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मुरथल में कुछ भयावह हुआ है, जो कभी सामने नहीं आएगा

आनंद कोचुकुड़ी | Updated on: 1 March 2016, 22:07 IST
QUICK PILL
  • हरियाणा के मुरथल में 23 फरवरी को जाट उपद्रवियों द्वारा कुछ महिलाओं की बलात्कार की खबर आई. पुलिस ने पहले मामले से पूरी तरह इनकार किया.
  • हाई कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद एसआईटी का गठन किया गया. लेकिन मामले के चश्मदीद एक एक कर पलट गए. इस बात की अब कम उम्मीद है कि कोई गवाह सामने आएगा.

रविवार को एनजीओ से जुड़े एक मित्र के साथ मुरथल गया. मैं देखना चाहता था कि 23 फरवरी को नेशनल हाईवे (एनएच)-1 पर क्या हुुआ था.

ये ख़बर सबसे पहले द ट्रिब्यून अखबार में आई कि उस दिन जाट उपद्रवियों ने कुछ महिलाओं के संग बलात्कार किया था. अखबार की रिपोर्ट में चार चश्मदीदों के बयान थे. जो बाद में अपने बयान से पलट गए.

आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने भी चार चश्मदीदों का हवाला दिया. हालांकि उन्होंने 'बलात्कार' जैसे शब्द का प्रयोग नहीं किया.

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उसके बाद कुछ ट्र्क ड्राइवरों ने टीवी वालों को बयान दिया कि उन्होंने हाईवे पर महिलाओं को रोके जाते देखा. उनके अनुसार महिलाओं को कपडे फाड़े गए और उन्हें करीबी खेतों में ले जाया गया. इन ड्राइवरों की पहचान सुखविंदर सिंह, यादवेंद्र सिंह और निरंजन सिंह के रूप में हुई.

हाईवे के किनारे स्थित अमरीक सुखदेव ढाबे पर मीडिया की भीड़ लगी हुई थी. मीडिया को खेतों और झाड़ियों में महिलाओं के अंतःवस्त्र और दूसरे फटे कपड़े मिले हैं.

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ढाबे के मालिक सोनीपत के रहने वाले हैं. पहले तो उन्होंने मीडिया से बात की लेकिन बाद में उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया. संभव है कि उनपर स्थानीय नागरिकों को दबाव हो.

जब हम वहां पहुंचे तो हाईवे पर जली हुई गाडियां नहीं थीं. उन्हें पुलिस थाने ले जाया जा चुका था. मीडिया ने जहां डेरा डाला था उसके करीब ही सेना का एक टेंट लगा हुआ था.

कुछ क्रोधित गांववाले मीडियाकर्मियों से किसी बात पर बहस कर रहे थे. गांववालों का कहना था कि मीडिया उन्हें और उनके इलाके को बदनाम कर रहा है.

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तस्वीर- आनंद कोचुकुडी


हमारा पहला पड़ाव हसनपुर गांव था. हमने ज्यादा से ज्यादा लोगों से बातचीत करने की कोशिश की. हमारे अनुमान के अनुरूप ही गांववाले हमारे साथ सहयोग नहीं कर रहे थे. लोग लगभग एक ढर्रे पर हमारे सवालों का जवाब दे रहे थे.

लौटते वक्त हमने खेतों और झाड़ियों का भी मुआयना किया जहां से महिलाओं के अंतःवस्त्र मिले थे. वहां हमें फ्रांस की एक महिला पत्रकार भी मिलीं जो कुछ महिलाओं के साथ इलाके का दौरा कर रही थीं. वो एक प्रसिद्ध अंग्रेजी पत्रिका के लिए रिपोर्ट करने आई थीं.

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हमारा अगला पड़ाव कुरद-इब्राहिमपुर गांव था. वहां भी हमारा स्वागत नहीं हुआ. एक पेड़ के नीचे ताश खेल रहे लोग हमसे पूछताछ करने लगे कि हम कहां से और क्यों आए हैं. जो भी मिला हमने उससे बात की लेकिन जल्द ही हमें अहसास हो गया कि लोगों की बेरुखी बढ़ती जा रही है.

पिछले गांव की तरह यहां भी लोगों के जवाब रटे-रटाए थे. हम गांव से निकल कर सड़क के किनारे स्थित ढाबों में काम करने वालों से बातचीत करने के लिए निकले. इस इलाके में करीब एक किलोमीटर तक सड़क किनारे ढाबे ही ढाबे होंगे.

यहां भी लोग हमसे बातचीत करने में इच्छुक नहीं थे. कुछ ने साफ कहा कि वो बस अपने काम-धंधे पर ध्यान देते हैं और वो अपनी रोजी-रोटी बंद नहीं कराना चाहते.

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तस्वीर- आनंद कोचुकुडी


उसके बाद हम पुलिस थाने गए. हमने थाने के पिछवाड़े रखी जली हुई कारों की तस्वीरें लीं. जब हमने घटनास्थल से बरामद कपड़ों के बारे मेें पूछा तो हमें जवाब मिला कि उन्हें एसआईटी ने जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है.

मीडिया रिपोर्ट का हाई कोर्ट द्वारा स्वतःसंज्ञान लेने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है. इस जांच टीम में डीआईजी राजश्री सिंह, डीएसपी भारती डबास और सुरिंदर कौल शामिल हैं.

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हमें बताया गया कि एसआईटी ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ट्रक ड्राइवरों से पूछताछ की थी. हमें लगा कि ये मामला धीरे-धीरे ढंडे बस्ते में चला जाएगा क्योंकि कोई चश्मदीद गवाह सामने नहीं आएगा.

थाने के बाद हम इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट गए. उपद्रवियों ने इस संस्थान पर भी हमला किया था.

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तस्वीर- आनंद कोचुकुडी


मुख्य इमारत के सामने का एक हिस्सा काला दिख रहा था. वहां तोडफोड़ भी हुई थी. हमने वहां भी जली हुई कुछ गाड़ियां देखीं. हमें कैंपस में रिकॉर्डिंग करने के लिए मना कर दिया गया. यहां अभी मोबाइल इंटरनेट सेवा के शुरू नहीं हुई है. पूरे दिन मामले में कोई नया पक्ष सामने नहीं आया.

सुखदेव ढाबे पर मौजूद मीडियावालों ने बताया कि डीआईजी राजश्री सिंह दिल्ली के निकल पड़ी हैं. वहां एक पीड़िता पुलिस को बयान देने के लिए सामने आई है.

डीआईजी ने उसी शाम मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि इस पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास हैं. खबरों के अनुसार उस पीड़िता ने जिन लोगों का नाम लिया उनमें उसका देवर भी शामिल था.

जब हम वापस लौट रहे थे तो हमें ये यकीन हो चला था कि 22-23 फरवरी की रात को वहां जरूर कुछ भयावह घटा था. जो शायद कभी पूरी तरह लोगों के सामने न आए.

First published: 1 March 2016, 22:07 IST
 
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