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एचआरडी ने पूछा, क्या पांडिचेरी युनिवर्सिटी का इस्लामीकरण हो रहा है?

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 1 February 2016, 23:19 IST
QUICK PILL
  • पांडिचेरी विश्वविद्यालय को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पत्र लिखकर संस्थान के कथित इस्लामीकरण की जांच की मांग की है. मंत्रालय ने एक अल्पज्ञात संगठन की मांग पर ये पत्र लिखा गया है.
  • विश्वविद्यालय की जांच कमेटी ने मामले की जांच में पाया कि मुस्लिम अध्यापकों या छात्रों की संख्या में कोई इजाफा नहीं हुआ है.

रोहित वेमुला की आत्महत्या की मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास(एचआरडी) मंत्री स्मृति ईरानी एक और विवाद में घिरती नजर आ रही हैं. इस मामले में भी विवाद के केंद्र में उनके मंत्रालय की तरफ से एक विश्वविद्यालय को भेजी गई एक चिट्ठी है.

स्मृति ईरानी के मंत्रालय से पिछले साल सितंबर में पांडिचेरी विश्वविद्यालय को एक पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के कथित 'इस्लामीकरण' की जांच की मांग की गई है. इस पत्र के बारे में वेबपोर्टल न्यूजलांड्री ने हाल ही में विस्तृत खबर चलायी थी.

विश्वविद्यालय के दस्तावेजों के अनुसार मंत्रालय ने दिल्ली स्थित संगठन 'पैट्रियाट्स फ़ोरम' की शिकायत पर ये पत्र भेजा.

संगठन की शिकायत का आधार क्या था? ये पूछने पर संगठन के अध्यक्ष डीसी नाथ कहते हैं कि उन्होंने तो मंत्रालय को बस एक 'रिसर्च पेपर' फारवर्ड किया था. जिसके अनुसार 'छात्रों और अध्यापकों के चयन में स्पष्ट भेदभाव किया जा रहा है. जिनमें काफी तादाद में कश्मीरी मुसलमान शामिल हैं. उनमें से कुछ आतंकवादी भी है.'

मंत्रालय ने 'पैट्रियाट्स फ़ोरम' की शिकायत पर पांडिचेरी विश्वविद्यालय को कथित इस्लामीकरण की जांच के लिए पत्र भेजा

ये 'रिसर्च पेपर' बंगलुरु स्थित 'इंडियाफैक्टस' ने तैयार किया है. संस्था का दावा है कि इस रिसर्च पेपर में 'भारत के बारे में मीडिया की मुख्यधारा में आने वाली खबरों का प्रतिपक्ष' पेश किया गया है.

इस कथित रिसर्च पेपर में दिए गए कुछ आरोप निम्न हैं-

  • वाइस-चांसलर जेएके तरीन के कार्यकाल में पांडिचेरी विश्वविद्यालय का इस्लामीकरण हो गया. तरीन का कार्यकाल मार्च, 2007 से फरवरी 2013 तक था.
  • विश्वविद्यालय के कर्मचारी, छात्र और पूर्व छात्र इसकी तस्दीक करते हैं.
  • साल 2009 से 12 के बीच मुसलमान अध्यापकों की अभूतपूर्व संख्या में नियुक्ति हुई.
  • लगभग हर विभाग में मुसलमान अभ्यर्थी थे.
  • तरीन ने इसपर उठाए गए सारे एतराज नजरअंदाज कर दिए.

इंडियाफैक्ट्स का कोई भी प्रतिनिधि मामले पर टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हुआ. पैट्रियाट फ़ोरम ने दावा किया है कि तरीन ने विश्वविद्यालय में मस्जिद बनाने और हलाल मीट खाने की व्यवस्था करने की भी कोशिश की.

एचआरडी मंत्रालय के प्रवक्ता घनश्याम गोयल ने कहा, "मंत्रालय मामले की जांच कर रहा है और हम जल्द ही इसपर जवाब देंगे." मंत्रालय के प्रवक्ता ने जांच किस आधार पर की जा रही है और शिकायतकर्ता की प्रमाणिकता के बारे में कुछ भी बताने से मना कर दिया.

मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय ने जो कमेटी बनायी है उसके अनुसार, "विश्वद्यालय में कुल 22 मुसलमान अध्यापक हैं, जो कुल अध्यापकों की संख्या का 5.9 प्रतिशत हैं." कमेटी को ऐसा नहीं लगा कि विश्वविद्यालय का इस्लामीकरण हो रहा है.

साल 2011 की जनगणना के अनुसार पांडिचेरी में करीब छह प्रतिशत मुस्लिम हैं.

विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर वेंकट राघोतम इस कमेटी के अध्यक्ष थे. प्रोफेसर वेंकट ने कैच को बताया कि मुसलमानों या कश्मीरियों की संख्या में ऐसी कोई चिंताजनक बढ़ोत्तरी नहीं हुई है.

Pondicherry University letter

प्रोफेसर वेंकेट कहते हैं, "मुझे तो साफ लगता है कि किसी ने निहित स्वार्थों के चलते ये शिकायत की थी. हो सकता है कि मंत्रालय में ही कोई विश्वविद्यालय के कामकाज से नाखुश हो और फिर इस फोरम के माध्यम से शिकायत करवायी हो."

दक्षिण एशिया अध्ययन सेंटर के असिस्टेंट प्रोफेसर एसआई हुमायूं भी कहते हैं, "विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्रों की संख्या में कोई चिंताजनक बढ़ोतरी नहीं हुई है."

जांच कमेटी के अनुसार विश्वविद्यालय में 5.9 % मुस्लिम टीचर हैं. जबकि पांडिचेरी की आबादी में छह प्रतिशत मुस्लिम हैं

हुमायूं ने इस बात पर हैरान जतायी कि एक केंद्रीय मंत्रालय ने ऐसी शिकायत का संज्ञान लिया. उन्होंने इससे पहले केंद्र सरकार की तरफ से जारी उस सर्कुलर की तरफ दिलाया जिसमें कहा गया था सभी विश्वविद्यालय दो प्रतिशत कश्मीरी छात्रों का प्रवेश सुनिश्चित करें.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एसोसिएट प्रोफेसर मनीषा सेठी कहते हैं, "हैदराबाद विश्वविद्यालय मामले (पीएचडी छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या) में एक वीआईपी श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कार्रवाई की मांग की थी.  इस मामले में किसी गुमनाम टाइप संस्था ने मांग की है जो खुद को पैट्रियाट फोरम कहती है. इसलिए ये मामला ज्यादा संवेदनशील है. हैरत है कि मंत्रालय ने ऐसी किसी शिकायत का संज्ञान कैसे लिया?"

डेमोक्रेटिक टीचर्स फोरम की अध्यक्षा शाश्वति मजुमदार कहती हैं, "सरकार बहुत पेचीदा स्थिति में फंस गई है. उसे समझ नहीं आ रहा है कि वो क्या करे."

दिल्ली विश्वविद्यालय के टीचर संघ की अध्यक्षा नंदिता नारायण के शब्दों में, "मंत्रालय को कर्मचारियों को समझना होगा कि वो किसी राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं काम कर रहे हैं. उन्हें विवेक से काम लेना चाहिए."

पांडिचेरी विश्वविद्यालय में छात्र संगठन ने एमएचआरडी को पत्र लिखकर मामले पर अपना विरोध जताया है. संगठन ने एक बयान में कहा कि हम इस मामले के विरोध में जल्द प्रदर्शन करेंगे.

कुछ समय पहले ही छात्रों ने विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस-चांसलर चंद्र कृष्णमूर्ति के खिलाफ आंदोलन किया था. छात्रों का आरोप था कि कृष्णमूर्ति ने अकादमिक हेराफेरी की है. जिसके बाद उन्हें पद से हटना पड़ा था.

दूसरी तरफ इंडियाफैक्ट्स और पैट्रियाट फोरम ने अपनी वेबसाइटों से एचआरडी को भेजी गई शिकायतों के लिंक हटा दिए हैं.

First published: 1 February 2016, 23:19 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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