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सिपाही, दलित और शहीद: कैसे राम किशन ग्रेवाल बीजेपी विरोध का प्रतीक बन गए

आकाश बिष्ट | Updated on: 4 November 2016, 16:24 IST
QUICK PILL
  • वन रैंक वन पेंशन स्कीम को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग करते हुए बुधवार को रिटायर्ड सूबेदार राम किशन ग्रेवाल ने ख़ुदकुशी कर ली थी. 
  • उनके इस जानलेवा कदम का विरोध करने पर विपक्ष के दिग्गज नेताओं को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा है जबकि ग्रेवाल को बीजेपी के विदेश राज्य मंत्री और हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने अपने बयानों से अपमानित किया है.   

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दो दिन के भीतर तीन बार हिरासत में लिए जा चुके हैं. वह सेना से रिटायर्ड सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल की ख़ुदकुशी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. साथ ही, शहीद के घरवालों को सांत्वना देने के इरादे से उनसे मिलने की कोशिश कर रहे थे. मगर दिल्ली पुलिस ने बुधवार को दो बार और गुरुवार को एक बार उन्हें हिरासत में ले लिया. घरवालों से मुलाक़ात और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने से उन्हें रोका गया.

ख़ुदकुशी करने वाले राम किशन ग्रेवाल क्या अनुसूचित जाति के थे? अभी तक सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह इसी कैटगरी में आते हैं. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने ग्रेवाल की हत्या पर स्व:संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस के कमिश्रर को नोटिस भेज दिया है. इसके अलावा आयोग के उपाध्यक्ष डा. राजकुमार वर्का ने पुलिस कमिश्रर से आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा है.

एससी/एसटी आयोग ने ग्रेवाल के बेटे को 'अवैध रूप से' हिरासत में लिए जाने पर दिल्ली पुलिस को तलब किया है.

आयोग के मुताबिक ग्रेवाल के पुत्र को हिरासत में लिया जाना 'अवैध' है. आयोग ने सफ़ाई मांगी है कि क्यों न दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की जाए. इसके अलावा ग्रेवाल के बेटे का बयान भी रिकॉर्ड किया है. आयोग के चेयरमैन पी एल पुनिया कहते हैं कि आयोग का विश्वास है कि ग्रेवाल के साथ जो अन्याय किया गया, उसका उन पर गहरा असर पड़ा और वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुए. 

ग्रेवाल और उनके परिवार को बेइज्जत किया गया. उनको हिरासत में लिया जाना भी अवैध है. भाजपा पर निशाना साधते हुए पुनिया कहते हैं कि भाजपा ने सैनिकों या दलितों अथवा अनूसूचित जाति के लोगों के साथ कुछ नहीं किया. उन्हें तो सिर्फ यह मालुम है कि सशस्त्र बलों के साथ राजनीति कैसे की जाती है. पुनिया आगे कहते हैं कि वे सेना को गम्भीरता से नहीं लेते, वरना वे वन रैंक वन पेंशन को पूरी तरह से लागू कर देते. वे सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति करते हैं और उसका श्रेय भी आरएसएस को दे देते हैं. 

हरियाणा में अपनी पंचायत के वह पहले सरपंच थे. ग्रेवाल को साल 2008 में निर्मल ग्राम पुरस्कार से नवाजा गया था. उन्होंने आठ साल पहले अपने गांव को शौच सम्बंधी गंदगी से मुक्त कर दिया था. वन रैंक वन पेंशन को लेकर उनका संघर्ष जारी रहा. उनका यह संघर्ष बुधवार को उस समय खत्म हो गया जब उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली.

उन्होंने अपने फ़ोन से अंतिम कॉल अपने बेटे को की थी. इस कॉल में अनुसूचित जाति और ओबीसी के साथ अन्याय किए जाने की बात सुनी जा सकती है. उन्हें यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि वह सिद्धान्तवादी व्यक्ति हैं और जवानों, अपने देश और अपनी मातृभूमि के लिए अपना बलिदान कर रहे हैं. 

उनकी मौत के एक दिन बाद देश से सबसे बड़े राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी में हरियाणा के उनके गांव में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. राहुल गांधी और अरविन्द केजरीवाल सेवानिवृत्त सैनिक को सम्मान देने भिवानी पहुंचे थे.

वीके सिंह ने ग्रेवाल का अपमान किया

जिस समय सेवानिवृत्त सैनिक की मौत पर उनका पूरा गांव शोक मना रहा था, उस समय भाजपा नेता और विदेश राज्य मंत्री जनरल वी के सिंह ग्रेवाल को कांग्रेस कायर्कर्ता बता रहे थे. जनरल वीके सिंह का बयान है कि वह कांग्रेस कार्यकर्ता थे. पार्टी के टिकट पर सरपंच का चुनाव लड़े. उन्होंने उनकी आत्महत्या को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

विदेश राज्यमंत्री ने यह सवाल भी खड़ा किया कि किसने उन्हें जहर लाकर दिया. उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्रेवाल को समस्या बैंक से थी न कि वन रैंक वन पेंशन से. वीके सिंह का दावा था कि उनको वन रैंक वन पेंशन को लेकर समस्य नहीं थी.

पूर्व जनरल सिंह ने यह भी कहा कि ग्रेवाल ने सल्फास की टेबलेट कैसे खरीदी. किसने लाकर उन्हें दी? उनका यह बयान उनके पहले के बयान के एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्त सैनिक के 'मानसिक संतुलन' पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि वन रैंक वन पेंशन को राजनीति से ऊपर होना चाहिए.

पिछले साल भी वी के सिंह को दलितों का अपमान करने वाले अपने एक बय़ान को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था जिसमें उन्होंने फरीदाबाद में ज़िंदा जलाए गए दो दलित बच्चों की तुलना कुत्तों से कर दी थी.

सिंह की टिप्पणी पर जवाबी पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता राज बब्बर ने कहा कि यह सिंह ही हैं जिनके मानसिक स्तर की जांच कराई जानी चाहिए. बब्बर ने यह भी कहा कि उन्होंने अन्य सैनिक परिवारों के सदस्यों का भी अपमान किया है. सिंह के नाम के साथ जनरल शब्द जुड़ा हुआ है. उनका बयान उनके नाम के अनुरूप नहीं है.

खट्टर भी वीके सिंह की राह पर

मगर मामला वीके सिंह पर ही नहीं थमा. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बयान दे दिया कि ग्रेवाल को शहीद नहीं माना जा सकता. उनके इस बय़ान की चारों तरफ सभी राजनितक दलों ने आलोचना की. खट्टर ने कहा था कि कोई सैनिक कभी आत्महत्या नहीं करेगा. शहीद वो लोग होते हैं जो सीमा की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवा देते हैं. वे आत्महत्या नहीं करते. ग्रेवाल की आत्महत्या का किसी को राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए.

इस बीच राहुल गांधी पुलिस हिरासत से निकलने के बाद कहा कि वह अपने को हिरासत में लिए जाने की शिकायत करना चाहते थे लेकिन पुलिस ने शिकायत नहीं ली. राहुल ने कहा कि अगर पुलिस एक सांसद की शिकायत नहीं ले सकती तो गरीब आदमी की शिकायत को वह कैसे लेते होगी. यह मोदीजी का न्यू इंडिया है.

शिवसेना राहुल और मनीष सिसौदिया के पक्ष में

राहुल को रोके जाने की घटना के बाद कांग्रेस को शिव सेना समेत अन्य पक्षों का भी समर्थन मिला. शिव सेना ने उन्हें हिरासत में लिए जाने को शर्मनाक बताया और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. शिव सेना के प्रवक्ता अरविन्द सांवत ने कहा कि राहुल गांधी और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को पीड़ित परिवार से मिलने के लिए जाने देने से नहीं रोकना चाहिए था.

सावंत का कहना है कि राहुल एक राष्ट्रीय़ पार्टी के उपाध्यक्ष हैं जबकि सिसौदिय़ा एक निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री है. दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

First published: 4 November 2016, 16:24 IST
 
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