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स्मृति ईरानी: कैंपस को सियासी दुश्मनी का अड्डा बनाना चाहती है कांग्रेस

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालयों के कैंपस में विवाद के बहाने कांग्रेस राजनैतिक लाभ हासिल करना चाहती है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में स्मृति ने ये बात कही है.

अखबार को दिए इंटरव्यू में स्मृति ने कहा कि जब मुझे मानव संसाधन मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली, तो मेरे सामने सियासी अखाड़े में तब्दील हुआ मंत्रालय सबसे बड़ी चुनौती थी. बहुत सारे मसलों पर राज्य केंद्र से आंखें नहीं मिला पाते थे, जो एक प्रशासनिक और सियासी चुनौती थी.

स्मृति ने कहा कि मैंने ये भी महसूस किया कि स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच भी सामंजस्य नहीं था. मेरी कोशिशों की बदौलत ये फासला कम होने के साथ ही राज्यों के साथ भी संवाद शुरू हुआ. 

इंटरव्यू में जब स्मृति से पूछा गया कि क्या वो मानती हैं कि पिछले शासन के दौरान इस नजरिए का अभाव था. इस पर स्मृति ने जवाब दिया, "हां इससे पहले सरकार का काफी रूखा स्वभाव था. 

आलोचकों में आया बदलाव

मेरा मानना है कि पिछले दो साल के कार्यकाल में सबसे चमकदार पक्ष ये है कि किसी एक राज्य ने भी मानव संसाधन मंत्रालय की पहल और सुझावों का विरोध नहीं किया. इसकी वजह ये है कि फैसले लेने से पहले आम सहमति बनाई गई."

जब उनसे पूछा गया कि क्या आपके आलोचकों ने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने को लेकर जो सवाल उठाए उनको शांत करने में वो कामयाब रहीं. इस पर स्मृति ने कहा कि मेरे मन में उनके लिए कोई गलत मंशा नहीं है.

स्मृति ने कहा, मेरी प्रशासनिक के साथ-साथ एकेडमिक प्रशासन की कोई पृष्ठभूमि नहीं रही है. इस वजह से उनकी चिंताएं जायज थीं कि मैं बड़ी अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों को संभाल पाऊंगी या नहीं. लेकिन वक्त बीतने के साथ मैंने कई आलोचकों के रुख में बदलाव देखा है.

स्मृति ने कहा कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन अब लोगों में ये भाव उभर रहा है कि ये महिला अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाएगी. मैं अपने नेतृत्व की आभारी हूं, जो मुझे इस लायक समझा गया.

कुलपति को हटाने पर सफाई

जब स्मृति से ये पूछा गया कि आप पहली मानव संसाधन मंत्री हैं, जिन्होंने किसी सेंट्रल यूनीवर्सिटी के वाइस चांसलर (विश्व भारती विश्वविद्यालय के वीसी) को हटाया है, इसकी क्या वजह है? इस पर स्मृति ने कहा,"मेरे ख्याल से ये समझने की जरूरत है कि ये मैंने खुशी-खुशी नहीं किया."

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स्मृति ने कहा कि विश्व भारती का शानदार अतीत रहा है. अगर वहां कानून व्यवस्था बिगड़ती है, तो ये सरकार और राष्ट्रपति की मजबूरी बन जाती है कि उपयुक्त कार्रवाई करते हुए संस्थान की गरिमा बहाल की जाए.  

वहीं अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे के बारे में सरकार का रुख पूछने पर स्मृति ने कहा कि जब तक इस मामले में सरकार हलफनामा दाखिल नहीं कर देती है, उनका बोलना ठीक नहीं होगा.

अमेठी से चुनाव लड़ने की सजा


हाल के दिनों में यूनीवर्सिटी कैंपसों में मानव संसाधन मंत्रालय के खिलाफ छात्रों की गोलबंदी दिख रही है. इस पर स्मृति ने कहा कि इसकी वजह उनका अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ना है.  

स्मृति ने कहा, "हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने हैदराबाद सेंट्रल यूनीवर्सिटी के एक छात्र का खत प्रकाशित किया था, जिससे ये स्थापित हुआ कि लेफ्ट और कांग्रेस अपने सियासी फायदों के लिए घटनाओं का इस्तेमाल करते हैं."

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स्मृति ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी चुनाव हार चुकी है, लिहाजा इस सरकार से अपनी सियासी दुश्मनी निकालने के लिए वो कैंपस को जरिया बना रही है. 

लेफ्ट से वैचारिक लड़ाई


वहीं विश्विद्यालयों के कामकाज में मंत्रालय के दखल देने के सवाल पर स्मृति ने कहा, "जब भी बीजपी सत्ता में आती है, ऐसे हमले बढ़ जाते हैं. ये राजनैतिक नहीं एक वैचारिक लड़ाई है. हमारे सर पर ऐसी काली परछाईं लटकती रहती है, जिसको लेफ्ट ने बहुत चालाकी से बनाया है."

वहीं रोहित वेमुला मामले में जब पूछा गया कि हैदराबाद सेंट्रल यूनीवर्सिटी को क्या और संवेदनशील रुख नहीं अपनाना चाहिए था, तो स्मृति ने कहा कि पहले न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट आ जाए, उसके बाद ही वो इस मामले में कोई टिप्पणी करेंगी.
First published: 14 May 2016, 6:07 IST
 
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