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तमिलनाडु चुनाव: जोश जगाने में असफल रहीं सोनिया गांधी

एस मुरारी | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST

एआईडीएमके सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने उस वक्त लोगों की मदद नहीं की जब उन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी. उन्होंने कहा कि चेन्नई और उसके आसपास के इलाकों में आई बाढ़ के वक्त सरकार नदारद थी.

तमिलनाडु की एक चुनावी रैली में सोनिया गांधी ने एआईडीएमके सरकार को यूपीए सरकार द्वारा पारित भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन कर बिना सहमति और मुआवजे के किसानों की ज़मीन हड़पने के लिए भी आड़े हाथों लिया.

डीएमके प्रमुख करूणानिधि के साथ रैली को संबोधित करते हुए सोनिया ने जयललिता सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उसने गरीबों, दलितों और महिलाओं के उत्थान के लिए तय राशि को कम करने के मोदी सरकार के फैसले का विरोध नहीं किया. सोनिया ने यह भी याद दिलाया कि एआईडीएमके ने एनडीए सरकार का संसद में समर्थन किया है.

बाढ़ पीड़ितों को चार हफ्ते में बीमा राशि दिलवाने का मोदी सरकार का वादा अभी तक अधूरा है: सोनिया

सोनिया ने चेन्नई के लोगों के साथ जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश करते हुए कहा कि बाढ़ के बुरे हालात में यहां सरकार लोगों के काम नहीं आई बल्कि लोग एक दूसरे के काम आए.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि चार महीने बीत जाने के बाद भी बाढ़ पीड़ितों को चार हफ्ते में बीमा राशि दिलवाने का मोदी सरकार का वादा अभी तक अधूरा है.

सोनिया ने पानी की भारी किल्लत के मुद्दे पर भी जयललिता और नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पीने के पानी और खेती के लिए पानी की कमी पर केंद्र और राज्य सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है.

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अपने भाषण में उन्होंने श्रीलंका द्वारा लगातार भारतीय मछुआरों को पकड़े जाने और उनकी नावों को जब्त किए जाने के मामले में भी केंद्र और राज्य सरकारों पर नाकामी का आरोप लगाया. सोनिया ने राज्य में बिजली की कमी का ज़िक्र करते हुए कहा कि जयललिता सरकार के पांच सालों में तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था ठप्प हो गई है, कारखानें राज्य से जा रहे हैं और लोग नौकरियां खो रहे हैं.

रैली में एम करूणानिधि ने खुद डीएमके और कांग्रेस के उम्मीदवारों को जनता से मिलवाया लेकिन पार्टी के स्टार उम्मीदवार एम के स्टालिन इस मौके पर मौजूद नहीं थे. स्टालिन पश्चिमी तमिलनाडु में चुनावी रैली में व्यस्त थे.

करूणानिधि ने कहा कि कांग्रेस के साथ डीएमके का 2004 से लंबा और गहरा रिश्ता है. हालांकि उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि दस साल सत्ता साझा करने के बाद 2014 में वो क्यों यूपीए से अलग हुए.

सोनिया की रैली में डीएमके के स्टार उम्मीदवार एम के स्टालिन मौजूद नहीं थे

दोनों नेताओं ने भ्रष्टाचार के मामले पर कुछ नहीं कहा लेकिन सोनिया ने डीएमके की सरकार आने पर लोकायुक्त नियुक्त करने का भरोसा दिलाया. यह देखना दिलचस्प रहा कि रैली के दौरान करुणानिधि की बेटी और टूजी घोटाले की आरोपी कनिमोझी सोनिया के साथ अगली सीट पर बैठी थीं. वहीं एयरसेल मैक्सिस डील मामले में सीबीआई जांच झेल रहे दयानिधि मारन डीएमके प्रमुख को सोनिया के भाषण की बातें समझा रहे थे.

करुणानिधि ने सोनिया के साथ रैली साझा करने से पहले स्थानीय कांग्रेस नेताओं के जरिए साफ संदेश पहुंचा दिया था कि वो सत्ता में भागीदारी नहीं करेंगे.  2006 में भी कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाने के बाद भी डीएमके ने 40 विधायक होने के बावजूद कांग्रेस को सत्ता में हिस्सेदारी नहीं दी थी. जबकि महज़ 15 सांसदों के बल पर डीएमके ने यूपीए में अच्छे खासे भारी-भरकम मंत्रालय हासिल किए. सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार को मजबूत रखने के लिए इसे स्वीकार किया था.

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इस बार भी चुनाव का परिणाम चाहे जो हो करुणानिधि ने सत्ता में साझेदारी न करने की बात कह कर मामला साफ कर दिया है. वो जानते हैं कि केंद्र में अपने सबसे खराब दौर से गुज़र रही कांग्रेस ज्यादा सौदेबाजी नहीं कर पाएगी.

तमिलनाडु में जीके वासन के पार्टी छोड़ने के बाद पी चिदंबरम ही बड़े कांग्रस नेता बचे हैं. चिदंबरम चुनाव में सक्रिय हैं लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपी बेटे कार्थी को टिकट ना मिलने से नाराज हैं. इस रैली से दूरी बनाकर उन्होंने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर भी कर दी.

First published: 8 May 2016, 8:23 IST
 
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