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मामूली छात्र बनाम ताकतवार भारत सरकार

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 14 February 2016, 8:51 IST

क्या यह बराबरी की लड़ाई है? छात्रों का विरोध प्रदर्शन ताकतवर भारतीय गणराज्य के लिए इतना बड़ा खतरा है कि भारत सरकार का लगभगग समूचा केंद्रीय मंत्रिमंडल इस मामले में उठ खड़ा हुआ है? क्या कुछ छात्रों की नारेबाजी इतना बड़ा मसला है कि सवा अरब जनता का प्रतिनिधि केंद्रीय गृहमंत्री सहित पूरी भारत सरकार उसके खिलाफ कमर बांध कर उठ खड़ी हुई है?

क्या महज हजार एकड़ में फैले एक शिक्षण संस्थान का अंदरूनी मामला, सवा तीन मिलियन वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्रफल वाले देश की सरकार के लिए खतरे का सबब बन गई है? एक नहीं, दो नहीं करीब पांच केंद्रीय मंत्री एक विश्वविद्यालय के कुछेक छात्रों के खिलाफ उठ खड़े हुए हैं यह मानकर कि वे भारतीय गणराज्य के लिए खतरा हैं? क्या सरकार से अलग राय रखने वाले सारे लोग देशद्रोही हैं? चार दिनों तक देश के संवेदनशील एयरबेस पर हमला चलता रहता है, सरकार, खुफिया तंत्र को भनक तक नहीं लगती, और कुछ अनुभवहीन छात्रों के खिलाफ हर मिनट, हर घंटे पर सरकार मंत्री बयान और ट्वीट जारी करने में लगे हुए हैं.

कुछ दिनों बाद ही सरकार को बजट पेश करना है लेकिन सरकार का ध्यान बजट सत्र से ज्यादा जेएनयू पर हैं

देशविरोधी नारे पर बहस हो सकती है, उसके लिए सजा हो सकती है लेकिन क्या कुछ अनुभवहीन छात्रों द्वारा लगाया गया नारा युनिवर्सिटी (जेएनयू) के स्तर पर नहीं सुलझाया जा सकता था? क्या यह देशद्रोह जितना बड़ा अपराध है?

जब से केंद्र में एनडीए सरकार बनी है बीजेपी पर संस्थानों के स्वायत्तता पर अतिक्रमण का आरोप लगता रहा है. एफटीआईआई, हैदराबाद युनिवर्सिटी, आईआईएमसी और अब कन्हैया कुमार का मामला, यानि छात्रों के मसले को यह सरकार लगातार सुलझाने में असफल रही है.

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मोदी सरकार बनने के दो महीने के भीतर दिल्ली में सी-सैट के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर बुरी तरीके से लाठीचार्ज किया गया था.

पिछले साल एफटीआईआई में गजेंद्र चौहान की नियुक्ति का मामला हो या हैदराबाद युनिवर्सिटी में रोहित वेमुला के आत्महत्या का मसला, सरकार का रवैया समाधान की जगह टकराव का रहा है. रोहित वेमुला के मामले में केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय की भूमिका संदिग्ध रही. उन पर हैदराबाद पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज किया है.

पिछले दो महीने से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नॉन नेट फेलोशिप बंद करने का विरोध कर रहे छात्रों की मांगें तो नहीं मांगी गई लेकिन उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग जरूर किया. अाज भी छात्र यूजीसी के सामने 'ऑक्युपाइ यूजीसी' के बैनर तले शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं.

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जेएनयू में लग रहे नारों का समर्थन नहीं किया जा सकता लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप से पहले संस्थान को अपनी कार्रवाई करने देना चाहिए था.

जेएनयू के अंदर चल रही पुलिसिया कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए जेएनयू शिक्षक संघ ने उसे जरूरत से ज्यादा बताया है. शिक्षक संघ ने कहा है कि इससे यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरा है.

जब से केंद्र में एनडीए सरकार बनी है बीजेपी पर संस्थानों की स्वायत्तता पर अतिक्रमण का आरोप लगता रहा है

अभी तक ऐसा कोई भी वीडियो सामने नहीं आया है जिसमें जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार भारत विरोधी नारा लगा रहे हैं. बावजूद इसके उन पर राष्ट्रदोह का केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल कन्हैया न्यायिक हिरासत में है.

अगर दिल्ली पुलिस ने वीडियो के आधार पर कन्हैया को गिरफ्तार किया है तो पहले उसकी सत्यता क्यों नहीं जांची गई? राजनीति में अक्सर नेताओं के स्टिंग और ऑडियो टेप सामने आते रहते हैं लेकिन कभी भी उनकी गिरफ्तारी नहीं होती.

शनिवार को सोशल मीडिया में दूसरा वीडियो वायरल हुआ है जिसमें नारे लगाने वाले छात्र को एबीवीपी का कार्यकर्ता बताया जा रहा है. तो क्या अब दिल्ली पुलिस इस वीडियो के आधार पर उस लड़के को गिरफ्तार करेगी? या उससे पहले वीडियो की प्रमाणिकता की जांच करेगी.

कुछ दिनों बाद ही सरकार को बजट पेश करना है लेकिन सरकार का ध्यान बजट सत्र से ज्यादा जेएनयू पर हैं. सरकार के बयानों से ऐसा लग रहा है कि जिस युनिवर्सिटी से पढ़े कई छात्र जो सांसद तक बने अब वह जगह 'राष्ट्रविरोधियों' का अड्डा बन गई है.

राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री

''यदि कोई भारत-विरोधी नारे लगाता है, देश की एकता एवं अखंडता पर सवालिया निशान लगाता है तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.''

शुक्रवार को राजनाथ सिंह के बयान के कुछ घंटों बाद ही 'अतिसक्रिय' हुई दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को  गिरफ्तार कर लिया.

शनिवार को अपने बयान को लगभग दोहराते हुए राजनाथ ने कहा कि छात्रों को परेशान करने का सवाल ही नहीं है लेकिन दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

स्मृति ईरानी, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री

''मैं यह कहना चाहती हूं कि आज देवी सरस्वती की वंदना का दिन है. मां सरस्वती हर परिवार को यह आशीर्वाद देती है कि उनके कंठ से जो स्वर निकले वो राष्ट्र को और उन्नत करने के लिए निकलें, उसे और सशक्त करने के लिए निकलें. भारत मां का जयगान हो जयघोष हो. भारत मां का अपमान कभी सहन नहीं किया जा सकता.''

अनंत कुमार, कैबिनेट मंत्री

''जेएनयू में विरोध राष्ट्र विरोधी है. देश के साथ विश्वासघात करने वालों के साथ कड़ाई से निपटा जाना चाहिए. जिस किसी ने भी अफजल गुरु और अन्य आतंकवादियों के पक्ष में नारे लगाए हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.''

किरन रिजिजू, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री

''ये कोई छोटे बच्चे नहीं है, जिसे यह नहीं पता है कि वह क्या कर रहे हैं. बोलने की आजादी के नाम पर आप राष्ट्र को गाली नहीं दे सकते हैं. यह दुखद घटना है. हम जेएनयू को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने देंगे.''

कैलाश विजयवर्गीय, बीजेपी महासचिव

''क्या भारत में रहकर पाकिस्तान जिंदाबाद करने वाले देशद्रोहियों की जबान नहीं काट देनी चाहिए?''

महेश गिरी, बीजेपी सांसद

''जेएनयू के छात्र राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल हैं.''

पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद महेश गिरी और एबीवीपी की शिकायतों के बाद दिल्ली पुलिस ने 9 फरवरी को हुए विवादित कार्यक्रम के सिलसिले में देशद्रोह का मामला दर्ज किया है. इस मसले पर महेश गिरी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने मंत्रालय से अनुरोध किया था कि दिल्ली पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करे. इसी एफआईआर के आधार पर जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया है.

First published: 14 February 2016, 8:51 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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