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राहुल का अयोध्या गमन और कुछ कहानियां

अतुल चंद्रा | Updated on: 10 September 2016, 8:13 IST
(एएनआई)

वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस कांड के 24 साल बाद शुक्रवार को अयोध्या जाने वाले राहुल गांधी, नेहरू-गांधी परिवार के पहले वंशज हो गए हैं. अपनी 2,500 किमी लम्बी देवरिया-दिल्ली किसान यात्रा के चौथे दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी मिंदर में दर्शन-पूजन किया.

हालांकि राहुल गांधी रामलला मंदिर-बाबरी मस्जिद की ओऱ नहीं गए जो यहां से मुश्किल से कुछ सौ मीटर दूर है. सम्भवतः अपनी पार्टी की नरम हिन्दुत्व नीति उनके ध्यान में रही हो जिसका उनकी पार्टी के हार्ड-लाइनर भाजपा के संदर्भ में करती रही है.

उनकी अयोध्या यात्रा उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को देखते हुए ब्राह्मण केन्द्रित चुनावी नीति को ध्यान में रखकर की गई है. ठीक इसी समय राहुल गांधी ने मुसलमानों को भी धर्मनिरपेक्षता का संदेश देने की कोशिश की. गांधी परिवार के वंशज ने इस विवादित मुद्दे पर कोई बयान भी नहीं दिया और दर्शन करने के तुरन्त बाद रोड शो के लिए फैजाबाद निकल गए.

रिकॉर्ड के लिए, राहुल ने जब मंदिर का दर्शन किया उस समय उनके आसपास कोई किसान नहीं था और फैजाबाद के दो कस्बों में रोड शो में भीड़ में हाथ हिलाने वालों की संख्या ज्यादा थी बनस्पित किसानों का मांग पत्र लेने वालों की.

हनुमान गढ़ी मंदिर के महन्त ज्ञान दास ने कहा कि राहुल मेरा आशीर्वाद लेने आए थे. उन्होंने कांग्रेस नेता को कल्याण होने का आशीर्वाद दिया और यह भी कहा कि राम मंदिर निर्माण के नाम पर भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद राजनीति कर रही हैं.

छब्बीस साल पहले, 1990 में राजीव गांधी ने भी सद्भभावना यात्रा निकाली थी. उनका हनुमान गढ़ी भी जाने का कार्यक्रम

ज्ञान दास का विश्व हिन्दू परिषद से मोह भंग हो गया है और वे अब समाजपार्टी के निकट माने जाते हैं. उनका मंदिर में दर्शन करना राजनीतिक रूप से संतुलित रहे, इसलिए उनका अम्बेडकरनगर ज़िले में किछौछा शरीफ की एक दरगाह में भी जाने का कार्यक्रम है.

छब्बीस साल पहले, 1990 में राजीव गांधी ने भी सद्भभावना यात्रा निकाली थी. उनका हनुमान गढ़ी भी जाने का कार्यक्रम था. लेकिन वह वहां नहीं जा सके थे. हालांकि वह फैजाबाद गए थे. राजीव की अगले ही साल 1991 में हत्या कर दी गई.

सोनिया गांधी भी चुनाव के दौरान पार्टी के चुनावी अभियानों के लिए कई बार फैजाबाद जा चुकी हैं लेकिन वह धार्मिक उन्माद में कारसेवकों द्वारा ढांचा ढहा दिए जाने के बाद से अयोध्या नहीं गईं हैं. यदि सूत्रों पर विश्वास किया जाए तो अपने परिवार से इंदिरा गांधी ही एकमात्र ऐसी व्यक्ति हैं जिन्होंने इस धार्मिक शहर की यात्रा की है.

1960 में वह विकास परियोजना के सिलसिले में अयोध्या गईं थीं. 1985 में मंदिर का ताला खुलने के बाद से, जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, तब से लेकर बाबरी मस्जिद ढहाए जाने (उस दौरान केन्द्र में नरसिंहा राव गठबंधन सरकार के मुखिया थे) के समय तक कांग्रेस उप्र में अपना आधार खोती गई है और मुसलमानों का इस सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी से भरोसा घटता गया है.

राजीव गांधी द्वारा विवादित परिसर का ताला खुलवाए जाने के निर्णय को हिन्दुओं को मनाने का प्रयास माना जाता है क्योंकि शाहबानो मामलो में उन्हें मुसलमानों के सामने झुकने का आरोप झेलना पड़ा था. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पार्टी का राज्य में जनाधार खत्म हो गया और चुनावी लाभ पहले भाजपा और बाद में समाजवादी पार्टी को मिला.

कांग्रेस द्वारा पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि के ऊपर हिंदूवादी लाइन पकड़ने का यह प्रयास क्या रंग लाएगा

समाजवादी पार्टी का उभार मुसलमानों की एकमात्र हितैषी पार्टी होने और समुदाय के हितों को सुरक्षित रखने के कारण ही हुआ. हिन्दुओं द्वारा कांग्रेस को अस्वीकार कर देने से भाजपा को इसका लाभ मिला जबकि मुसलमान बाबरी कांड के बाद से लगभग एक चौथाई शताब्दी से राज्य में अपने भविष्य के पुनरुत्थान के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

बहरहाल, कांग्रेस नेता द्वारा पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि के ऊपर हिंदूवादी लाइन पकड़ने का यह प्रयास साथ में मुसलमानों को भी बनाए रखने की कोशिश क्या रंग लाएगी. मुसलमान इन दिनों बहुजन समाज पार्टी को भी एक विकल्प के रूप में देख रहे हैं?

कुछ भी हो, इस तरह की संतुलनवादी शैली राहुल के पिता के भी काम नहीं आई थी. शाहबानो मामले में उनके रुख के कारण हिन्दू नाराज हो गए थे और राम मंदिर का ताला खुलवाए जाने से मुसलमान रुष्ट हो गए.

मौजूदा परिस्थितियों में मतदाताओं का भरोसा जीत पाना बहुत मुश्किल होगा. एक तरफ बाहुबाल का प्रदर्शन कर रही भाजपा है तो दूसरी तरफ शातिर राजनेता मुलायम सिंह हैं. यहां मायावती का उल्लेख करने की जरूरत नहीं जो दलित वोटों के सिंहासन पर बैठी हुई हैं.

First published: 10 September 2016, 8:13 IST
 
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