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पेट्रोल पंप पर काम करने वाले का बेटा सिर्फ 22 साल की उम्र में बना IAS, पिता ने किया ये बलिदान

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 April 2019, 8:09 IST

यूपीएससी का रिजल्ट आ चुका है. देश के 759 उम्मीदवारों के घरों में खुशियों की लहर है.  इस एग्जाम में जयपुर के कनिष्क कटारिया ने टॉप किया है. इसी के साथ कई ऐसे उम्मीदवार है, जिन्होंने लंबे संघर्ष के बाद ये सफलता हासिल  की है. इन्ही में से एक हैं प्रदीप सिंह, जिसके परिवार के संघर्ष ने इनकों ये मुकाम हासिल कराई.

प्रदीप सिंह के पिता पेट्रोल पंप पर काम करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं. 22 प्रदीप के प्रदीप ने पहले प्रयास में यूपीएससी के एग्जाम को क्रैक किया है. जो काफी काबिले-तारीफ है. प्रदीप के साथ-साथ उनके परिवार ने भी उनके इस संघर्ष में उनका काफी साथ दिया. चलिए जानते हैं इनके बारे में कुछ और भी बातें- 

22 साल के प्रदीप ने पहले ही प्रयास में ये सफलता हासिल की हैं. इन्होंने यूपीएससी के पहले प्रयास में ही 93वीं रैंक हासिल की है.  अपने इस सफलता के बारे में प्रदीप कहते हैं, जितना मैंने अपने जीवन में संघर्ष किया है, उससे कहीं ज्यादा मेरे माता-पिता ने मेरे लिए संघर्ष किया है.

UPSC में सफलता हासिल करना प्रदीप का सपना था, ऐसे में वो जून 2017 में जून दिल्ली आए और यहां की एक कोचिंग क्लास ज्वॉइन की.

प्रदीप ने अपने माता पिता के बारे में बताया कि आर्थिक परेशानियां होने के बावजूद मेरे माता पिता ने कभी भी पढ़ाई में बाधा नहीं आने दिया.  उन्होंने एक मीडिया चैनल इंटरव्यू में बताया कि कोचिंग की फीस करीब 1.5 लाख रुपये और घर की आर्थिक परिस्थिति ठीक नहीं थी. ऐसे में घर का खर्च और मेरी कोचिंग की फीस देने के लिए मेरे पिता ने अपना घर बेच दिया.

न्यूज एंजेंसी ANI को प्रदीप के पिता ने कहा,  "मैं इंदौर में एक पेट्रोल पंप पर काम करता हूं. मैं हमेशा अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहता था ताकि वे जीवन में अच्छा कर सकें. प्रदीप ने बताया कि वह यूपीएससी की परीक्षा देना चाहते हैं, मेरे पास पैसे की कमी थी. ऐसे में मैंने अपने बेटे की पढ़ाई की खातिर अपना घर बेच दिया. उस दौरान मेरे परिवार को काफी संघर्ष करना पड़ा था. लेकिन आज मैं बेटे की सफलता से खुश हूं."

इस बारे में प्रदीप ने बताया कि मेरे पिताजी की जीवन भर की संपत्ति उनका इंदौर में स्थित मकान था, जिसे उन्होंने मेरी पढ़ाई के वजह से बेच दिया. उन्होने एक बार भी ये नहीं सोचा कि ऐसा क्यों कर रहा हूं. औऱ जब मुझे इस बात का पता लगा, तो मेरी पढ़ाई करने का जज्बा और ज्यादा बढ़ गया.

प्रदीप ने बताया कि मेरे पिता और भाई ने मेरी पढ़ाई में काफी मदद की. मेरे भाई ने मेरी पढ़ाई का खास ख्याल रखा. प्रदीप ने बताया कि मेरे पिता ने मेरी पढ़ाई के लिए इंदौर के घर के बाद बिहार के गोपालगंज की जमीन भी बेच दी.

बता दें कि प्रदीप सिंह बिहार के गोपालगंज के हैं, जिनकी फैमिली मध्यप्रदेश के इंदौर में शिफ्ट हो गई है.

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First published: 7 April 2019, 8:09 IST
 
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