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वेमुला-जेएनयू डिबेट: कथ्य पूरा, तथ्य अधूरा

अभिषेक पराशर | Updated on: 25 February 2016, 14:27 IST
QUICK PILL
  • वेमुला-कन्हैया के मामले में विपक्ष की तैयारी आधी-अधूरी दिखी. विपक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी को तर्कसंगत तरीके से बहस के केंद्र में नहीं ला सका. 
  • स्मृति ईरानी के नेतृत्व में भाजपा ने आक्रामक तरीके से कांग्रेस और वामपंथी दलों पर हमला बोला. भाजपा इस मायने में भी सफल रही कि उसने अफजल की फांसी को पूरी बहस में जमकर भुनाया. 
  • विपक्ष की रणनीति सरकार को संसद के भीतर घेरने की बजाय संसद के बाहर घेरने की ज्यादा रही. इसलिए \r\nरोहित के समर्थन में निकले मार्च में भाजपा को छोड़ लगभग सभी दलोंं ने हिस्सा लिया.

रोहित वेमुला की खुदकुशी और देशद्रोह के मामले में जेएनयू छात्रसंघ कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी ने नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ उभर रहे असंतोष को एकजुट होने का मौका दिया. छात्रों की एकजुटता को मिले जबर्दस्त राजनीतिक समर्थन से सरकार के भीतर जो डर पैदा हुआ था असकी एक झलक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुछ दिन पहले ओडिशा में दिए गए भाषण में दिखी. यहां उन्होंने कहा, 'कुछ ताकतें सरकार को अस्थिर करने की ताक में है.' 

बजट सत्र के पहले दिन संसद के बाहर जेएनयू छात्रसंघ के नेतृत्व में दलित छात्र रोहित वेमुला को इंसाफ दिलाए जाने और 'विश्वविद्यालयों के भगवाकरण' की सरकार की कोशिशों के खिलाफ मार्च निकाला जिसे कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल का समर्थन मिला.

विपक्ष की रणनीति सरकार को संसद के बाहर घेरने की थी. इसलिए रोहित की याद में निकाले गए मार्च को न केवल कांग्रेस बल्कि आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल समेत अन्य छोटे बड़े दलों का समर्थन मिला. 

रोहित वेमुला और कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन ने विपक्ष को संसद के बाहर सरकार को घेरने का मौका दिया

लेकिन जब बारी सरकार को संसद के भीतर घेरने की आई तब विपक्ष की रणनीति मेंं सामंजस्य का अभाव दिखा. शुरुआत राज्यसभा से हुई. दलित नेता और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वह अभी नागपुर से इजाजत मिलने का इंतजार कर रही है. मायावती भाषण के दौरान बेहद आक्रामक रहीं. 

मायावती ने रोहित वेमुला की खुदकुशी का मामला उठाया और राज्यसभा चेयरमैन पीजे कुरियन के बार-बार मना करने के बाद भी बोलना जारी रखा. जबकि रोहित वेमुला पर चर्चा के लिए दोपहर बाद दो बजे का समय तय किया गया था. 

आक्रामक मायावती के भाषण के बीच 'आंबेडकर विरोधी यह सरकार' 'दलित विरोधी यह सरकार' के नारे गूंज रहे थे

मायावती ने कहा कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद संघ की विचारधारा को थोपे जा रहा है. मायावती आक्रामक थीं और उनके भाषण के बीच में राज्यसभा में 'आंबेडकर विरोधी यह सरकार' 'दलित विरोध यह सरकार' के नारे लगातर लगते रहे.

मायावती रोहित की आत्महत्या के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और हैदराबाद विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को बर्खास्त किए जाने के साथ वेमुला की खुदकुशी की जांच कर रहे आयोग में दलित सदस्यों को शामिल करने की मांग कर रही थीं. सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने भी उनका समर्थन करते हुए सरकार से तत्काल जवाब मांगा.

स्मृति ईरानी ने मायावती पर पलटवार करते हुए कहा, 'न केवल इस सदन में बल्कि पूरे देश में किसने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए बच्चे का इस्तेमाल किया, सर?'

संसद के भीतर कम से कम राज्यसभा में सरकार घिरी नजर आ रही थी. विपक्ष एकजुट दिखाई दे रहा था. यह बजट सत्र के पहले कामकाजी दिन का मंजर था जिससे आने वाले दिनों की कल्पना की जा सकती थी. 

बचाव में विपक्ष

दोपहर बाद स्थिति पूरी तरह से पलट गई. मायावती और स्मृति ईरानी के बीच राज्यसभा में हुई तीखी झड़प के बाद ही इसके संकेत दिख गए थे.

लोकसभा में रोहित-कन्हैया मामले में हुई बहस के लगभग अंत में बोलते हुए स्मृति ईरानी बेहद गुस्से में नजर आई. उन्होंने सदन के सामने तमाम दस्तावेजी सबूत भी रखे. ईरानी ने कहा, 'रोहित की खुदकुशी का मामला पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई दलित छात्रों ने खुदकुशी की है, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान.'

विपक्ष ने जिस रणनीति के तहत मायावती को आगे रखा था वह लोकसभा में ईरानी की आक्रामकता के कारण धराशायी होती नजर आई.

बाहर की बढ़त संसद में गंवाई

स्मृति ईरानी ने जिस आक्रामक अंदाज में कांग्रेस और वामपंथी दलों पर हमला बोला उसने बजट सत्र के दौरान विपक्षी दलों पर बीजेपी को मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने का मौका दे दिया है. आक्रामक भाषण के बीच ईरानी भावुक भी हुईं. 

कैंपसों का भगवाकरण किए जाने के आरोप से आहत ईरानी ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा, 'अभी भी कई यूनिवर्सिटीज में यूपीए सरकार की तरफ से नियुक्त किए गए वाइस चांसलर हैं. ऐसे में मैं यह चुनौती देती हूं कि अगर किसी ने यह साबित कर दिया कि मैंने युनिवर्सिटीज का भगवाकरण करने की कोशिश की है तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगी.'

ईरानी ने कहा कि रोहित वेमुला के शरीर को राजनीतिक टूल की तरह इस्तेमाल किया गया जबकि रोहित ने स्युसाइड लेटर में किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया था.

ईरानी ने कहा कि क्या आपने राहुल गांधी को किसी जगह पर दोबारा जाते हुए देखा है

उन्होंने बीजेपी को कटघरे से निकालकर वकील की भूमिका में ला खड़ा किया जबकि विपक्ष कमजोर रणनीति और एकजुटता के अभाव की वजह से वकील की भूमिका से नीचे घिसक कर कटघरे में जा खड़ा हुआ. 

सवाल विपक्ष के थे जिसका जवाब स्मृति ईरानी को देना था लेकिन बाद में स्थिति ऐसी बनी जिसमें उल्टा सवाल स्मृति ईरानी ही पूछने लगीं.

ईरानी ने स्कूली पाठ्यक्रम में चौथी-पांचवी कक्षा के छात्रों को हिंदू-मुसलमान, हिंदू-ईसाइयों के बीच धार्मिक दंगे के पाठ रखवाए जाने के औचित्य पर सवाल उठाया. इसका सारा ठीकरा उन्होंने अपने पूर्ववर्ती एचआरडी मंत्री कपिल सिब्बल और तीस्ता सीतलवाड़ के सिर फोड़ा.

संसद में फेल हुई कांग्रेस

कांग्रेस ने बाहर की बढ़त को संसद के भीतर गंवा दिया. जबकि रोहित वेमुला समेत अन्य छात्रों के खिलाफ  कार्रवाई किए जाने के मामले में स्मृति ईरानी और एक  अन्य केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय की चिट्ठी सार्वजनिक दायरे में है. इतना ही नहीं बंडारू दत्तात्रेय के खिलाफ रोहित की खुदकुशी के मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है.

दलित विरोधी एजेंडे को लेकर संघ और बीजेपी पर हमेशा हमला करने वाले राहुल गांधी संसद में चुप बैठे रहे

कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने कहा था कि सरकार उनसे डरती है इसलिए उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा. गांधी ने रोहित वेमुला के मार्च में अचानक पहुंचकर सबको चौंका दिया था और इससे यह विश्वास बना था कि वह संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएंगे.

संघ और बीजेपी के दलित विरोधी एजेंडे का अक्सर जिक्र करने वाले गांधी संसद में पूरी तरह चुप बैठे रहे. कांग्रेस की तरफ से बहस में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हिस्सा लिया. जबकि राहुल गांधी ने एक शब्द भी बोलना मुनासिब नहीं समझा.

आधा सच आधा गप

ईरानी ने भाषण के दौरान आंकड़ों का जमकर इस्तेमाल किया. हालांकि उन्होंने इस दौरान कई ऐसे बातें कहीं जिसे संसदीय परंपरा में जायज नहीं करार दिया जा सकता. उन्होंने कहा, 'कुछ लोग बतौर मंत्री मेरी निष्ठा पर सवाल उठा रहे हैं और मैं इससे आहत हूं.' उन्होंने कांग्रेस सांसद वी हनुमंत राव का हवाला देते हुए कहा कि राव ने उनसे पूछा था कि स्मृति ने किस हैसियत से हैदराबाद विश्वविद्यालय को चिट्ठी लिखी.

ईरानी ने इसका जवाब देते हुए उन सभी चिट्ठियों को संसद के सामने रखा जिसे राव ने ईरानी को लिखा था. राव ने चिट्ठी लिखकर हैदराबाद विश्वविद्यालय मामले में ईरानी से दखल दिए जाने की मांग की थी. ईरानी ने इसके अलावा केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी से लेकर कांग्रेस नेता शशि थरूर तक की चिट्ठी सदन में दिखाईं.

स्मृति ने उन तमाम सांसदों की चिट्ठियां सदन में लहराईं जो उनसे किसी तरह की रियायत के लिए लिखे गए थे. बात इस हद तक बढ़ गई कि अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को टोकना पड़ा- 'स्मृतिजी मंत्री रहते हुए यह सारे काम एक मंत्री को करने पड़ते हैं.'

संसदीय परंपरा में कोई भी जनप्रतिनिधि निश्चित तौर पर शिक्षा से जुड़े मामलों के समाधान के लिए शिक्षामंत्री को ही पत्र लिखेगा. ईरानी शायद यह साबित करने की कोशिश कर रही थी कि वह किसी दल या नेता के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखती हैं.

जेएनयू मामले में किसी तरह की नरमी बरते जाने की संभावनाओं को खारिज कर बीजेपी ने कार्यकर्ताओं को दिया साफ संदेश

रोहित वेमुला की जाति को लेकर हुई सियासत पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, 'मेरा नाम स्मृति ईरानी है. मेरी जाति क्या है बताओ.' यह कहते हुए ईरानी शायद यह भूल गई कि उनकी ही पार्टी ने बिहार चुनाव में जातीय आधार पर टिकट बांटे थे. दलितों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कर्पूरी ठाकुर जयंती मनाई और हाल ही में नरेंद्र मोदी वाराणसी के दौरे पर थे और इस दौरान वह रविदास मंदिर भी गए.

बैकफुट पर कांग्रेस

जेएनयू मामले में कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद हुए हंगामे को लेकर बीजेपी पर दबाव बनता दिख रहा था. हालांकि सरकार ने बजट सत्र से पहले यह साफ कर दिया था कि वह जेएनयू मामले में अपने रुख को आक्रामक बनाए रखेगी.

राहुल गांधी के जेएनयू में जाने के बाद बीजेपी ज्यादा आक्रामक नजर आई. ईरानी ने कहा, 'सत्ता तो इंदिरा गांधी ने भी खोई थी लेकिन उनके बेटों ने भारत की बर्बादी के नारों का समर्थन नहीं किया था.' बीजेपी ने जेएनयू मामले में किसी तरह की नरमी बरते जाने की संभावनाओं को खारिज कर पार्टी कार्यकर्ताओं को साफ संदेश दे दिया है. 

बीजेपी अपनी रणनीति के मुताबिक बढ़ती नजर आ रही है. वह एक तरह से विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में सफल रही है. मुद्दों को लेकर विपक्ष बंटा नजर आ रहा है. 

First published: 25 February 2016, 14:27 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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