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सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ में गुजरात के आईपीएस अधिकारी पांडियन बरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:20 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

सीबीआई की एक विशेष अदालत ने सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत के मामले में गुजरात के आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन को बरी कर दिया.

इंटेलिजेंस ब्यूरो में तैनात आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन को सोहराबुद्दीन केस में अप्रैल, 2007 में गिरफ्तार किया गया था. सात साल जेल में रहने वाले पांडियन को मई, 2014 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी लेकिन उन्हें मुंबई छोड़ने की इजाजत नहीं मिली. इसके बाद गुजरात सरकार ने मुंबई स्थित गुजरात औद्योगिक विकास निगम पांडियन को संपर्क अधिकारी बनाया है.

विशेष सीबीआई न्यायाधीश एमबी गोसावी ने इस आधार पर पांडियन को आरोपमुक्त किया कि उनके खिलाफ (अभियोजन के लिए) मंजूरी नहीं है. इसलिए उनके खिलाफ अभियोजन नहीं चलाया जा सकता.

सीबीआई के अनुसार, पांडियान गुजरात एटीएस की उस टीम का हिस्सा थे, जिसने सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी को पकड़ा था. एजेंसी ने कहा कि उसने शुरुआती चरण से ही साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते 2002 से 2005 के बीच गुजरात के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगा है. इनमें से कई अधिकारियों को पुलिस व सीबीआई द्वारा गिरफ्तार भी किया गया था. हालांकि अब अधिकतर अधिकारियों को वापस सेवा में बहाल कर दिया गया है यानि उनका पुर्नवास हो गया है.

अदालत ने अब तक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के कारोबारी विम पाटनी, गुजरात पुलिस के पूर्व प्रमुख पीसी पांडेय, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गीता जौहरी, गुजरात पुलिस अधिकारी अभय चूडासामा, गुजरात पुलिस अधिकारी एनके अमीन, यशपाल चूडासामा और अजय पटेल (दोनों अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक में वरिष्ठ पदाधिकारी) को इस मामले में आरोपमुक्त किया है.

First published: 26 August 2016, 12:26 IST
 
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