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सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर : CBI के दो और गवाहों के मुकरने की पूरी कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2018, 12:57 IST

सोहराबुद्दीन शेख एवं तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई के दो और गवाह बीते 20 अप्रैल को अपने बयानों से मुकर गए. इन गवाहों ने शुक्रवार को अदालत में कहा कि उन्होंने कभी तुलसी प्रजापति से बात नहीं की. दोनों गवाहों ने इस बात से भी इनकार किया कि उनके बयान सीबीआई द्वारा कभी दर्ज किए गए थे. अब इन दोनों को मिलाकर इस मामले में अबतक मुकरने वाले गवाहों की संख्या बढ़कर 52 हो गई है. अदालत अब तक इस मामले में 76 गवाहों को पेश किया जा चुका है.

विशेष सीबीआई न्यायाधीश एस जे शर्मा के समक्ष रफीक हाफिज और फिरोज खान ने कहा कि उन्होंने सीबीआई को कोई बयान नहीं दिया था. जबकि जांच एजेंसी ने उनका बयान लेने का दावा किया था. सोहराबुद्दीन शेख के सहयोगी तुलसी प्रजापति दिसंबर 2005 से उदयपुर जेल में रहने बाद मुठभेड़ में मारे गए थे.

पहले क्या कहा था गवाहों में 

सीबीआई के मुताबिक जेल में रहने के दौरान प्रजापति ने अपने सह-कैदियों से कहा था कि नवंबर 2005 में उन्हें गुजरात के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अभय चुदासमा ने सोहराबुद्दीन के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगने के लिए धमकी दी थी. अप्रैल 2015 में सबूतों की कमी के के चलते इस केस से चुदासमा को बारी कर दिया गया था.

2011 में सीबीआई द्वारा दर्ज दो सह-कैदियों के बयान के अनुसार प्रजापति ने उनसे कहा कि वरिष्ठ गुजरात पुलिसकर्मियों, चुदासमा और दहाजी वंजारा (2017 में मामले में बरी) ने उन्हें बताया था कि उन्हें सोहराबुद्दीन को राजनीतिक दबाव में गिरफ्तार करना होगा. कहा जाता है कि सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसरबी का अपहरण कर लिया गया और नकली उन्हें मुठभेड़ में मार दिया गया.

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प्रजापति से पुलिस को क्यों था खतरा 

प्रजापति ने कैदियों को बताया वह अपहरण के लिए प्रत्यक्षदर्शी था इसलिए उन्हें पुलिसकर्मियों से खतरा था. शुक्रवार को अदालत के सामने पहले गवाह ने कहा कि ''तुलसीराम से सिर्फ हाय, हैलो होती थी, मेरा और तुलसी की इतनी बोल-चाल नही थी''. गवाह ने कहा ''दोनों उदयपुर में हामिद लाला नामक व्यक्ति के हत्या मामले में सह आरोपी थे और लगभग एक साल तक उसी जेल में रहे.

उन्हें अलग बैरकों में रखा गया था और इसलिए मुश्किल से एक-दूसरे से बात हुई. गवाह ने सोहराबुद्दीन को जानने से भी इंकार कर दिया. सीबीआई ने दावा किया था कि ये वो गवाह था जिसने सोहराबुद्दीन और कौसरबी के निकाह में मदद की थी.

इसी तरह दूसरे गवाह ने कहा कि वह सोहराबुद्दीन को नहीं जानते और उन्होंने तुलसी प्रजापति से सम्बंधित को बात नहीं की थी. इन दोनों को 2009 में हामिद लाला हत्या के मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था.

First published: 21 April 2018, 12:45 IST
 
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