहा वे अदालत के इस फैसले से खुश हैं और ममता का संघर्ष रंग लाया.

ममता ने तापशी मलिक की हत्या को भी याद किया, जिस वजह से ममता अपने विरोध का इतना आगे तक ले जा सकी. तापशी मलिक नाम की किशोरी ने सिंगूर आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था लेकिन उसकी नृशंस हत्या कर दी गई. उसे पीटा गया, उसके साथ दुष्कर्म किया गया और फिर जला दिया गया. तापशी के पिता मनोरंजन मलिक कहते हैं, ‘हम बेसब्री से आज के दिन का इंतजार कर रहे थे. आज हमारी आंखों के सामने तापशी का चेहरा है, जिस पर इस उपलब्धि से मिली खुशी के भाव हैं. अब जाकर उसकी आत्मा को शांति मिली होगी.’

क्या कहते हैं आंकड़े

  • टाटा द्वारा अधिगृहीत कुल भूमि- 997.11 एकड़
  • सिंगूर में जमीनों के मालिक- 13,491
  • वे किसान जिन्होंने मुआवजे के बदले अपनी जमीन दे दी- 10,852
  • विवादित भूमि, जहां भू मालिक नहीं चाहते कि फैक्ट्री लगााई जाए- 400 एकड़
  • भू-स्वामी जो अपनी जमीन देना नहीं चाहते- 2,639
  • राज्य सकार द्वारा अब तक दिया गया कुल मुआवजा- 119.95 करोड़ रूपए.
  • अब तक 4,000 किसानों को मुआवजा मिला है जबकि 6,000 को अब भी मिलना बाकी है.

First published: 3 September 2016, 7:32 IST
 
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