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दाढ़ी, केश कटा चुके सिख धार्मिक चुनाव में नहीं डाल पाएंगे वोट

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2016, 10:48 IST

हाल ही में संसद से पारित किए गए गुरुद्वारा (संशोधन) अधिनियम, 2016 विधेयक पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी के साथ ही अब दाढ़ी और केश कटा चुके सिख धार्मिक निकायों के चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे.

एक आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक महामहिम से विधेयक की मंजूरी के बाद चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के गुरुद्वारों के प्रशासन का विनियमन करने वाले 91 साल पुराने कानून के प्रावधान बदल गए हैं.

राष्ट्रपति ने गुरुवार को इस विधेयक को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी. सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 के तहत मतदाता के तौर पर पंजीकृत 21 साल से अधिक उम्र का हर सिख अपने पंथ के सर्वोच्च निकाय सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के चुनाव में मतदान करने की पात्रता रखता है.

धूम्रपान,शराब पीने वालों पर भी बैन


एसजीपीसी का गठन समुदाय के धार्मिक स्थलों का प्रशासन और प्रबंधन करने के लिए किया जाता है. राष्ट्रपति द्वारा मंजूर यह विधेयक साफ करता है कि दाढ़ी या केश कटवाने वाले, धूम्रपान करने वाले और शराब पीने वाले किसी भी व्यक्ति को मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं किया जाएगा. 

15 मार्च को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में सिख गुरुद्वारा (संशोधन) विधेयक, 2016 पेश किया था और इसके अगले दिन विधेयक पारित हो गया. लोकसभा में इसे 25 अप्रैल को पारित किया गया.

सहजधारी सिखों को झटका

यह घटनाक्रम इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि सहजधारी सिखों को मतदान से रोकने की सिख समुदाय की पुरानी मांग को पूरा करने वाला यह कानून पंजाब में अगले साल निर्धारित विधानसभा चुनाव से पहले आया है.

अधिसूचना में कहा गया कि यह कानून पिछले बीत चुके समय से लागू होगा. इसमें कहा गया कि यह समझा जाएगा कि कानून आठ अक्तूबर, 2003 से अस्तित्व में आया.

First published: 9 May 2016, 10:48 IST
 
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