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सर्जिकल स्ट्राइक: पाकिस्तान को छोड़िए, पर कुछ सवालों का उत्तर तो हर भारतीय को मिलना चाहिए

भारत भूषण | Updated on: 5 October 2016, 7:34 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़ )
QUICK PILL
  • पाकिस्तान के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी भारत के सर्जिकल स्ट्राइक वाले दावे पर सवाल खड़े कर रहा है. स्ट्काइक से जुड़े सवालों से सरकार की साख़ दांव पर है, लिहाजा सरकार को कुछ ऐसे सबूत सामने रखने चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया समेत देशवासी भी निश्चिंत हो सके.

आने वाले समय में भारत एलओसी के पार पाकिस्तानी कब्जे वाले हिस्से में की गई सर्जिकल स्ट्राइक के दावे को पुष्ट करने के लिए सबूत देने को मजबूर हो सकता है. इस अभियान में भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है.

कुछ अपुष्ट खबरों के अनुसार अभियान में शामिल जवानों ने दुश्मन को ठिकाने लगाने के लिए और घटना को रिकॉर्ड करने के लिए हेलमेट कैमरा पहने हुए थे, जैसे कि जीरो डार्क थर्टी नाम की फिल्म में दिखाया गया था. गृह मंत्री राजनाथ सिंह से जब इस सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत और इस वीडियो के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ‘जस्ट वेट एंड वाच’.

दरअसल पाकिस्तानी मीडिया भारत के दावे की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है, क्योंकि वह भी भारतीय मीडिया की ही तरह देशभक्ति की चरम भावना में बह रहा है. उसी तर्ज पर अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस अभियान को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

ऐसा शायद इसलिए भी है क्योंकि पाकिस्तानी सेना शनिवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया को एलओसी के उस इलाके का मुआयना करवाने ले गई थी, जहां भारतीय सेना ने कथित तौर पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की बात कही है. इस तरह पाक ने भारतीय दावे को खारिज करने की कोशिश की है.

सवाल पाकिस्तान के

पाकिस्तान के इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट गवर्नर असीम बाजवा ने भारतीय दावे पर सवाल करते हुए कहा कि ‘सारे शव कहां गए? उनके अंतिम संस्कार कहां किए गए? भारत क्यों नहीं ये शव दिखा रहा और जो नुकसान हुआ, वह दिख क्यों नहीं रहा?

एलओसी पर पीओके में तैनात पाक सेना की 23 वीं पैदल इकाई के कमांडर मेजर जनरल चिराग हैदर ने कहा, भारत के दावों में बिलकुल सच्चाई नहीं है. ‘ऐसा कैसे हो सकता है, हम पर ही हमला किया गया हो और हमे ही पता न हो?’

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने हालांकि माना कि पाक सेना के जनरलों के दावों की पुष्टि करना मुश्किल है, लेकिन साथ ही उन्होंने वहां कि स्थानीय आवाम् से बात करना भी मुनासिब नहीं समझा. वे भी भारतीय दावों के प्रति सशंकित ही नजर आए.

इस प्रकार, एएफपी ने कहा, ‘जनरल के दावों की पुष्टि करना संभव नहीं था. जबकि सेना की ट्रिप से अलग हो कर एएफपी के एक संवाददाता ने ग्रामीणों से बात की तो उन्हें भी भारतीय दावे के प्रति सशंकित ही पाया.’

एक स्वतंत्र रिपोर्ट में बीबीसी ने कहा, ‘भीम्बर, लीपा और नीलम घाटी क्षेत्र में कई प्रत्यक्षदर्शियों ने सीमापार गोलाबारी की बात कही लेकिन ऐसा किसी ने भी नहीं कहा कि किसी ने वहां भारतीय सेना द्वारा हवाई या जमीनी हमला होते देखा है.’

वाशिंगटन पोस्ट ने भी एलओसी पर पाकिस्तानी सेना द्वारा कराई गई यात्रा के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के भारतीय दावे पर सवाल उठाया है. न्यूयार्क टाइम्स और ज्यादा सशंकित है. उसने एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा, ‘सच कौन बता रहा है? जाहिर है इस बारे में कोई बाहरी व्यक्ति कुछ नहीं जानता. दोनो तरफ से उस इलाके में लोगों का आना-जाना मना है. दोनों देशों के अधिकारी रिपोर्टरों को थोड़ी-थोड़ी सच्चाई बता रहे हैं, जबकि खुल कर कोई सामने नहीं बोल रहा.

हालांकि पाकिस्तान मे रहने वाली रक्षा मामलों की विशेषज्ञ आयशा सिद्दीका ने स्वीकार किया है कि छोटा-मोटा सैन्य अभियान हुआ है. भारतीय वेबसाइट द वॉयर के लिए लिखे एक लेख में उन्होंने यह बात कही है.

'भारतीय डीजीएमओ द्वारा किए जा रहे बड़े-बड़े दावे के विपरीत सीमापार किया गया अभियान बेहद छोटे पैमाने पर किया गया और इसका प्रभाव भी जितना कहा जा रहा है उसके मुकाबले बेहद कम है.'

'खबर है कि भारतीय बल नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी हिस्से में अधिकतम 200 मीटर तक घुसे थे. उन्होंने दुधनियाल में पाकिस्तानी सेना के चेकपोस्ट से करीब 100 मीटर दूर स्थित लश्करे तोएबा के एक कैंप पर हमला किया. यह इतने छोटे और सीमित पैमाने का अभियान था कि पाकिस्तानी सेना ने आसानी से इसे क्रॉस बॉर्डर फायरिंग करार देकर खारिज कर दिया. 5-6 आतंकियों को मार कर इस अभियान ने कुछ सफलता तो हासिल की लेकिन इसे सर्जिकल स्ट्राइक कहना गुमराह करना होगा. इसके लिए बेहतर शब्द होगा 'टारगेटेड ऑपरेशन'. इसमें किसी भी तरह से मामले को बढ़ाने से परहेज करते हुए भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना के कैंप से दूरी बनाए रखी. खबरों के मुताबिक कैंप की तरफ सिर्फ एक ग्रेनेड फेंका गया था जिसमें सेना के 3-4 जवान घायल हो गए.'

नरेंद्र मोदी सरकार को इन दावों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा जिनके मुताबिक या तो सरकार ने कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं की या फिर उसने सिर्फ एक कैंप पर हमला किया जिसमें नाममात्र का नुकसान हुआ. यह सरकार की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा का विषय भी है जिसे बचाने की जिम्मेदारी उसके ऊपर है.

सरकार की साख दांव पर

भारत जैसे देश में जहां आम आदमी से लेकर हर कोई देशभक्त है, सरकार के सर्जिकल हमलों पर सवाल करने के लिए पहले खुद पर ‘राष्ट्र विरोधी’ होने का तमगा लगाना होगा.

हालांकि देश के सैन्य समुदाय से जुड़े लोग भी कुछ सवाल उठा रहे हैं और वे सोचने को मजबूर करते हैं. दरअसल सामने कोई नहीं आना चाहता. इनमें से कुछ सवाल तो रक्षा विशेषज्ञों के सोशल मीडिया समूह में उठाए जा रहे हैं. इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

सरकार का दावा है कि विशेष बलों ने पाक अधिकृत कश्मीर के भीतर 200 मीटर से 2 किलोमीटर के क्षेत्र में घुस कर हमले किए. विशेषज्ञों का दावा है कि एलओसी से 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में पाक चौकियां (फॉरवर्ड डिफेंडेड लोकलिटिज-एफडीएल) तैनात हैं. ऐसे में यह कैसे संभव है कि उसी जगह पर एफडीएल के साथ या उसके सामने आतंकी शिविर लगा लिए जाएं.

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी और भारतीय दोनों एफडीएल जमीन के अंदर और पूर्ण सुरक्षा के बीच हैं. ‘हमारे कमांडर कैसे पाक चौकियों को लांघते हुए भीतर घुसे होंगे और तीन घंटे के हमले को अंजाम दिया होगा. और तो और, लड़ाकू चॉपर अगर पाक चौकियों के इलाके में घुस भी गए तो बिना जवाबी गोलीबारी हुए वापस कैसे लौटे?

वे कहते हैं, क्या एक भी चौकी ने भारत के हमले का जवाब नहीं दिया? क्या एक भी बारूदी सुरंग नहीं फटी? (दरअसल, सेना का दावा है कि एक सुरंग विस्फोट में एक भारतीय जवान घायल हुआ) आगे उन्होंने यह भी कहा, कि एफडीएल पहाड़ी चोटियों पर हैं, पैराट्रूपर्स इन गहरी और घने जंगलों वाली घाटियों के बीच कैसे पहुंचे होंगे?

यह दावा कि जिन आतंकियों को पकड़ा, उन्हें कुछ मालूम नहीं था, यह भी सवालों के घेरे में है. बिना किसी संघर्ष के हथियारों से लदे आतंकियों को कैसे मार दिया गया? क्या उन्हें नशीली दवाएं दी गई थीं? या वे सो रहे थे? क्या उन्होंने चॉपर की आवाज नहीं सुनी. क्या सातों कैम्प में वे लोग बिना किसी संतरी के सो रहे थे?

ये सारे अनुमान इस बात की ओर संकेत करते हैं कि जहां भारतीय सेना को अक्सर तीन-चार आतंकियों को ही मार गिराने में कई घंटे या दिन लग जाते हैं, वह भी दिन दहाड़े रॉकेट लांचरों, ऑटोमेटिक ग्रेनेड लॉंन्चर, लाइट मशीनगन और काफी संख्या में सैनिकों की मौजूदगी के बावजूद. ऐसे में अगर यह क्षेेत्र घने जंगलों वाला भी माना जा रहा है तो सैन्य अभियान में कई दिन लगने चाहिए थे. हर ऐसे अभियान में जवान शहीद होते हैं या घायल होते हैं.

सबकुछ इतना आसान है क्या?

पठानकोट में भारतीय सुरक्षा बलों ने एयरफोर्स स्टेशन के परिसर में आतंकियों को मार गिराने में चार दिन लगाए थे और अब तक उस हमले में शामिल आतंकियों की संख्या को लेकर संशय बना हुआ है.

अगर अतीत में भी ऐसे सैन्य अभियान हुए हैं तो, वे पूछते हैं ‘हमारे सुरक्षा बलों ने सब कुछ इतनी कुशलता से कैसे कर लिए? आधी रात को वे सबको मार देते हैं, आतंकी कैम्प ध्वस्त कर देते हैं, शव गिनते हैं, आतंकियों व पाक सैनिकों के शव अलग-अलग कर देते हैं और चार घंटे में ही बिना एक भी खरोंच लगे लौट आते हैं?

रात में हथियारों से लैस टुकड़ी पहाड़ी दर्रे में केवल एक किलोमीटर से थोड़ा ज्यादा दूरी तक ही जा सकती है

उन्होंने बताया कि रात में हथियारों से पूरी तरह लैस सेना की एक टुकड़ी पहाड़ी दर्रे में केवल एक किलोमीटर से थोड़ा ज्यादा दूरी तक ही चल सकती है, जो कि ऐसे सर्जिकल स्ट्राइक में संभव नहीं है. इस बार ऐसा कैसे हो गया कि बुलेट प्रुफ जैकेटों में हथियारो से लैस ये जवान रेंगते हुए, बिल्कुल चुपचाप आतंकी शिविरों तक पहुंच गए, बारूदी सुरंगों से बचते हुए बेहद कम ऑक्सीजन वाली हालत में ऊंचाई तक चढ़े, और दस में से दस अंक लेकर चार घंटां में वापस आ गए?

साथ ही, उन्होंने पूछा यह कैसे संभव है कि आधे दर्जन से भी ज्यादा आतंकी शिविरों और आतंकियों के बारे में पुख्ता खुफिया जानकारी थी, जैसी पहले कभी नहीं थी? अगर एलओसी के नजदीक ऐसी आतंकी गतिविधियों के बारे में पुख्ता जानकारी पहले मिल गई होती तो उरी हमला नाकाम किया जा सकता था.

दावों के बारे में उन्होंने सवाल किया ‘इतने सालों से पीओके में पाक सेना के समर्थित लॉन्च पैड का इस्तेमाल हो रहा है. ‘अगर हमारी सेना के पास पुख्ता जानकारी थी तो हमने पहले क्यों नहीं कार्रवाई की?, उरी हमला क्यों हुआ?

सरकार दावा कर रही है कि उसके पास उरी हमले के जवाब में एलओसी के पास किए गए सैन्य हमले के सबूत हैं तो उसे ये सबूत सार्वजनिक करने चाहिए ताकि न तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया और न ही हमारे अपने सामरिक विशेषज्ञ इन हमलों की सच्चाई पर सवाल उठाएं, जहां तक पाक के दावों का सवाल है, उसे नजरंदाज किया जा सकता है.

First published: 5 October 2016, 7:34 IST
 
भारत भूषण @Bharatitis

Editor of Catch News, Bharat has been a hack for 25 years. He has been the founding Editor of Mail Today, Executive Editor of the Hindustan Times, Editor of The Telegraph in Delhi, Editor of the Express News Service, Washington Correspondent of the Indian Express and an Assistant Editor with The Times of India.

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